मेरे दोस्त ने मुझे अपने घर बुलाया और मुझे उसकी पत्नी से प्यार हो गया

Vivek Surendran
wife

(जैसा कि विवेक सुरेंद्रन को बताया गया)

जब वह मेरे साथ रात बिताने का तरीका निकाल लेती है उन दिनों में मैं अक्सर जल्दी जाग जाता हूँ और उसे सोते हुए देखता हूँ। उसकी अपनी एक खास खुशबू है, उसके शरीर, पसीने, साँस और परफ्यूम की गंध का एक आर्कषक मिश्रण, जो मेरे लिए नामुमकिन कर देते हैं कि मैं उसे स्पर्श ना करूं। बार-बार। हालांकि, ऐसी सुबहों में, मैं अपनी तीव्र इच्छा को रोकता हूँ और सिर्फ उसे देखता रहता हूँ। मैं जानता हूँ कि जब वह मेरे पास होती है तो शांति से सोती है और मुझे हर उस चीज़ से चिढ़ है जो उसकी नींद खराब करे चाहे वह अलार्म हो या फोन कॉल। वह, जो अक्सर कच्ची नींद सोती है, मेरे साथ होने पर गहरी नींद में होती है। उसे सोते हुए देखना मेरे जीवन के सबसे संतुष्टिदायक अनुभवों में से एक है। यह मुझे उसके जीवन में अपने महत्त्व का आश्वासन देता है।

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मैं खुद को खुशकिस्मत समझता हूँ कि मैं उसकी साँसों को महसूस कर पाता हूँ, उसकी बेदाग त्वचा, उसकी तीखी कॉलरबोन, उसके पैरों को छू पाता हूँ और शारीरिक और भावनत्मक रूप से उसके इतने करीब हूँ। वह मेरे लिए भगवान है।

पिछले साढ़े सात महीनों के दौरान, ऐसी सुबहें भी मुझे तोड़ देती हैं। और मेरे भीतर का एक अंश पहले ही टूट रहा है क्योंकि मुझे पता है कि क्या होने वाला है। यह याद करते हुए मैं हर बार टूट जाता हूँ कि वह सुबह जागेगी, देखेगी कि मैं उसे देख रहा हूँ, मुझे सबसे खुबसूरत मुस्कुराहट देगी जैसी मैंने ज़िंदगी में पहले कभी नहीं देखी – लेकिन अपनी आँखों में आंसू लिए- मेरे बाल सहलाएगी, मुझे अपने पास खींचकर, मेरे होंठों पर किस करेगी, और फिर उठ जाएगी, तैयार होगी और चली जाएगी। ऐसी सुबहों पर वह मुझे देखती नहीं और ना ही मुझसे बात करती है। वह मुझे आखरी हग नहीं देती और बाय भी नहीं बोलती। वह बस चली जाती है।

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मुझे याद है जब मैं उससे पहली बार मिला था। मैं तब दिल्ली में रहने आया ही था। अक्षय, इंजीनियरिंग के दिनों का एक दोस्त, अगली ही शाम एक पार्टी दे रहा था और उसके आग्रह करने पर मैं चला गया। मैंने एक सफेद शर्ट निकाला और उसे अपनी पसंदीदा नीली जीन्स के साथ पहना, एक वाईन की बोतल और बुके लेकर मैं कैब से उसके घर पहुँचा। हम आठ सालों बाद मिल रहे थे। मुझे पता नहीं था कि उस रात मेरी ज़िंदगी बदल जाएगी।

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मैंने बैल बजाई, इस उम्मीद में कि वह दरवाज़ा खोलेगा। लेकिन जैसे ही उस लड़की ने दरवाज़ा खोला, मैं प्यार में पड़ गया। उसकी खुशबू ने मुझे इस कदर छूआ कि मैं उसकी आँखों में देखता ही रह गया। उसने दरवाज़ा खोला और फिर मैंने पहली बार वह सबसे सुंदर मुस्कुराहट देखी। मुझे लगा कि उसने सीधे मेरे दिल में देखा। और फिर उसने मेरे चेहरे के सामने अपना हाथ हिलाया। हक़ीक़त में वापस लौटते हुए, मैंने कहा, ‘‘बुरा मत मानना लेकिन मैंने अपनी ज़िंदगी में तुम्हारे जितनी खूबसूरत लड़की नहीं देखी।” वह शर्माई नहीं, शायद इसलिए क्योंकि वह जानती थी कि वह सुंदर है। उसने रहस्यमई ढंग से मेरी ओर देखा और मैंने उसकी चमकती हुई आँखें देखी। ‘‘हमारी दुनिया में आपका स्वागत है सर” उसने कहा। उसकी नज़रों से अपनी नज़र हटाए बगैर, मैंने उसे वह बुके दे दिया जो मैं अक्षय की पत्नी को देने वाला था। यह देखकर कि मैं अब भी बाहर ही खड़ा था उसने बुके ले लिया और पीछे हट गई। अक्षय मेरा कॉलेज का नाम पुकारता हुआ आया और मुझे गले लगा लिया। मैंने उसे वाइन की बोतल दी, उन सब को हेलो बोला जो वहाँ मौजूद थे और वहीं जम गया। मैं उनमें से किसी को नहीं जानता था। पार्टी पहले ही उस मुकाम तक पहुँच चुकी थी जहाँ वे सब नशे में थे और उन्हें कोई परवाह भी नहीं थी।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

जब अक्षय कुछ देर मुझसे बात कर रहा था, मेरी नज़रें उसी को ढूंढ रही थीं। मैंने उसे देखा, वह मेरे द्वारा लाए गए ऑरकिड्स को टेराकोटा के गुलदस्ते में रख रही थी। उसके बाद उसने मुझे देखा और हमारी नज़रें मिली। वह एक एसिडिक ऑलिव ग्रीन रंग की दीवार पर टिकी और अपनी उसी मुस्कुराहट के साथ मुझे देखती रही। मैंने सुना नहीं कि अक्षय क्या कह रहा था, और उसके एक दोस्त ने उसे म्यूज़िक बदलने के लिए बुलाया। वह तब भी मुझे ही देख रही थी। पता नहीं मुझे क्या हुआ और मैं सीधे उसके पास चला गया।

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“फिर से हेलो, मैंने आपसे जो पहली बात कही उसके लिए मैं माफी चाहता हूँ लेकिन यकीन मानिए ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।” मैंने आत्मविश्वास के साथ कहा। वह मुस्कुराई, उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और कहा, ‘‘अमीशा। अमीशा शर्मा।”

मैं अब भी हैरान था, मैंने उससे हाथ मिलाया।

अचानक अक्षय पता नहीं कहाँ से आ गया, उसने उसकी कमर में हाथ डाला और कहा, ‘‘भाई, मेरी पत्नी से मिलो,’’ और मुझे लगा कि मेरे दिल के लाखों टुकड़े हो गए हैं। मैंने अपना हाथ छोड़ा, एक दो पल के लिए उन्हें देखा, और कहा, ‘‘मुबारक हो।”

आज, हम तीनों ने यह मान लिया है कि अमीशा और मैं एक दूसरे से प्यार करते हैं और वे दोनों शादीशुदा हैं, और यह भी कि मैं हमेशा दूसरा मर्द रहूँगा।
(पहचान सुरक्षित करने के लिए नाम बदल दिए गए हैं)

मैं प्यार के लिए तरसती हूँ…मैं स्वीकृति के लिए तरसती हूँ

मेरे ससुराल वालों ने हमें अपने घर से बाहर निकलने के लिए कहा

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