पांच साल पहले मैं उससे फिर से मिला….

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जैसा जोई बोस को बताया गया

(पहचान छुपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं)

मैं लगभग 60 साल का हूँ और 16 साल की उम्र में मुझे प्यार हो गया था। वह एक साल छोटी थी और हमारे घर के नीचे वाले अपार्टमेंट में रहती थी। हमने कभी एक -दूसरे से कहा नहीं कि हम एक दूसरे से प्यार करते थे, ना ही हम कभी आधिकारिक तौर पर साथ में थे, लेकिन मैंने ऐसे ही मान लिया कि हम शादी करेंगे। उन दिनों, स्त्री और पुरूष शायद ही कभी दोस्त हुआ करते थे। लेकिन मीनाक्षी ने मुझे साहिल नाम के दूसरे पुरूष के लिए छोड़ दिया। मैंने सुना कि उसकी शादी हो रही थी और जब मैंने उससे पूछा तो उसने जवाब दिया, “क्या करती? पापा ने मुझसे कहा शादी करने के लिए।”

मैंने युनिवर्सिटी में अव्वल स्थान प्राप्त किया और सबसे लोकप्रिय समाचारपत्र में एक संपादक की नौकरी हासिल की। लेकिन साहिल ऐसा लड़का था जो मध्यमवर्गीय पिता अपनी बेटी के लिए चाहते हैं: दो घर और दो कारों के साथ इकलौता बेटा। वह लगभग 25 वर्ष पहले बम्बई चली गई। मैं उससे हाल ही में मिला लेकिन उससे पहले कभी नहीं मिला था क्योंकि उसकी शादी के बाद जल्द ही उसके माता-पिता भी चले गए थे।

मैंने कुछ अफेयर किए लेकिन प्रतिबद्धता से डरता रहा। मैं एक ऐसी लड़की से शादी करने की कगार पर था जिसे मैं वैवाहिक एजेंसी द्वारा मिला था, लेकिन एक अजीब सी भावना की वजह से मैंने उसकी पृष्ठभूमि की जांच की। और पता चला कि मैं उसके लिए साहिल था और मैं खुद को उस लड़की से शादी करने के लिए मना नहीं सका।

लगभग पांच साल पहले, मैं मीनाक्षी से एयरपोर्ट पर मिला। हम अपनी संबंधित फ्लाइट्स का इंतज़ार करते समय फिर से कनेक्ट हुए। वह अपनी बेटी की शादी के लिए खरीदारी करने दिल्ली आई थी और मैं चुनावों को कवर करने गया था।

जब मैंने उससे पूछा कि साहिल कैसा है, तो उसके बेमन से दिए गए उत्तर पर मैं हैरान रह गया, “ज़िंदा है!”

लेकिन हमारे पास बात करने के लिए बहुत सारी चीज़ें थी और इतने वर्षों में मुझे यह सबसे ज़्यादा आरामदायक लगा था। हमने हमारे साझे इतिहास, साहित्य में हमारी साझी रूचि, हमारे द्वारा देखे गए नाटक और भी काफी चीज़ों के बारे में बात की! साप्ताहिक फोन कॉल्स दैनिक बन गए और मैं उसका जीवन साझा करने लगा। वह वंचित महिलाओं के लिए एक छोटा एनजीओ चला रही थी। उसकी सभी परेशानियां और कष्ट मेरे बन गए। मुझे कहना होगा, हम करीब आ गए थे, काफी हद तक पहले की ही तरह।

मीनाक्षी ने अपना पुराना अपार्टमेंट वापस खरीद लिया। उसने अपने पति को कहा कि यह उसके माता-पिता की याद में है लेकिन मैं जानता हूँ कि यह वास्तविक कारण नहीं है। वह वहां कभी रहती नहीं है। वह मेरे घर में सोती है, हालांकि हम कभी साथ में नहीं सोए। लेकिन साहिल को कोई परवाह नहीं है। जब मीनाक्षी ने एक बेटी को जन्म दिया था तब से ही साहिल ने परवाह करना बंद कर दिया था। उसके पास बम्बई में नौ हार्डवेयर की दुकानें और दो कार के शोरूम हैं और वह गोल्फ खेलता है। उसके पास उन दो प्यारी स्त्रियों के लिए समय कभी नहीं था जो भगवान ने उसे दी हैं। लेकिन मीनाक्षी ने कभी शिकायत नहीं की। उस समय की लड़कियाँ शायद ही कभी तलाक के बारे में विचार करती थी, भले ही चीज़ें सही ना चलें। इसके अलावा, साहिल ने कभी उस पर हाथ नहीं उठाया था और ना ही कभी उसे पैसे देने से मना किया था, इसलिए उसके पास शिकायत करने के लिए कोई भी मूर्त चीज़ नहीं थी। पूणे में उसकी एक और पत्नी और बेटा होने की भी अफवाहें थीं, लेकिन मीनाक्षी ने उसपर कभी ध्यान नहीं दिया। अफवाहें तो सिर्फ अफवाहें होती हैं। उसके पापा दुख से मर जाते अगर उन्हें पता चलता कि उनकी इकलौती बेटी तलाक लेने के बारे में सोच रही है।

मीनाक्षी की बेटी मीरा ने कलकत्ता के लड़के से विवाह किया और वह मेरे अपार्टमेंट के बहुत पास रहती है। तीन साल पहले उसकी बेटी मिया का जन्म हुआ। चूंकि मीरा और उसका पति दोनों नौकरी पर जाते हैं, हर दिन मिया को स्कूल मैं ले जाता हूँ और मेरे घर में रखता हूँ, जब तक कि शाम को उसकी माँ उसे लेने नहीं आ जाती। मीरा के सास-ससुर के पास संभालने के लिए पहले ही उनके बड़े बेटे के दो बेटे हैं। मिया वह ज़िम्मेदारी है जिसे लेने से उन्होंने इन्कार कर दिया और मैंने खुशी-खुशी वह ज़िम्मेदारी ले ली। वह मुझे नानाजी बुलाती है। मीरा मुझे सिर्फ जी कहती है, इस अर्द्ध पिता-बेटी के रिश्ते को कोई नाम नहीं देती है जो हमारे बीच विकसित हो गया है।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

मीरा शाम की चाय मेरे साथ लेती है और अपने दिन के बारे में चर्चा करती है। हम अक्सर बम्बई में बैठी मीनाक्षी से स्पीकरफोन पर बात करते हैं जब वह कोलकाता में नहीं होती है। वह दो शहरों के बीच अपना समय बांट लेती है। मीरा ने एक बार मुझसे पूछा कि उसकी माँ के साथ मेरे संबंध की प्रकृति क्या थी और मैंने उसे बताया कि मुझे लगता है हम दोस्त हैं। मीरा ने कभी मुझसे कुछ और नहीं पूछा। वह भी बिल्कुल अपनी माँ जैसी है, वह कभी अपने पति के बारे में शिकायत नहीं करेगी। लेकिन जिस तरह उसके पति के परिवार में उसकी बेटी का जन्मदिन नहीं मनाया गया और कैसे उसका पति उसकी बेटी के लिए खड़ा नहीं हुआ, इस बात ने मीरा को अपने पति से दूर कर दिया है।

मीनाक्षी ने कभी भी हमारे रिश्ते के बारे में बात नहीं उठाई। कभी-कभी मुझे डर लगता है कि एक दिन वह आएगी और कहेगी कि अब वह मुझसे नहीं मिलेगी क्योंकि किसी और ने उसे ऐसा करने के लिए कहा है और ऐसे समय पर, मुझे मन करता है कि मैं उससे कहूं कि मुझसे शादी कर ले। लेकिन मैं डरता हूँ। क्या होगा अगर वह कहे कि वह नहीं कर सकती है और दूर चली जाए? तो मैं मीरा और मिया को भी खोने का जोखिम उठाउंगा।

संभावित रूप से एक अधिक निश्चित भविष्य के लिए मैं इस खूबसूरत वर्तमान को जोखिम में नहीं डालूंगा।

कभी-कभी कुछ चीज़ों को अनकही छोड़ देना ही सबसे अच्छा होता है। खास तौर से अपरिभाषित चीज़ें। और सिर्फ इसलिए कि वे परिभाषित नहीं हैं इसका यह मतलब नहीं है कि वे मौजूद नहीं हैं। या वे बुरी हैं। मैं लगभग 60 साल का हूँ, अकेला हूँ और काफी लंबे समय के बाद, बहुत खुश हूँ।

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