मेरे पति मेरी कामयाबी से जलते हैं

(जैसा जोई बोस को बताया गया)

मेरे पति शिक्षित थे और मुझे पढ़ाना चाहते थे

एक शिक्षित पुरुष हमेशा चाहता है की शादी के बाद उसकी पत्नी और आगे पढ़े और हमें ऐसे लड़कों से बड़ा डर लगता था. हमें पता था की ऐसे पुरुषों को अक्सर सावली लड़कियां मिलती हैं क्योंकि रूप रंग की उन्हें ज़्यादा परवाह नहीं होती है. मेरे रंग के कारण मुझे यकीन हो चला था की मुझे भी कोई ऐसा ही जीवनसाथी मिलेगा और मेरी पढ़ाई शादी के बाद भी मेरा पीछा नहीं छोड़ेगी। और मेरे लाख पूजा पाठ और सौंदर्य साधनों के बावजूद वही हुआ जिसका मुझे सबसे ज़्यादा डर था. तो जहाँ एक तरफ मेरी चचेरी ममेरी बहनें अपनी विदेश यात्राओं के फोटो भेज रही थी, मैं चंडीगढ़ में अपने घर बैठ कर बी बी ए का कॉरेस्पोंडेंस कोर्स कर रही थी क्यों की मेरे पति एकाउंटेंसी के प्रोफेसर थे और उन्हें काम पड़ी लिखी पत्नी गवारा नहीं थी.

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मेरे पति शिक्षित थे और मुझे पढ़ाना चाहते थे
मेरी पढ़ाई शादी के बाद भी मेरा पीछा नहीं छोड़ेगी

क्योंकि बी बी ऐ में मैं फर्स्ट क्लास में उत्तीर्ण हुई थी, अब मेरे पति ज़िद करने लगे की मुझे मास्टर्स भी कर ही लेना चाहिए. ये बात की मुझे अब बस कुछ बच्चों की माँ बनना है, उन्हें किसी भी तरह पिघला नहीं पाई. खैर मैं मास्टर्स के लिए तैयार इसलिए भी हो गई क्योंकि इस आगे की पढ़ाई के लिए मुझे घर से बाहर निकलना पड़ता. प्रोफेसर को मुझे यूनिवर्सिटी ले जाना पड़ता और क्योंकि मैं गांव की एक लड़की थी, शहर की ये दुनिया मुझे बहुत मोहित करती थी. शहर की लड़कियां मुझे फ़िल्मी सितारों से कम नहीं लगती थी मुझे.

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मेरी नौकरी लगने पर उन्होंने मेरा साथ दिया

मेरे मास्टर्स के रिजल्ट आते ही मेरे पति अब मुझसे ज़िद करने लगे की मुझे कोई नौकरी करनी चाहिए. अब ये बात कुछ और थी! हमारे परिवार में अगर पति सक्षम थे तो पत्नियों को कभी नौकरी करने की ज़रुरत नहीं होती थी. मेरे पिता उनके इस सुझाव से आगबबूला हो गए. मगर जैसे मेरे पति का तो एकमात्र उद्देश्य था मुझे एक आधुनिक नारी में बदलने का. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया की मैं नौकरी करून और इसके लिए उन्होंने अपने परिवार तक से लड़ाई की क्योंकि वो भी उनके इस फैसले से असहमत थे. यहाँ तक की मेरे पति मेरे ऑफिस पहनने के लिए कुछ शर्ट, एक कोट और कुछ पतलून तक ले आये थे. मैं उनके लिए एक आदर्श पत्नी बन रही थी जिसे वो दुनिया के सामने दिखावे के लिए इस्तेमाल कर सकते थे.

मैं उनकी लिए एक परफेक्ट मॉडल पत्नी बन रही थी

पति को ऐसी किसी खबर से खुश या उत्साहित होते हुए नहीं देखा था.
मेरे पास दिल्ली की एक कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव आया और वेतन लगभग मेरे पति जितनी ही थी

कुछ सालों बाद मेरा एक आकस्मिक गर्भधारण हो गया और फिर अचानक गर्भपात भी हो गया. मैं बहुत डिप्रेस हो गई और मैंने खुद को काम में झोंक दिया. डॉक्टरों ने कह दिया की मेरे गर्भाशय को निकलना होगा और मैं अब कभी भी माँ नहीं बन सकती. सभी मेरे इस नयी जीवन शैली को इस घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे थे. मैं एक शापित महिला बन गई थी. भगवन भी अजीब अजीब खेल खेलते हैं. जहाँ एक तरफ मेरी ज़िन्दगी में ये सब हो रहा था, उसी समय मेरे पास दिल्ली की एक कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव आया और वेतन लगभग मेरे पति जितनी ही थी. इतने सालों में पहली बार मैंने अपने [पति को ऐसी किसी खबर से खुश या उत्साहित होते हुए नहीं देखा था. उन्होंने मुझे कहा की मुझे चंडीगढ़ में ही रहना होगा. शायद उन्हें ये एहसास होने लगा था की मैं उनसे ज़्यादा कमाने की क्षमता रखती हूँ.

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मगर मैंने वो नौकरी स्वीकार कर ली

उसका रवैया बदलने लगा. अब उसे अचानक पछतावा होने लगा की क्यों उसने मुझे पढ़ाई करने के लिए उकसाया. वो मेरे आधुनिक रहन सहन को दोष देने लगा और मुझसे ये कहने लगा की इन सब कारणों से उसे पिता का सुख कभी नहीं मिल सकेगा. उसमे तर्क और समझ ख़त्म हो रही थी. मेरे लिए उसके साथ एक ही छत के नीचे रहना मुश्किल होता जा रहा था और मैंने एक साल के अंदर दिल्ली वाली उस नौकरी के लिए हामी भर दी.

मैंने एक साल के अंदर दिल्ली वाली उस नौकरी के लिए हामी भर दी.
मैंने वो नौकरी स्वीकार कर ली

मुझे दिल्ली में रहते करीब करीब बीस साल हो गए हैं. मैं एक विदेशी कंपनी की वाईस प्रेजिडेंट हूँ. जिस दिन मेरी तनख्वाह उससे ज़्यादा हो गई, उसने मुझसे बातचीत करना बंद कर दिया. उसके पहले हम चाहे कितना भी लड़ते हों, मगर बात तो फिर भी करते ही थे. मगर पता नहीं मेरी कमाई उसके लिए असहनीय हो गई थी. मैं अब भी साल में एक बार चंडीगढ़ ज़रूर जाती हूँ. मैं हमारे घर जाती हूँ मगर हम दोनों एक दुसरे से बात नहीं करते हैं. मैं शुरू में उससे बात करने की कोशिश की मार विफल रही. वो बस यही कहता था की मैं नौकरी छोड़ कर चंडीगढ़ वापस आ जाऊं और मैं इसके लिए अब तैयार नहीं थी.

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अब मेरी नौकरी मेरे लिए ज़्यादा महत्त्व रखती है

मैंने ऐसी अफवाहें सुनी है की वो अक्सर अलग अलग महिला सहकर्मियों के साथ दीखता है. लोग अक्सर ये बातें करते है की ट्यूशन के लिए आने वाली उसकी छात्राएं छात्रों से कहीं ज़्यादा है. कामवाली बाइयाँ हमारे घर में काम करने से घबराती हैं और हर साल जब मैं घर जाती हूँ, मुझे एक नयी कामवाली दिखती है. मेरे करीबी लोग मुझसे पूछते हैं की क्या मुझे इन बातों से तकलीफ होती है. मैं हमेशा जवाब में यही कहती हूँ की मुझे तकलीफ बस इस बात से होती है की मेरे पति मुझसे और मेरी कामयाबी से ईर्ष्या करते हैं. मगर अब मैं अपनी नौकरी छोड़ने को बिलकुल तैयार नहीं हूँ. मगर मैं अपने पति को तलाक देना भी नहीं चाहती. हमारे परिवार में लोग तलाक नहीं देते. पता नहीं अगर मैंने ऐसा कोई कदम उठा लिया तो मेरे परिवार को और क्या झेलना पड़े.

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