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मुझे प्यार कैसे हुआ

प्यार होना आपके हाथ में नहीं है, यह कभी भी, कहीं भी हो सकता है। मैं दीपशिखा हूँ और यह मेरी कहानी है कि मुझे अपने पति से प्यार कैसे हुआ।

प्यार होना आपके हाथ में नहीं है, यह कभी भी, कहीं भी हो सकता है। मैं दीपशिखा हूँ और यह मेरी कहानी है कि मुझे अपने पति से प्यार कैसे हुआ।

मैं 27 वर्ष की थी। मेरी माँ मेरी शादी करवाने के लिए बेताब थी। और जैसा की हम सभी जानते हैं, 25 वर्ष के पहले एक लड़की को कुंआरी कहा जाता है और उसके बाद वह सिर्फ अविवाहित होती है।

जब मेरी माँ ने मुझसे पूछा कि क्या मेरा कोई बॉयफ्रैंड है, मैंने कहा नहीं और कुछ ही पलों में उन्होंने शादी डॉट कॉम की प्रोफाइल खोल दी जो उन्होंने मेरे लिए बनाई थी। वैवाहिक संभावनाओं को चैक करना मेरे लिए हर दिन का काम बन गया।

और फिर एक दिन, मेरे सामने यह प्रोफाइल आई। वह समृद्ध लग रहा था। मेरी माँ बहुत उत्साहित हो गई और उन्होंने प्रोफाइल पर लिखे नंबर पर फोन लगा दिया। उस कॉल ने मुझे एड्रेनालाईन रश दे दिया। मेरे दिमाग में सैकड़ों बार यह विचार आया कि शायद मेरी शादी इसी लड़के से हो जाएगी। पता नहीं क्यों लेकिन इस बारे में मेरी बहुत स्ट्रांग फीलिंग थी। तब तक, मेरी माँ उस लड़के से बात कर चुकी थी और उन्होंने कहा कि वह उस लड़के को मेरा नंबर दे चुकी हैं और वह 5 मिनट में मुझे फोन करेगा।

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