मेरी शादी ने मुझे इतना डरा दिया कि मैंने आत्महत्या करने की कोशिश की लेकिन मेरे पति ने मुझे बचा लिया

जैसा जोई बोस को बताया गया

(पहले हमने पति के दष्टिकोण और उसकी व्याख्या को प्रस्तुत किया था कि वह अपनी पत्नी से कितना प्यार करता था)

मैंने कम उम्र में ही अपने दोस्त के साथ शादी कर ली थी। हम घंटों तक बातें किया करते थे और मैं उसे सब कुछ बताती थी। शुरू में ऐसा लगा जैसे मैं अपने दोस्त के साथ रहने जा रही हूँ। लेकिन शादी के बाद ही मुझे वास्तव में अहसास हुआ कि हमारी शादी हो चुकी है।

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शादी के बारे में मुझे क्या डर था

शादी? मुझे हमेशा से उस चीज़ से नफरत थी। इसी चीज़ की वजह से मेरी माँ ने दुख झेला था। मैं इसे कभी समझ नहीं पाई थी और यकीन मानिये, मैं हमेशा डरा करती थी। मैं डरा करती थी कि शादी मुझे दुख देगी और मैं दुख झेलने के लिए खुद को तैयार करने लगी।

मेरे पिता अक्सर मेरी माँ को धोखा दिया करते थे। उनकी गर्लफ्रैंड्स थीं। कोई एक नहीं जिससे वे प्यार करते थे बल्कि बहुत सारी। यह प्यार के अलावा बाकी सब चीज़ों के बारे में ज़्यादा था। ईगो सेटिस्फेक्शन के बारे में। यह काम पूरा किए जाने के बारे में था। यह सिर्फ टाइम पास के बारे में था। मुझे याद है कि एक बार मेरे पिता ने नौकरानी के साथ अफेयर कर लिया था। जब उन्हें लगभग रंगे हाथों पकड़ लिया गया, उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने बेकार एक्सक्यूज़ दिए। लेकिन एक 16 साल की लड़की के लिए यह भयानक सदमा था। 10 साल बाद यह सदमा दुगना हो गया जब मैंने उन्हें अपनी माँ की बेस्ट फ्रैंड के साथ पकड़ा।

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एक असमान मिलन

मैं स्कूल से घर लौटती थी तब उनका चेहरा सूजा हुआ होता था
मेरी माँ हमेशा उदास रहती थी

मेरी माँ का परिवार मेरे पिता के परिवार की तुलना में ज़्यादा समृद्ध था और मेरी माँ मेरे पिता से ज़्यादा शिक्षित थी। ऐसा नहीं था कि मेरी माँ उन्हें नीचा दिखाती थी लेकिन वे इन्फीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स से ग्रसित थे। शायद मेरी माँ यह दृढ़ता से बता नहीं पाई की पैसों या उंचे खानदान से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण एक इमानदार दिल है और इस वजह से उन दोनों के बीच बहुत तनाव उत्पन्न हो गया। वे हमेशा लड़ते रहते थे। और मेरी माँ हमेशा उदास रहती थी। मुझे याद है कि हर दोपहर जब मैं स्कूल से घर लौटती थी तब उनका चेहरा सूजा हुआ होता था। उनके साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था।

और मैं उनके आँसूओं के लिए अपने पिता को ज़िम्मेदार ठहराउंगी। इन सब विपत्तियों के अलावा, हमने कई कर्ज लिए थे जो हमें चुकाने थे। मेरी माँ एक-एक पैसा जोड़ती थी। वह टेक्सी लेने की बजाए बस से सफर किया करती थी। रिक्शा लेने की बजाए थोड़ा पैदल चल लेती थी। वह बहुत त्याग किया करती थी। उन्हें इस तरह दर्द झेलते हुए देखना पीड़ादायक था।

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प्यार अच्छा था लेकिन

हालांकि मेरे माता-पिता की प्रेम कहानी बहुत उत्साहपूर्ण थी जहां उन्होंने घर से भाग कर शादी की थी। उनकी प्रेम कहानी बहुत फिल्मी थी क्योंकि वे भिन्न जातियों और वर्गों से थे, लेकिन उन्होंने साथ रहने के लिए सभी सामाजिक बंधन तोड़ दिए थे और इस तरह उनके लाड़ले बच्चे यानी मेरा जन्म हुआ। और उनकी प्रेम कहानी से मुझे यह सीख मिली की प्रेम एक खूबसूरत चीज़ होती है लेकिन शादी नहीं। इस अवधारणा ने मेरे जीवन में घर कर लिया।

इसे महसूस किए बिना, मैंने अपनी शादी में विनाश का इंतज़ार करना शुरू कर दिया। हमारे बच्चे हुए, लेकिन मैं डरी हुई थी कि वे मुझे अपने पिता से कम प्यार करेंगे इसलिए मैंने उन्हें कभी डांटा नहीं। मैंने उन्हें बिल्कुल भी नियंत्रित नहीं किया। मैं हमेशा डरती थी कि लोग प्यार करना बंद कर देंगे जैसे मेरे माता-पिता ने एक -दूसरे से प्यार करना बंद कर दिया था।

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परित्याग किए जाने से डर लगता है

मैं एक समाचार पत्र में नौकरी करती थी लेकिन मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी। मैं अपने काम से अब प्यार नहीं करती थी। अगर आप किसी चीज़ से प्यार करना बंद कर देते हैं तो आप छोड़ कर चले जाते हैं। मैं यह अपने माता-पिता से नहीं कह सकी थी तो मैं यह खुद से कहती थी। इसलिए मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और मैंने कहीं और भी नौकरी नहीं ढूंढी। मैंने बस हार मान ली। मन की गहराई में, मुझे डर था कि जिस तरह मेरे पिता ने मेरी माँ को धोखा दिया वैसे ही मेरा पति भी मुझे धोखा देगा और वह मुझसे प्यार करना बंद कर देगा।

 मैं हमेशा डरती थी कि लोग प्यार करना बंद कर देंगे
मुझे डर था कि जिस तरह मेरे पिता ने मेरी माँ को धोखा दिया वैसे ही मेरा पति भी मुझे धोखा देगा

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मैंने बस इस चीज़ के लिए खुद को तैयार करने के लिए अपना जीवन रोक दिया। और यह एक दशक के भीतर हुआ।

क्या मैंने मदद प्राप्त करने की कोशिश की? हाँ। मैंने आर्ट ऑफ लीविंग क्लास में दाखिला लिया लेकिन मैं वहां कुछ भी नहीं सीखी क्योंकि वे जो भी सिखा रहे थे उस पर मैं वास्तव में ध्यान ही नहीं दे सकी। मैं किसी भी चीज़ से खुश नहीं हो पा रही थी।

एक दिन जब मेरे ससुराल वाले छुट्टी पर थे तो मैंने अपने बच्चों को अपने माता-पिता के घर भेज दिया था। मेरे पति ने फोन किया और मुझसे मटन बनाने को कहा था। अचानक, मुझे महसूस हुआ कि मुझ पर इस चीज़ का बोझ है। जैसे कि, अगर मैं मटन नहीं बनाउंगी तो वह दूर चला जाएगा। या उससे भी बुरा कि वह मुझसे प्यार करना बंद कर देगा। और इससे पहले कि वह मुझे नुकसान पहुंचाए, मुझे ही खुद को नुकसान पहुंचा देना चाहिए। तब मैंने अपनी नस काटने की कोशिश की। मैं असफल रही और इसलिए मैंने घर में पड़ी सारी दवाईयां निगल लीं। मैं तुरंत मरना चाहती थी। उसके बाद क्या हुआ मुझे याद नहीं लेकिन एक तरफ तो मैं सुकून भरा महसूस कर रही थी और दूसरी तरफ मुझे चक्कर आ रहे थे। जब मेरी नींद खुली तो मैं अस्पताल में थी और मेरे सिर और पेट में दर्द था।

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एक स्पष्टीकरण था

मेरे डॉक्टर ने मुझे समझाया कि मैं क्लिनिकल डिप्रेशन से पीड़ित थी
मैं क्लिनिकल डिप्रेशन से पीड़ित थी

मेरे डॉक्टर ने मुझे समझाया कि मैं क्लिनिकल डिप्रेशन से पीड़ित थी और यह एक बीमारी थी। उसने मुझे बताया कि मुझे यह सोच कर डरना नहीं चाहिए कि मेरा पति मुझे छोड़ कर चला जाएगा क्योंकि सारे पुरूष एक जैसे नहीं होते। मैं उनसे नियमित रूप से मिलने लगी और अपनी सारी भावनाएं उन्हें बताने लगी। वह मुझे बताते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। उन्होंने ही मुझे समझाया कि मैं जो महसूस कर रही हूँ वैसा क्यों महसूस कर रही हूँ और उन्होंने मेरी यह समझने में मदद की कि मेरे माता-पिता के रिश्ते ने मेरी धारणाओं को किस तरह प्रभावित किया। मैं समय पर दवाईयां भी ले रही हूँ। जब मेरा पति मेरे पास होता है तो मैं सुरक्षित महसूस करती हूँ क्योंकि वह दोस्त हैं। अब मैं उसके दूर जाने से इतना नहीं डरती हूँ।

मैं लगभग 50 साल की हूँ लेकिन हम बहुत अनोखे हैं। हम अब भी डेट्स पर जाते हैं और अच्छे से तैयार होते हैं। जब वह मुस्कुराता है तो मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगता है।

ऐसा नहीं है कि अब मुझे आत्महत्या करने की इच्छा नहीं होती, लेकिन अब यह कम हो गया है। जब मुझे ऐसा महसूस होता है तब मैं अपने पति को फोन कर लेती हूँ। मैं शायद उसे कुछ ज़्यादा ही फोन करती हूँ लेकिन वह बुरा नहीं मानता। अब मैं अपने जीवन को बहुत प्यार से सहेजती हूँ और इसके लिए सब कुछ करती हूँ क्योंकि बढ़ती उम्र मेरे प्यार को कम नहीं कर रही है, यह इसे मजबूत बना रही है। हर इंसान एक जैसा नहीं होता। हर प्यार एक जैसा नहीं होता। हर जीवन एक जैसा नहीं होता। हर कहानी एक जैसी नहीं होती।

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