Hindi

मेरे लुक्स के बारे में मेरे ससुराल वालों की टिप्पणियां मुझे दुख पहुंचाती थीं और फिर मैंने अपना आत्म सम्मान वापस पाया

अपने नए ससुराल वालों की निर्दयी टिप्पणी ने एक युवा दुल्हन के आत्म सम्मान पर एक जख्म का निशान छोड़ दिया जो शादी के 25 साल बाद भी ठीक नहीं हुआ।
sad woman irritated

 

उसके ससुराल वालों ने उसके लुक्स पर निर्दयी टिप्पणियों के साथ उसका स्वागत किया

समयः 25 साल पहले

स्थानः एक छोटे से गांव में पंजाबी परिवार का लिविंग रूम

यह मेरे ससुराल वालों का घर था। मेरी शादी हुई ही थी और मैंने बारात के साथ अपने ससुराल वालों के घर में प्रवेश किया था। उन्होंने मुझे ड्राइंग रूम में पहुंचा दिया। हालांकि मेरा सिर ढंका हुआ था और आँखे झुकी हुई थीं, मैंने चुपके से लिविंग रूम में एक त्वरित नज़र डाली। शोकेस में कुछ कढ़ाई वाली गुड़िया थीं, कुछ डाक्टर के पर्चे और एक कढ़ाईदार टी कोसी था। मैं उस सोफे पर बैठी थी जिसका कपड़ा हाल ही में बदला गया था। सोफे के पीछे लेस वाला कपड़ा था ताकि वे हमेशा नए दिखें।

और वहां मैं थी, 19 वर्ष की लड़की जो ऐसे आत्म विश्वास से भरी थी जो केवल बिना शर्त प्यार करने वाले माता-पिता ही दे सकते हैं, अनुष्का शर्मा के रिसेप्शन वाली साड़ी जैसी बनारसी साड़ी पहने हुए और सिर ढंके हुए। मैंने सोने का एक भारी सेट पहन रखा था जो खानदानी था, हालांकि मुझे यकीन है कि मेरी सास को लगता था कि मैं खानदान को आगे बढ़ाने योग्य नहीं हूँ। पंखा शोर ज़रूर कर रहा था लेकिन तपती गर्मी में वह किसी काम का नहीं था और मैं निरंतर पसीना बहाती रही।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

यह कितनी काली है और इसके होंठ कितने भरे हुए हैं

मेरे ससुराल वालों ने दुल्हन को देखने के लिए कुछ पड़ोसियों और दोस्तों को बुलाया था। परंपरा यह थी कि मैं उनके पैर छूउंगी और वे मुझे किस करेंगे या गले लगाएंगे और कुछ पैसे देंगे। 50 निर्दयी लोगों के पैर छूने से मेरे सिर में दर्द हो रहा था और मैं लेटना चाहती थी और साथ ही छोले भटूरों पर टूट पड़ना चाहती थी।

दबी हुई आवाज़ें आनी शुरू हो गई, ‘‘क्या यह एक प्रेम विवाह है?’’

मेरी सास ने घबरा कर कह, ‘‘नहीं, क्यों?’’

“यह कितनी काली है।”

मेरी सास ने हामी में सिर हिलाया।

“आपके बेटे ने हाँ क्यों कहा?’’

मेरी सास बहुत दुखी दिख रही थी। जैसे कि कहना चाहती हो, कि उन्होंने कितना बड़ा बलिदान दिया है।

मैंने सुना था कि एक रिश्तेदार बुराई के लहजे में कह रही थी कि इन्होंने बहुत ज़्यादा दहेज लिया होगा लेकिन मेरी सास ऐसे दिखा रही थी जैसे उन्हें कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था।

यह मेरे रंग के साथ मेरा पहला सामना था। इससे पहले मेरे माता-पिता ने कभी मेरे रंग पर टिप्पणी नहीं की थी और ना ही उसके बारे में बात की थी। मैं उनकी छोटी सी राजकुमारी थी।

“इसके होंठ बहुत बड़े हैं,’’ किसी ने बुदबुदाया। यह सिलिकॉन द्वारा फुलाए गए होंठो के चलन से पहले के युग की बात है। मेरा मुंह बहुत ज़्यादा बड़ा था जिसके लिए मुझे शर्मिंदा किया गया था। यह हमेशा ऐसा लगता था जैसे मधुमक्खी ने काट लिया हो, खास तौर पर जब मैं सुबह उठती थी, लेकिन मेरे ससुराल वालों के लिए यह बहुत शर्मिंदगी की बात थी। सुंदरता की उनकी अवधारणा थी पतला होना, मतलब पतले होंठ, मेरी तरह बहुत बड़ा मुंह नहीं।

She is so dark
Representative Image source

मैं युवा थी और निर्दयता से मेरा सामना नहीं हुआ था

जब मेरी शादी हुई तब मैं बहुत कम उम्र की थी और निर्दयी दुनिया से मेरा कोई संपर्क नहीं रहा था। उनके शब्दों और रवैये ने मेरे अहं को तार-तार कर दिया और इसे वास्तव में नाजु़क बना दिया। और मेरा आत्म सम्मान पूरी तरह खत्म हो गया। और मुझे उनकी बात पर यकीन हो गया कि मैं बहुत बदसूरत थी। आज भी मैं अपनी त्वचा के रंग से मेल खाता फाउंडेशन नहीं खरीद सकती, मैं हमेशा तीन शेड लाइट फाउंडेशन खरीदती हूँ।

जब भी मैं फाउंडेशन खरीदने जाती हूँ तो काउंटर पर खड़ी लड़की पूछती है, ‘‘मैम यह आपके लिए है,’’ और मैं उदासीनता से कहती हूँ, ‘‘नहीं यह मेरी बेटी के लिए है।” फ्रैंडली लड़की मुस्कुराती है और कहती है ‘‘ओह फिर ठीक है क्योंकि आप पर यह अजीब लगेगा।”

और मेरे मुंह के लिए, मैं होंठों को पतला करने के लिए पहले लिप लाइनर का उपयोग करती हूँ और फिर उन्हें भर देती हूँ।

हम एक महानगरीय शहर में चले गए। मेरे पति हमेशा मेरी तारीफ किया करते थे, जिन पर मैं कभी यकीन कर लिया करती थी और कभी नहीं। मैं यही सोचती रहती थी कि क्या वह झूठ बोल रहे हैं या मुझे खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे लुक्स के बारे में मेरी भावनात्मक स्थिति बहुत नाज़ुक थी।

your colour

मैंने उस शहर में एक जिम ज्वाइन कर लिया और इसी बीच कुछ दोस्त बना लिए। मेरे बच्चे थे और उनके दोस्तों के माता-पिता के साथ मेरी दोस्ती हो गई। और फिर मेरा आत्म सम्मान वापस आना शुरू हुआ, क्योंकि वे मेरी तारीफ करते थे, मेरे रंग से जलते थे क्योंकि यह दोष रहित था। लेकिन आत्म विश्वास अब भी कम था। मैं कभी भी अपनी तारीफ को स्वाभाविक रूप से स्वीकार नहीं कर पाती थी; मैं हमेशा सोचती थी कि उनका कुछ दूसरा अर्थ है। मैं सोचा करती थी कि ‘‘क्या वह मुझ पर हंस रही है या सच कह रही है?’’

धीरे-धीरे मेरा आत्म सम्मान बढ़ा

मैंने एक एनजीओ में पढ़ाना शुरू कर दिया और लिखना शुरू कर दिया। मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया और अब मुझे अपने लुक्स के बारे में किसी के सत्यापन की ज़रूरत नहीं थी।

भले ही आप खुद को कितना भी कहें कि कुछ फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आपको हमेशा फर्क पड़ता है। मेरी त्वचा के बारे में कुछ भी कहो और मुझे दर्द होगा।

जब मेरी सास अपनी मृत्यु शय्या पर थीं तब उन्होंने मुझे बुलाया और कहा, ‘‘तुमने मेरे साथ हमेशा अच्छा बर्ताव किया है और मैं तुम्हारे लिए ये ज़ेवर छोड़ कर जा रही हूँ। मेरे पास शुद्ध ज़री वाले दो बनारसी दुपट्टे हैं जो मेरी सास के थे, लाल वाला देवरानी के लिए है क्योंकि वह बहुत गोरी है और तुम्हारे लिए पीच वाला है क्योंकि तुम गोरी नहीं हो।”

मुझे हमेशा से पीच दुपट्टा ज़्यादा पसंद था। क्या मैं खुश थी क्योंकि मुझे पीच दुपट्टा मिला था, या फिर दुखी थी क्योंकि फिर से मेरे काले रंग के बारे में कहा गया था।

मैं अपना मन नहीं बना सकी।

लेकिन मैं जानती थी कि ये कांटे मुझे पहले की तरह नहीं चुभते थे और मैं आशा रखती हूँ कि मुझे इनसे फर्क पड़ना बिल्कुल बंद हो जाएगा और तब मैं पिछली बातों के बारे में हंसा करूंगी और सोचूंगी ‘‘कि मैं उन्हें इतनी गंभीरता से लेती ही क्यों थी?’’

उसने मेरे माथे को चूमा और मैं फिर से जी उठी

वजाइना से जुड़े ये 5 मिथक हैं जिन्हे स्पष्ट करने की ज़रूरत है

Facebook Comments

1 Comment

  1. Mera complexion bhi dark h meri shadi abhi kuchh din pahle hi hui h.mere in-laws nhi h but meri jethani bahut hi caring h.shadi k Baad mujhe pata chala ki mere husband k bade bhai Ko Mai pasand nhi thi unhone mere husband Ko mana bhi Kiya mujhse shaadi karne ko bt wo nhi maane or unhone mujhse shadi ki. Unke saare relatives mere complextion Ko lekar mere peeth peeche baaten karte h mujhe pata h bt mujhe in sab baaton se koi fark nhi padta kyoki mere ander bahut confidence h or mere husband Ko bhi mere looks se koi fark nhi padta Mai jaisi bhi hu wo Bolte h Mai unke k liye perfect hu.or Mai diabetic bhi hu itni kamiyan home k bawjud bhi wo mujhe bahut pyaar karte h or meri bahut care karte h.to kya fark padta h agar log tumhare baare me Bura bolte h tumhe pasand nhi karte tumhara life partner to tumhare saath h na hr kadam pr or kya chahiye.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also enjoy:

Yes No