मेरे प्रेम जीवन पर मोदी जी का प्रभाव – विमुद्रीकरण के दौरान प्रेम

(जैसा अर्चना मोहन को बताया गया)

पिछले साल 8 नवंबर को, मैं अपने जीवन का सबसे बड़ा जोखिम उठाने के लिए तैयार हो गया -शादी के लिए अपनी गर्लफ्रेंड का हाथ मांगने के लिए।

मैंने शहर के सबसे अधिक मिशलिन सितारे वाले रेस्त्रां में सबसे उत्तम टेबल बुक की थी। केक, नृत्य और हीरे की अंगूठी सब होना था; उसके सामने यह सब आधीरात होते ही प्रस्तुत करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी।

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मेरी सबसे उत्तम योजनाएँ

मुझे क्या पता था, हमारे प्रधानमंत्री साहब की स्वयं की योजनाएं थीं! उसी शाम को थोड़ा पहले, एक अनिर्धारित घोषणा में, उन्होंने घोषणा की कि सभी 500 और 1000 के नोट तत्काल प्रभावी रूप से अवैध हो जाएंगे। मैं आर्थिक रूप से इसके निहितार्थ के बारे में निश्चित नहीं था, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर, ऐसा लगा जैसे ‘विमुद्रीकरण’ (नोटबंदी) से एक दानव बाहर निकल आया है और उसने मेरी विवाह की योजनाओं पर पानी फेर दिया है।

फोन निरंतर बजता रहा और ऐसे कारण से जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी।

“जाओ और एटीएम के बाहर कतार में खड़े हो जाओ!’’ मेरे पिताजी चिल्लाए।

“लेकिन आज मुझे बहुत ज़रूरी काम निपटाना है,’’ मैंने विरोध किया।

“अभी के अभी यहां से निकल जाओ!’’ वे वापस गरजे।

मेरी सबसे उत्तम योजनाएँ
मेरी सबसे उत्तम योजनाएँ

योजना रद्द करना

हार कर, मैंने अपनी गर्लफ्रेंड को फोन किया।

पता चला, कि वह पहले ही अपने गृहनगर जाने वाली बस में बैठ चुकी थी। योजना रद्द करने पर वह मेरे प्रति ज़रा भी क्षमाशील नहीं थी। उसे ज़मीन में गढ़ा हुआ नकद निकालने के लिए अपने लोगों की सहायता करनी थी। मैंने सोचा कि उसमें उसका दोष नहीं था। उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि वह दिन कितना विशेष हो सकता था!

अगले दिन 4 बजे, मैं बैंक की कतार से प्रकट हुआ, वाशिंग मशीन में एक पस्त मोजे की तरह। इस कोलाहल के बीच मैंने अपने वीर प्रयासों के लाभ की गणना की और पहली बार मुझे यह अहसास हुआ कि पैसा हमारे लिए क्या मायने रखता है। सबसे महत्त्वपूर्ण, पैसों पर हमारी आसान पहुंच खतरे में पड़ने का जो प्रभाव हम पर पड़ा।
अचानक, मेरे आसपास की दुनिया बदल गई।

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दुनिया बदल चुकी थी

मेरे माता-पिता जो कहते थे कि ऑनलाइन भुगतान करना मेरे विनाश का कारण बनेगा, अब वे चाहते थे कि मैं उनके लिए इंटरनेट बैंकिंग सेट कर दूँ।

मेरी गर्लफ्रेंड जो किराने की दुकान पर आयात की हुई पानी की बोतल खरीदने के लिए अच्छी-खासी रकम चुकाती थी, उसने नकद बचाना शुरू कर दिया और यह जान गई की घर पर उबाला हुआ पानी पीने से वह मर नहीं जाएगी।

पैसे निकालने जाने के लिए बैंक में डाले गए दर्दनाक डेरे पर्याप्त थे कि मैं हर खर्च बंद कर दूँ। मैंने अपने मोबाइल से ऑनलाइन शॉपिंग के सारे एैप डीलीट कर दिए जहां मैं ‘लाइटनिंग डील उत्पादों’ पर ‘कैश ऑन डिलीवरी’ का बटन दबाकर अपना आधा वेतन खर्च कर दिया करता था और मुझे लगता है मैं उन्हें तभी इस्तेमाल करूंगा जब मुझ पर बिजली गिरेगी।

मैं आर्थिक तौर पर विवकेशील बन गया। साबुन खत्म हो गया? कोई बात नहीं। मैंने किचन से थोड़ा सा बेसन लिया और सफाई करने के उसके चमत्कारिक गुणों का आनंद लिया।

साबुन खत्म? कोई बात नहीं। मेरी गर्लफ्रेंड ने भी मेरी सहायता की
साबुन खत्म? कोई बात नहीं। मेरी गर्लफ्रेंड ने भी मेरी सहायता की

जब मैंने यह अपनी गर्लफ्रेंड को बताया, मुझे विश्वास था कि हमारा संबंध ही समाप्त हो जाएगा।

इसकी बजाए, उसका चेहरा चमक उठा।

“इसमें थोड़ी मलाई मिला लो। त्वचा का सर्वश्रेष्ठ टोनर,” उसने सलाह दी।

हमारे संबंध के विषय में मेरे मन में जो भी शंका थी, उसके इस वाक्य ने वह दूर कर दी।

एक सरल जीवन

थियेटर (जहां हम पॉपकॉर्न पर लाखों रूपये लुटाते थे), मॉल, क्लब की जगह हमने साप्ताहंत के दौरान स्थानीय उद्यानों में जाना शुरू कर दिया। एक इत्मीनान भरी चहलकदमी, फेरीवाले से थोड़ा चना खरीदना और शांति से घास पर बगैर कुछ किए लेटना। जब हमारे पास नकदी की कमी होती थी, हम लोकल ट्रेन में यात्रा करते थे या फिर फेरीवाले को ई-वॉलेट सेट करने में सहायता करते थो ताकि उसके व्यवसाय में नुकसान ना हो।

धीरे-धीरे स्थितियां स्थिर होने लगीं। नकद निकासी पर लगे प्रतिबंध ढीले पड़ने लगे। इतने अधिक लोग डिजीटल हो गए थे जितने पहले कभी नहीं हुए थे, जिसमें हमारा पसंदीदा गोलगप्पे वाला भी शामिल था जो कभी स्कूल तक नहीं गया था।

भव्य पार्टियों, रात्रिभोज और सरप्राइज़ उपहारों वाले अपने पुराने जीवन में लौट जाना तार्किक होता, लेकिन बगैर किसी बात के अपव्यय करने का लोभ हमें व्यर्थ लगा। चाय के कप पर 250 रूपये क्यों उड़ाना जब ऑफिस के बाहर चाय की छोटी गुमटी उससे ज़्यादा स्वादिष्ट चुस्की उससे दस गुना कम दाम में देती है?

विमुद्रीकरण के कारण मेरी खाली जेब और परिणामस्वरूप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कम खर्च वाली डेट्स के कारण मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।

एक सरल जीवन
एक सरल जीवन

सरल सबसे अच्छा है

सबसे पहले, अब मैं जान गया हूँ कि सरल पल जीवन के सर्वश्रेष्ठ पल हैं; अपने प्यारे लोगों के लिए खाना बनाना, अपने कुत्ते को बाहर सैर के लिए ले जाना या फिर सिर्फ समुद्र तट के किनारे बैठकर लहरों को दूर जाते हुए देखना।

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विमुद्रीकरण कितना सफल था? इसपर मेरे और मेरी गर्लफ्रेंड के विचार बिल्कुल विपरीत हैं। हमारे गहरे विरोध वाले राजनीतिक विचारों के बावजूद किसी को प्रेम करना, अन्य वस्तु है जो मैंने इस विलक्षण कार्यवाही के बाद सीखी है और मैं आशा करता हूँ कि यह मैं जीवन भर करूंगा।

अब लगभग एक वर्ष बाद, मैंने अपनी गर्लफ्रेंड के सामने फिर से शादी का प्रस्ताव रखने का निर्णय लिया है। इस बार कोई बड़ा रेस्त्रां या तामझाम नहीं होगा। मैं योजना रद्द करना नहीं चाहता लेकिन यह कहना पर्याप्त है, कि यह उसके लिए एक सरल लेकिन अर्थपूर्ण प्रयास होगा।

आशा है कि सब योजना के अनुसार होगा और वह हाँ कहेगी।

बेशक यह प्रधानमंत्री महोदय के एजेंडा का विषय है। हे भगवान कृपया इस वर्ष की पार्टी बिगाड़ने के लिए कोई ‘मित्रों’ ना हो!

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