पति का अफेयर मेरी सहेली से था, मगर हमारे तलाक का कारण कुछ और था

Team Bonobology
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(जैसा टीम बोनोबोलॉजी को बताया गया)

क्यों कभी-कभी तलाक एक शादी के लिए सबसे बुरी चीज़ नहीं होती

ऐसा कहा जाता है कि विवाह के लिए सबसे बुरी चीज़ तलाक होती है। यह एक परिवार तोड़ देता है, दुखद शब्दों का आदान प्रदान होता है और दर्द अवर्णनीय होता है। लोग निःशुल्क (और आमतौर पर अवांछित) सलाह देते हैं और आपको अपने विवाह को सुधारने का कहते हैं। लेकिन वे आपकी तरह इस डर के साथ नहीं जागते हैं कि उन्हें पूरा दिन एक ऐसे पुरूष का सामना करना पड़ेगा जिन्हें वह अब प्यार नहीं करते हैं। जब एक स्त्री तलाक चाहती है, तो आपको यकीन करना होगा कि वह शादी को बचाने का हर प्रयास पहले ही कर चुकी है और अब सभी साधन समाप्त हो चुके हैं। और इससे भी महत्त्वपूर्ण बात, अब वह उसके रास्ते में आने वाले हर परिणाम का सामना करने के लिए तैयार है। मैं चाहती हूँ कि हर स्त्री समझे कि तलाक की कुछ स्वाभाविक प्रतिक्रियाएं हैं जो हमेशा समय के साथ फीकी पड़ जाती हैं, और हम इन सब स्थितियों से गुज़र कर अंत में एक कहीं अधिक सुखी, मजबूत और सकारात्मक व्यक्ति बन सकते हैं।

अंतिम दुर्घटना

बहुत विचार विमर्श और सोचने के बाद, एक दिन मैंने अपना बोरिया बिस्तर बांधा और अपने पति को छोड़ आई जिसके साथ दो वर्ष पहले मेरा विवाह हुआ था। मैं दृढ़तापूर्वक खड़ी रही कि मुझे अब और महत्त्वहीन नहीं समझा जाएगा, मैनिपुलेट नहीं किया जाएगा और मेरे साथ तुच्छ व्यवहार नहीं किया जाएगा; और अंत में मुझे पता लगा कि उसका संबंध मेरी विवाहित बेस्ट फ्रैंड के साथ था, और बस वह अंतिम कड़ी थी। मैं उसे सदमें, दर्द, पीड़ा और आंसू के साथ छोड़ आई। और इससे ज़्यादा संतुष्टि मुझे किसी और चीज़ में नहीं मिली। क्योंकि मुझे पता था कि कुछ ही घंटों के भीतर वह वापस उस घटिया पुरूष में बदल जाएगा। मैं जानती थी कि वह हमारे परिवार और मित्रों और हर एक को फोन करेगा और खुद को सही और मुझे गलत साबित करते हुए कहानियां गढ़ेगा। मुझे कलंकित करने के लिए वह जो कुछ कर सकता है सब करेगा।

उसने मेरी उदासीनता पर ध्यान नहीं दिया, जिसने उसे और ज़्यादा क्रोधित कर दिया। मैं इतनी समझदार और मजबूत तो थी कि उसने मुझे जिस भी परिस्थिति में डाला वह सहन करती गई -जब कोई स्त्री अपना मन बना ले तो वह बहुत शक्तिशाली हो जाती है। और अपमान, धमकी, और षड़यंत्र की हर चाल के साथ उसने केवल मेरे दृढ़ विश्वास को मजबूत ही किया कि मेरी भलाई के लिए उसे छोड़ना ही सबसे अच्छा विकल्प था।

मैंने उसके अहं को चोट पहुंचाई

विवाह बहुत पहले ही खत्म हो चुका था और प्यार दोनों ही पक्षों की ओर से अस्तित्व में नहीं था, लेकिन उसका अहंकार यह सहन नहीं कर पाया कि मैं उसे कठिन परिस्थिति में अकेला छोड़ गई -और इसी बात ने उसे मेरे विरूद्ध और भड़का दिया। उसे आशा थी कि आधिकारिक तौर पर मैं नहीं बल्कि वह इसे समाप्त करेगा।

उसने मेरे परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों अैर मुझ पर हमला किया। यह हमारे चरित्र, नैतिकता और मूल्यों पर एक हमला था; वह इतना अधिक गिर गया कि यह उसकी टीम के लिए भी शर्मनाक था। इसमें से किसी भी चीज़ ने मुझे चकित नहीं किया। लेकिन यह सुनकर की उसने ऐसा किया, मेरे दिल में एक टीस ज़रूर उठी। और यह जानकर और दर्द हुआ कि लोग उसकी बातों को सुन रहे थे और उसे छोड़ कर जाने के लिए मेरी आलोचना कर रहे थे।

कभी हमारे बीच प्यार हुआ करता था

हमारा प्रेम विवाह था, और मैं सभी चेतावनियों (बहुत सी चेतावनियां थीं) के बावजूद उसके प्यार में पागल थी। उसने मुझे इतना खुश किया था कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। उसके प्रति मेरा प्यार निर्विवाद, शुद्ध और खूबसूरत था। अब अंत में मैं देख सकती हूँ कि यह कितना अस्वस्थ था- उसके लिए अपना सबकुछ छोड़ना, उसके फोन करने का इंतज़ार करना, मुझे डिनर पर ले जाने के लिए उससे भीख मांगना, और ऐसा कभी नहीं हुआ कि उसने इनमें से किसी चीज़ का अनुरोध मुझसे किया हो। हमारे मुद्दे और समस्याएं शुरू से ही मौजूद थीं, लेकिन मैंने उन्हें अनदेखा करने का निर्णय लिया। मैं उसके लिए हर एक से लड़ गई, जबकि वह चुपचाप बैठ कर ‘अच्छा’ बनने में कामयाब होता रहा। उसका बचाव करने की मेरी आदत इतनी गहरी होती गई कि समय के साथ मैं ‘कमीनी’ बन गई और वह मज़ेदार व्यक्ति बन गया और जब भी मैं इस बारे में शिकायत करती थी वह हंसता था (एक और संकेत जिसपर मुझे ध्यान देना चाहिए था)

फिर सच सामने आया

विवाह के बाद सबसे भद्दा सच बाहर आया – हम असंगत थे, हमारे सपने मेल नहीं खाते थे और उसके गुस्से के प्रबंधन की गंभीर समस्याएं थीं। हम व्यर्थ चीज़ों के लिए लड़ने लगे, जो व्यक्तिगत रूप से लक्ष्यित गुस्से के हमले बन गए; घृणित और द्वेशपूर्ण शब्द बाहर आने लगे और कुछ महीनों के भीतर ही विवाह बिगड़ने लगा। उसका निरंतर अपमानजनक व्यवहार मुझे ज़ख्मी कर जाता था। प्रारंभिक सदमें के बाद, कि जिस व्यति को मैं इतना प्यार करती हूँ वह इतना बड़ा षड़यंत्रकारी था, मैं पीछे हटने लगी।

यह सोच कर मुझे बहुत दर्द हुआ कि मैं उसके लिए लड़ी लेकिन यह अविश्वासी था और झूठ पर आधारित था। अब भी उसके बारे में सोच कर मुझे पीड़ा होती है। उसका गुस्सा दैनिक वस्तु बन गया और मैं प्रार्थना किया करती थी कि वह अपना आपा ना खोए। उसके बचाव में – उसके परिवार, दोस्तों और पूर्व प्रेमिकाओं द्वारा उसके इस तरह के व्यवहार को हमेशा माफ कर दिया जाता था। उसने मेरे साथ बुरा बर्ताव किया, लेकिन इसलिए क्योंकि मैंने उसे करने दिया। और इसकी वजह से उसने मेरा सम्मान करना छोड़ दिया और मानने लगा कि मैं कभी छोड़ कर नहीं जाउंगी। मैं जानती हूँ कि ताली दो हाथ से बजती है।

और इसकी वजह से मेरा व्यवहार भी बहुत बुरा होने लगा। वह लड़की जो हमेशा हंसती मुस्कुराती रहती थी, अब ऐसी लड़की बन गई जिसने घर छोड़ने से इनकार कर दिया।

वह लड़की जो हमेशा हंसती मुस्कुराती रहती थी, अब ऐसी लड़की बन गई जिसने घर छोड़ने से इनकार कर दिया।

शुरू-शुरू में जब वह घर से अकेला बाहर जाया करता था, तो मैं बहुत दुःखी हो जाया करती थी, लेकिन दूसरा वर्ष आते आते मैं इंतज़ार किया करती थी कि कब वह घर से बाहर जाए। वह पूरा दिन सोता रहता था और रात में पार्टी किया करता, ऐसे लागों से घिरा रहता था जो सिर्फ उसकी बात मानते थे और उसकी हाँ में हाँ मिलाया करते थे। दूसरी तरफ मैं किसी भी तरह के अनुयाइयों से दूर भागती थी। हम ‘अपोसिट्स अट्रैक्ट’ को एक अलग ही स्तर पर ले गए थे।

कड़वा सच

बहुत बाद में मुझे पता चला कि मेरी पीठ पीछे वह अन्य स्त्रियों को भी पटा रहा था, जिसमें मेरी सबसे अच्छी सहेली भी शामिल थी, और उसे लगता था कि मुझे कभी पता नहीं चलेगा। उसने मेरे भाई की शादी में एक पारिवारिक मित्र की बेटी के साथ सोने की कोशिश की। जब मैं एक साप्ताहांत की ट्रिप से लौटी तो अपने बेडरूम में मुझे मेरी सबसे अच्छी सहेली का लिपग्लॉस मिला। मुझे अहसास हुआ कि मेरे अलावा हर कोई इस बारे में जानता था। और मेरे खुद के दोस्त उसका बचाव करने की कोशिश कर रहे थे क्योंकि वे परिणाम से डरते थे। मैंने भगवान का शुक्रिया अदा किया क्योंकि मुझे इस बात का पता तब लगा जब मैं मानसिक और भावनात्मक रूप से विवाह से बाहर आ गई थी – मुझे अन्यथा सोचने से भी डर लगता है। मेरी दुनिया बहुत टूट चुकी थी।

परिदृश्य और प्राथमिकताएं

घर छोड़ने के बाद मैं परिदृश्य समझने लगी और अपनी प्राथमिकताएं तय करने लगी। ज़ाहिर है कि उससे या इसमें जुड़े किसी भी अन्य व्यक्ति से मेरा कोई संपर्क नहीं था। मेरे तलाक में किसी को भी सक्रिय रूप से शामिल नहीं करने का मेरा परिपक्व निर्णय लगातार उसके द्वारा तोड़ा जा रहा था। उसने रोने और सहानुभूति बटोरने के लिए हर एक को फोन किया। कोई भी नहीं जानता था कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा था या इससे भी महत्त्वपूर्ण बात, मैं उसकी गतिविधियों के बारे में कितना जानती थी। मैंने उनसे बात करना पूरी तरह बंद कर दिया और तय किया कि जब मैं बात करने के लिए तैयार होउंगी तब जिसमें भी दिल और दिमाग हैं वे समझ जाएंगे, और वे मेरा साथ देंगे। और अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो वे चिंता करने योग्य नहीं हैं और बेहतर होगा कि मैं उनके बिना ही रहूँ। इस परिपक्वता को बनाए रखना सबसे मुश्किल था।

तलाक में किसी की भी जीत नहीं होती। यह एक ऐसे परिवार का टूटना है जो बहुत प्यार और खुशी से जुड़ा था। लेकिन मेरे मामले में, मैं तलाक लेकर मजबूत, स्वस्थ और प्रसन्न हुई थी। तलाक वास्तव में मेरी शादी का सबसे अच्छा हिस्सा था। समाज अब भी इंतज़ार कर रहा है कि मैं चिल्ला चोट मचाऊं, दुर्व्यवहार करूं और उसकी और अपनी सहेली की बदनामी करूं।  मैंने ऐसा नहीं किया और ना ही ऐसा करने में मुझे रूचि है।

जो भी हुआ, मैंने उन दोनों को शिद्दत से चाहा था और एक समय वे दोनों मेरे जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा थे।

भले ही इसके लिए मेरी हंसी उडाई जाए, लेकिन मैं उनके स्तर तक नहीं गिरूंगी। मेरी परवरिश अच्छी हुई है। मैं जानती हूँ कि मैं जीत गई हूँ भले ही दुनिया की नज़रों में नहीं।

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4 comments

Deepa verma May 31, 2018 - 8:57 am

Best blog I have ever read
In facebook

Team Bonobology
Team Bonobology May 31, 2018 - 10:52 am

Thanks 🙂

Gulshan uttama May 28, 2018 - 11:09 pm

Aapne bahut hi Sahi decision liya .sari umar sath rahke Iss dard main jeene se acha hai alag ho Jana.life to ek baar milti hai ise hume kisi ki Bjah se spoil nhi krna chahiye.
Jo insan apki Abi kadar nahi krta bo Kbi nahi krega. Je aapne Uske acha sabak sikhaya. Hr aurat ko itna majbut hona chahiye Ki bo Apne sath agar Kush galat ho raha hai to Uske against awaz utha she.

Sushma May 20, 2018 - 1:53 pm

Bilkul thk kiya aapne shi tha ye jruri nhi h k hum hmesha ye soche k log kya khenge duniya kya khegi ye sb sochne ka theka sirf aurat ne hi liya h kyaaa???? Aadmi jo chahe kr skta h bt aurat kuch sochne k liye b 100 br sochti h…..

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