मेरी माँ को लिखा मेरा यह पत्र हर बेटी को पढ़ना चाहिए

Shruti Swaroop
Lady, deep in thought, writing

प्रिय नेहा,

आज फिर मैंने अपनी माँ से झगड़ा किया। मैं उनसे प्यार करती हूँ और उनके बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकती लेकिन उन्हें मुझे जाने देना चाहिए।

वह चाहती थीं कि मैं आज उनसे मिलूं; आखिरकार, बुधवार शाम क्लिनिक बंद होता है। लेकिन, मैं उनसे मिलना नहीं चाहती थी। मुझे यकीन है कि मुझे अपनी इच्छा से जीवन जीने की अनुमति है। वह यह नहीं समझती हैं। उन्होंने मुझे यह कहने के लिए फोन किया कि मैं सिर्फ उन्हें अनदेखा करती हूँ। यह ब्लेकमेल करने के साथ शुरू हुआ, ‘‘तुम मुझसे प्यार नहीं करती हो।” फिर बुरी टिप्पणियां आने लगीं, ‘‘तुम खाली समय में अपनी माँ से भी नहीं मिल सकती हो। तुम ज़रूर अपने जीवन के उन खास पुरूषों के साथ समय बिता रही होगी।” बात इससे भी ज़्यादा बढ़ सकती थी लेकिन मैंने अपना आपा खो दिया और फोन रख दिया।

कभी-कभी मैं सोचती हूँ, मैं उन्हें अपने जीवन के बारे में बताती ही क्यों हूँ। पिछले हफ्ते मैंने उन्हें उस लड़के के बारे में बताया जिससे मैं क्लब में मिली और जो इतना ढीठ था कि 5 मिनट में ही मुझसे डेट पर जाने के लिए पूछ लिया। अब वह जानना चाहती हैं कि क्या मैं उसके साथ अपने भविष्य के बारे में विचार कर रही हूँ। मतलब वह ऐसा कैसे सोच सकती हैं?

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अब से, मैं उन्हें कभी अपनी फुर्सत की शामों के बारे में बताउंगी तक नहीं। मैं उन्हें बताउंगी कि बुधवार की शामें मैं नए क्लिनिक पर काम करते हुए बिताती हूँ। हाहाहाहा! मैं कितनी बुरी हूँ!

मेरे तलाक के बाद, उन्हें लगता है कि मेरी ज़िम्मेदारी फिर से उन पर आ गई है। उस दिन जब रोज़ और उसका पति घर आए, मैंने उन्हें ड्रिंक्स ऑफर किए। बाद में, जब मैं मम्मी को इस बारे में बता रही थी, तो वह गुस्सा हो गई। ‘‘तुम किसी को ड्रिंक्स कैसे ऑफर कर सकती हो? तुम एक सिंगल महिला हो, सिंगल महिला यह नहीं करती है! वे तुम्हारे बारे में क्या सोचेंगे? उन्हें लगेगा कि तुम कुछ ज़्यादा ही आधुनिक हो। इसलिए तुम्हारे पति ने तुम्हे छोड़ दिया – हर बात के बारे में ज़्यादा ही आधुनिक। यह नैतिक रूप से अस्वीकार्य है।”

जब मैं तुम्हें यह पत्र लिख रही हूँ तब भी मेरे कानों में उनकी आवाज़ गूंज रही है। क्या इस दुनिया में कोई भी ऐसा संबंध है जो आसान है।

क्या हमारे आसपास कोई भी ऐसा व्यक्ति है जो हमें महसूस करवाता है कि हम जैसे हैं वैसे ही पूर्ण हैं? कोई ऐसा जो हमें बदलना नहीं चाहता?

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कोई ऐसा जो हमें हमारे वास्तविक रूप में स्वीकार करेगा? शायद नहीं।

मैं सिंगल हूँ, यूवा हूँ और आज के ज़माने में खुद की ज़िंदगी जीने, दोस्तों से मिलने और संबंधों के बारे में सोचने में सक्षम हूँ। अगर आपके कई पुरूष मित्र हैं तो इसमें नैतिक रूप से अस्वीकार्य कुछ नहीं है! सिंगल महिलाओं को समाज के नियमों का पालन क्यों करना चाहिए? मैं उनका पालन नहीं कर सकती और करूंगी भी नहीं। मुझसे कहा जाता है कि देर रात को अकेली ना घूमूं, क्योंकि मुझे सिंगल होने की वजह से गलत समझा जाएगा। मुझे पुरूषों के साथ लंच और डिनर पर ना जाने की सलाह दी जाती हैं क्योंकि वे सोचेंगे कि मुझे पटाना आसान है। हे भगवान!

मैं काम करती हूँ, मैं पुरूषों से मिलती हूँ – मुझे सोशलाइज़िंग की ज़रूरत है। मैं जानती हूँ कि किसके साथ कहां रेखा खींचनी है।

ओह, क्या मैंने आपको बताया कि उन्होंने मेरे नियमित रूप से पार्लर जाने के बारे में भी सवाल किया? ‘‘तुम बाल कलर करके और अच्छी दिख कर क्या करोगी? पुरूषों को लुभा कर मेरे और मेरे परिवार की शर्मिंदगी का कारण बनोगी?’’

women with parlor

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जीवन वैसे भी अकेले गुज़ारना मुश्किल है, तो क्या ज़रूरी है कि वो मेरी तकलीफें और बढ़ाए? कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं शशांक के साथ ही बेहतर थी….कम से कम मेरे जीवन में शोर और अराजकता तो नहीं होती। कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि क्या मुझे उस तक पहुंचना चाहिए। लेकिन 4 साल बहुत लंबा समय होता है। मैं यह तक नहीं जानती कि वह अब भी सिंगल है या नहीं। शायद उसने दुबारा शादी कर ली है। शायद वह अब भी गुस्सा है। शायद वह आगे बढ़ चुका है…

ठीक है, आज के लिए इतना गुस्सा काफी है। गुस्सा खत्म हो चुका है। मैं कल मम्मी को कॉल करूंगी और उनसे बात करूंगी। और वह फिर से किसी बात के लिए चिल्लाएंगी….!

आज के पत्र को समाप्त करने से पहले, कभी मुझे बताना ज़रूर कि आप अपने पड़ोसी से कैसे निपटी जो दूध मांगने के बहाने से आता रहता था। शायद आपको उसे और उसकी पत्नी को किसी साप्ताहंत चाय पर बुलाना चाहिए और कुछ दूध के डिब्बे उपहार में देने चाहिए। हर बार जब आप मुझे उसके बारे में बताती हैं, तो मुझे उस शराब के विज्ञापन की याद आ जाती है – ‘मैन विल बी मैन’।

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मेरे आसपास के विभिन्न पुरूषों के बारे में अधिक जानकारी आपको कल के पत्र में मिलेगी।

प्यार,
सिमरन

जैसे ही सिमरन ने अपना पत्र समाप्त किया, उसकी नज़रें दिवार पर टंगी अपनी मां द्वारा बनाई गई सुंदर पेंटिंग पर टिक गईं। उसकी माँ एक बहुत अच्छी कलाकर थी। वह सिमरन का मुख्य सहारा थी। वह व्यक्ति जिसने अच्छे बुरे हर वक्त में उसका साथ दिया था। और झगड़ों और मतभेदों के बावजूद, सिमरन जानती थी कि अगर कोई उसे सबसे ज़्यादा समझता है तो वह उसकी माँ है।

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