मेरी माँ ने मेरी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार किया

Debashish Majumdar
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जब मैंने एक हंसमुख, सुंदर और ज़मीन से जुड़ी हुई लड़की के साथ शादी की, तो मेरी माँ बहुत निराश हुई। वह दुखी थी कि मेरी पत्नी एक मध्यमवर्गीय परिवार से थी। माँ ईर्ष्यालू और अधिकार जताने वाली थीं। वह चाहती थीं कि हम अपने हनीमून पर भी उन्हें साथ ले जाएं! मैं किसी तरह उन्हें दूर रखने में कामयाब हुआ।

मेरी माँ ने कहा कि मेरी पत्नी को उनके तरीके सीखने होंगे। मेरी पत्नी एक कान्वेंट में पढ़ी लड़की थी और फिर भी मेरी माँ हमारे रिश्तेदार और पड़ोसियों को झूठ बोलती थी कि वह साधारण पृष्ठभूमि से थी और उसकी आदतें असभ्य थीं।

जब भी मेरी पत्नी नौकरी से घर आती थी, मेरी माँ कहती थी कि उसे किचन में जाकर अपने लिए चाय और टिफिन खुद बनाना चाहिए, जबकि हमारे घर में नौकरानी थी। और फिर परिवार वालों के लिए बिस्तर लगा कर डिनर बनाना चाहिए। बस द्वारा लगभग दो घंटे की यात्रा के बाद यह सब बगैर ब्रेक लिए! मेरी पत्नी भोजन उत्कृष्ट बनाती है। लेकिन फिर भी मेरी माँ उसके भोजन में कुछ ना कुछ दोष निकाल लेती थी। मेरी माँ बहुत चिकनी चुपड़ी बातें करती है और एक मासूम चेहरे के साथ भी झूठ बोल लेती हैं। वह अक्सर मेरे पिता को बताया करती थी कि गलती मेरी पत्नी की है। मेरे पिता बहुत गुस्सैल स्वभाव के व्यक्ति थे और सच जानने की कोशिश किए बगैर, वे अक्सर मेरी पत्नी पर भड़क उठते थे।

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जब डिनर की बात आती थी, मेरी माँ ज़ोर देती थी कि वे खुद खाना परोसेंगी। वह भेदभाव किया करती थी और सबसे कम खाना मेरी पत्नी को परोसती थीं। कभी-कभी जब उनका मूड खराब होता था, वे कोशिश करती थीं कि मेरी पत्नी को खाना दें ही नहीं।

मेरी माँ के भयानक व्यवहार और उसके प्रति बुरे रवैये के बावजूद, मेरी पत्नी हमेशा अपनी सास के प्रति सम्मान दर्शाया करती थी। वह हमेशा अच्छा बर्ताव करती थी -उसने कभी मेरी माँ को उल्टा जवाब नहीं दिया, उनका विरोध नहीं किया और ना ही बहस की।

एक बार, मेरा भाई अपनी पत्नी के साथ हमारे यहां आया। मेरी माँ ने बंगाली नववर्ष के लिए उनके कई कज़िन को बुलाया था। मेरी पत्नी और मैं भी उपस्थित थे। मेरी माँ ने दो पैकेट पैक किए और हमारे सभी रिश्तेदारों से कहा कि वह अपनी दोनों बहुओं को समान रूप से पसंद करती थीं। मेरे भाई की पत्नी ने उसका पैकेट खोला और कहा कि मेरी माँ ने उसे बहुत महंगी साड़ी भेंट की थी। मेरी पत्नी समझ गई कि उसे क्या दिया होगा। इसलिए वह बेडरूम में गई और उपहार खोला, वह इतनी सस्ती साड़ी थी जिसे कोई अपनी नौकरानी तक को ना दे! जब मेरी पत्नी पार्टी में लौटी, मेरी माँ ने दावा किया कि वे हमेशा दोनों बहुओं को समान तोहफे देती थीं और वे तोहफे हमेशा बहुत महंगे हुआ करते थे! मेरी पत्नी सबके सामने मेरी माँ का अपमान नहीं करना चाहती थी। इसलिए उसने अपना उपहार मेहमानों के सामने नहीं दिखाया।

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मेरी माँ के जन्मदिन के लिए, हमने उन्हें एक प्यारा उपहार और एक सुंदर बर्थडे कार्ड दिया। मेरी माँ ने शाम की पाटी में उनके दोस्तों को सभी बर्थडे कार्ड दिखाए और सारे तोहफे खोले। सिर्फ हमारा ही कार्ड और तोहफा वहां नहीं था! उन्होंने वहां उपस्थित सभी लोगों के सामने इनकार कर दिया कि हमने उन्हें कुछ दिया नहीं है! उन्होंने कार्ड और उपहार कहीं छुपा दिया था। उन्होंने वहां उपस्थित सभी लोगों के सामने मेरे भाई के उपहार को प्रदर्शित किया!

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जब मेरा बेटा पैदा हुआ, मेरी माँ कभी उसके करीब नहीं आई। उनके लिए, वह पहले मेरी पत्नी का बेटा था। और वह मेरी पत्नी से नफरत करती थीं। तो वह अपने पोते को कैसे प्यार कर सकती थी?

इन वर्षों के दौरान, मेरी पत्नी की सहनशक्ति जवाब दे गई। मैंने उसे विश्वास दिलाया और आश्वस्त किया कि इससे बचने का एकमात्र रास्ता यह घर छोड़ देना है, हालांकि इस पर हमारा भी हक था। मेरे पिता का निधन हो गया, मेरा भाई मुंबई में काम करता है और आज हम अपने स्वयं के अपार्टमेंट में रहते हैं। मेरी माँ जीवित हैं और बहुत बिमार हैं और विडंबना यह है कि उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से मेरे कंधों पर आ गई है। मैं हर सप्ताह के अधिकांश दिन उनकी देखभाल करते हुए बिताता हूँ।

जब मेरी पत्नी बिमार थी, मेरी माँ ने कभी उसका हाल नहीं पूछा। जब मेरी माँ बिमार है, मेरी पत्नी उनकी दवाईयां और डॉक्टर के साथ उनका उपचार भी देख रही है। वह अपनी विशेष खरीदारी, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना भी छोड़ देती है और अस्पताल जाकर मेरी माँ से मिलने और उनकी देखभाल करने को प्राथमिकता देती है। इसके बावजूद, मेरी माँ ने मेरी पत्नी के बारे में एक भी अच्छी बात कभी किसी से नहीं की। मेरी पत्नी ने हमेशा ज़ोर दिया कि मुझे उसके प्रति मेरी प्रतिबद्धताएं त्याग कर अपनी माँ की देखभाल करनी चाहिए। मेरी पत्नी ने नर्सों और अटेंडेंट को बताया कि उन्हें विशेष ध्यान देना चाहिए और अपने कर्तव्यों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। मेरी पत्नी ने मेरी माँ के लिए जो कुछ भी किया उसके लिए वह उसके प्रति रत्ती भर भी आभारी नहीं थीं।

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मेरी माँ द्वारा इतने अत्याचार सहन करने के बावजूद, मेरी पत्नी मुझे कहती है कि मुझे सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कष्ट कम हों। मैं एक बेटे का कर्तव्य पूरा कर सकता हूँ – मेरी पत्नी के मज़बूत समर्थन के लिए धन्यवाद!

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