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मुझे अपने कजिन से प्यार हो गया

जब प्यार रीति रिवाज़ों और परंपरा के नियमों से बढ़ कर हो जाए....दो सेकंड कज़िन्स की कहानी जिन्हें प्यार हो गया और शादी के बंधन में बंध गए।
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जैसे कि निधि सोढा ने बताया

( बदला हुआ नाम)

पापा मुझे दूसरे शहर भेजने के बारे में बेहद चिंतित थे। मैं छुट्टियों में माँ के साथ नानी के घर जाने के अलावा उनसे कभी दूर नहीं हुई थी। मुझे उनसे उम्मीद नही थी कि वे मुझे एमबीए करने के लिए मुम्बई जाने देंगे। मैंने अनुमान लगाया कि उन्होंने यह देखा कि मैं अपना ख्याल खुद रख सकती हूँ। इसके अलावा उन्होंने मेहुल के उसी कॉलेज में प्रवेश के बारे में भी सुना था।

सुभाष काका पापा के बड़े चचेरे भाई हैं, उनके चाचा के बेटे हैं। हम एक ही शहर में रहते थे और पारिवारिक कार्यक्रमों और सामुदायिक मेल मिलापों में उपस्थित रहते थे। उनका बेटा मेहुल और मैं लगभग एक ही उम्र के थे। हालांकि हमारे बीच ज्यादा बातचीत नहीं होती थी पर फिर भी हम एक-दूसरे से भलीभांति परिचित थे। उसी कॉलेज में मेहुल का प्रवेश मेरे माता-पिता के लिए बहुत बड़ी राहत थी, यह जानकर की मैं अकेली नहीं रहूंगी। वे यह नहीं जानते थे कि एक दिन वही सोचेंगे कि काश ऐसा कुछ ना हुआ होता।

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घर छोड़ना मेरी कल्पना से ज़्यादा कठिन था। मैं इस नए बदलाव को स्वीकार करने में असमर्थ थी और मेरा पढ़ाई पर ध्यान देना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। मेहुल अक्सर मेरा हाल-चाल देख लिया करता था और एडजेस्ट होने में मेरी मदद करता था। मुझे अपने कई मित्रों से मिलवाता था। बदले में, मैं पढ़ाई और प्रेसेंटेशन में उसकी मदद करती थी।

हमारे दोस्त समझते थे कि शायद हम पुराने दोस्त हैं। हमें कभी अपने पारिवारिक संबंधों को बताने की जरूरत महसूस नहीं हुई। मैंने कभी नहीं सोचा कि हमने किसी को बताया क्यों नहीं, लेकिन हमने कभी इस बारे में बात नहीं की।

हमारे दैनिक ग्रूप स्टडी सैशन लंबे होते गए। हम किसी भी विषय पर और कुछ भी बातें करते थे।

इतनी बार मिलने के बावजूद हमने इतने सालों में एक-दूसरे पर ध्यान क्यों नहीं दिया। मिलना उत्कंठा में बदल गया और उत्कंठा जरूरत में बदल गई। मुझे अहसास हुआ कि हमारा रिश्ता बहुत समय पहले कज़िन या दोस्तों के रिश्ते को पार कर चुका है।

मैं उससे प्यार करने लगी थी पर उसने कभी अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं की। लेकिन मुझे लगता है यह दोनों तरफ से था क्योंकि वह इस तरह मुझे बिना किसी बात के देखता था या परवाह करता था, ऐसा लगता था जैसे मैं उसकी हूँ।

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“नहीं, यह सही नहीं है। वह मेरा भाई है। मुझे उसके साथ किसी और संबंध के बारे में नहीं सोचना चाहिए। यह इन्सेस्ट है!’’ मैं खुद से यह कहा करती थी। मैं सोचती थी कि काश मैं समय में वापस जाकर हमारे समान पूर्वजों की जिंदगी बदल सकती। मैं महसूस कर सकती थी कि मेहुल भी समान विचार रखता था। मैंने उससे मिलने से बचना शुरू कर दिया ।

हमने कॉलेज खत्म होने के बाद मुंबई में अलग-अलग कंपनियों में नौकरियां शुरू कर दीं। हम नियुक्ति से पहले घर गए थे। मेरे माता-पिता ने मेरे लिए रिश्ता देखना शुरू कर दिया था। पर मेरा मेहुल के साथ रिश्ता और भी गहरा होता जा रहा था।

पापा ने परिवार और दोस्तों को लड़का देखने के बारे में सूचित कर दिया था। सुभाष काका को भी सूचित किया गया।

“मैं अपने दोस्त के बेटे के बारे में हेमंत से बात करता हूँ। मुझे लगता है यह एक अच्छा मैच होगा,’’ सुभाष काका ने एक शाम को खाने के बाद यह घोषित किया।

“नहीं यह नहीं हो सकता” मेहुल ने भी मेरे बारे में अपनी भावनाएं नहीं बताई थीं। लेकिन यह एक ज्वालामुखी था जो फटने को था। वह इस विचार को स्वीकार नहीं कर पा रहा था कि उसका प्यार उसके जीवन का एक भाग नहीं होगा।

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सुभाष काका और उनकी पत्नी लता काकी ने उसे कन्फ्यूज़्ड नज़रों से देखा। “क्या?“ मेहुल के माता-पिता ने सोचा कि चूंकि वह मुझे अच्छी तरह से जानता है तो शायद वह मेरी पसंद के बारे में कूछ कहना चाहता है। हमारे परिवार हम दोनों की दोस्ती के बारे में जानते थे। पर उसके जवाब ने उन्हें हक्का-बक्का कर दिया।

“मैं वह लड़का बनना चाहता हूँ जिसका सुझाव आप हेमंत काका को दें”, मेहूल ने कह डाला।

उनकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार किए बिना उसने फोन उठाया और मुझे मैसेज भेज दिया। “मैंने घर पर आज एक घोषणा की है। यह मैंने तुमसे कभी नहीं पूछा पर मुझे यकीन है कि तुम्हारे दिल में भी यही है। मैं जानता हूँ कि हमें एक होने के लिए बहुत ज़्यादा संघर्ष करना होगा लेकिन अगर तुम मेरा साथ दो तो मैं उसका सामना करने के लिए तैयार हूँ। । मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ।”

“मैं जानती थी कि मुझमें यह करने की हिम्मत नहीं थी। “प्लीज़ मुझसे मिलो“मैंने एक घंटे बाद उत्तर दिया। हम मिले और  हमने एक-दूसरे से अपनी सारी प्यार भरी भावनाएं व्यक्ति कर दीं। पर हम दोनों को अभी अपने परिवारों से आशीर्वाद लेने के लिए बहुत मेहनत करनी थी। यह बहुत मुश्किल था। इस सामाजिक परेशानी का कोई हल नहीं था। इसके बावजूद हम पीछे नहीं हट सकते थे। हमारी इस घोषणा के बाद हमारे परिवारों के बीच बातचीत हर तरह से बंद हो गई थी।

हम अपने कॉमन सगे संबंधियों को जानते थे। हम अंतः प्रजनन के खतरे को भी जानते थे। पर हमारे दिल इसके गणित और विज्ञान को स्वीकार नहीं कर रहे थे। हम बस इतना जानते थे कि हम जिंदगी भर साथ रहेंगे।

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हमने एक दूसरे से यह वादा तक कर डाला कि हम प्राकृतिक तौर पर माता-पिता नहीं बनेंगे इसके बजाय हम एक बच्चा गोद लेंगे। इससे कम से कम एक चिंता तो दूर हुई।

हमारा मन बदलने के लिए बेकार की कोशिशें करते हुए तीन साल बीत गए थे। उन्होंने हमें बच्चों की क़समें दीं जैसा हमेशा होता है। इसकी विचित्रता समय के साथ खत्म हो गई। हम एक बड़े उत्सव में सभी से मिली अच्छी शुभकामनाओं के साथ विवाह बंधन में बंध गए।

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उस बात को दो साल हो चुके हैं। अब हम मुंबई में रहते हैं। वे तमाशबीन लोग जो नहीं जानते कि हम एक ही परिवार के हैं, उन्हें हम सामान्य शादीशुदा जिंदगी वाले खूबसूरत, प्यारे कपल जैसे दिखते हैं। हमारे चेहरे के कुछ फीचर्स की समानताओं को इत्तेफाक की तरह लिया जाता है।

बेशक, विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों में कई आयाम और दृष्टिकोण होते हैं। कई, जाति के भले लिए सर्वश्रेष्ठ होते हैं; कुछ सामाजिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए और कष्टों को अनदेखा करने के लिए सख्त रिवाज़ होते हैं; जबकि कई आधारहीन तर्कहीनता होती हैं। मेहुल और मैंने यह सोचना बंद कर दिया जब हमने अपने मन की बात सुनने का फैसला किया। कुछ मानवीय ईच्छाएं ऐसी होती हैं जो इन हुक्मनामों से परे होती है। पर कई बार मुझे आश्चर्य होता है कि क्या हमारा प्यार अलग होता अगर हमारा खून का रिश्ता न होता…

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