मेरे साथी की मृत्यु के बाद मुझे इन चीज़ों का पछतावा है

Aishwarya Bharadia
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एक सुखी और लंबे विवाह के बाद, हाल ही में अपने साथी को खोने वाले पुरूषों और स्त्रियों ने अपने कुछ गहन अफसोस साझा किए। वे किस प्रकार बेहतर साथी बन सकते थे इस बारे में उनके विचार उन लोगों के लिए मूल्यवान हैं जिनके पास अब भी मौका है।

1. मेरे बारे में पूछने वाला कोई नहीं

“मेरी पत्नी बिना चूके मुझे हर शाम छः बजे फोन करती थी यह पूछने के लिए कि मैं घर कब लौटूंगा। उस समय, मुझे इस बात से बहुत चिढ़ होती थी और मैं अक्सर वापस काम शुरू करने के लिए वे कॉल तुरंत काट दिया करता था। उसे केंसर की वजह से गुज़रे हुए छः महीने हो चुके हैं, और अब घंटों बीत जाते हैं और कोई भी डिनर के लिए घर पर मेरा इंतज़ार नहीं करता। काश की मैं वक्त को मोड़ सकता और उसे बता सकता कि मैं उन कॉल की कितनी सराहना करता था।” – व्यवसायी, 62

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हम अपने साथी के शर्तहीन प्यार और समय के महत्त्व को कम आंकते हैं और हर चीज़ को उनसे ज़्यादा प्राथमिकता देते हैं। इस रास्ते पर कहीं ना कहीं जो वह हमारे लिए करते हैं हम उसकी सराहना करना भूल जाते हैं। अपने साथी को यह बताएं कि वह आपके लिए कितना महत्त्वपूर्ण है।

2. लड़ने में समय बर्बाद किया

“मेरा पति और मैं कई छोटी-बड़ी चीज़ों के लिए लड़ते थे। असहमति के लिए मेरी समान्य प्रतिक्रिया होती थी उसके साथ काफी दिनों तक बात ना करना, गुस्से में बच्चों के कमरे में सोना, या बगैर कुछ बोले चुपचाप खाना खा लेना। काश कि मैंने उन झगड़ों को उतने दिन तक नहीं खींचा होता, अधिकांश समय यह मेरे अहंकार के बारे में था। काश कि मैं कम ज़िद्दी होती।” – गृहणी, 56।

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कभी-कभी हम ज़रूरत से ज़्यादा समय तक मन में द्वेश पाल लेते हैं क्योंकि हमें लगता है कि हमारे पास अनंत वर्ष हैं। और जैसा कि हम जानते हैं, हमारे सोलमेट्स के साथ अनंत काल भी पर्याप्त नहीं है। अगली बार जब असहमति हो, इस बारे में सोचें कि आपके लिए क्या महत्त्वपूर्ण है और अपने साथी के साथ अपने दिनों को खराब ना होने दें।

3. उसे क्या चाहिए था?

“जब उसकी मृत्यु हो गई, मुझे यह भी नहीं पता था कि उसे किस तरह सम्मान दूँ और वह कैसा चाहती थी। काश मैं उससे चर्चा कर सकता कि क्या वह चाहती थी कि मैं उसे रेशम की साड़ी दूँ, ज़ेवर या महंगी बालियां दूँ। अब वह जा चुकी है और मैं बस अनुमान लगा सकता हूँ कि हो सकता है वह ऐसा चाहती थी।” – वकील, 71।

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हालांकि मृत्यु अपरिहार्य है, हम अंतिम इच्छाओं के बारे में बातें करने से बचते हैं। यह बातचीत हमें असहज बनाती है और हम अपने साथी के बगैर जीने के बारे में सोचना पसंद नहीं करते। भले ही यह कितना भी कठिन हो, बैठो और इस बारे में बात करो, ताकि जब समय आए, तब आप उनकी अंतिम इच्छा पूरी कर सको।

4. उसकी अहमियत नहीं समझी

“मैं अपने पति की तुलना हमेशा अपने जेठ से करती रहती थी और बार-बार उसे उसकी कमियों की याद दिलाती रहती थी। मैं हमेशा उसे नीचा महसूस करवाती थी और मेरे प्रति उसकी उपलब्धियों और प्रतिबद्धताओं को कम आंकती थी। मैं उसकी छोटी से छोटी गलती के लिए उसकी बुरी तरह आलोचना करती थी और मेरे मन मुताबिक करने के लिए उसे उसकी सीमा से बाहर काम करने के लिए मजबूर करती थी। उसके जाने के बाद, मुझे अहसास होता है कि मैंने अपना सबसे बड़ा समर्थक और ऐसा व्यक्ति खो दिया है जिसने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा होता।” – इंटीरियर डिज़ाइनर, 41।

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हम अपने साथी की गलती निकालने के लिए बहुत तत्पर होते हैं और हमारे सबसे बड़े सहयोगी और ऐसे व्यक्ति के मूल्य को पहचानने में असफल रहते हैं जो हर हाल में हमारा साथ देगा। अगली बार जब आप अपने साथी से मिलें, उन्हें प्यार जताएं और उन्हें बताएं कि वे किस तरह आपका जीवन बेहतर बनाते हैं।

हममें से उनके लिए जो इतने भाग्यशाली हैं कि अब भी अपने साथी के साथ कुछ और वर्ष रह सकते हैं, चलो उनका महत्त्व याद रखें, और केवल इसलिए उनके मूल्य को नज़रंदाज़ ना करें क्योंकि हम उम्मीद करते हैं कि वे हमेशा साथ रहेंगे।

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