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६० साल के पति को जब अपनी पत्नी बूढी लगने लगे…

वह अपनी रजनोवृत्ति में है और उसे सेक्स करने की इच्छा महसूस नहीं होती जबकि उसका पति अत्यधिक कामुक है; वे एक बेहतर यौन जीवन कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
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“हमारे विवाहित जीवन के प्रमुख भाग में, हम एक संयुक्त परिवार के रूप में रहे और अपनी बेटी की शादी के ठीक पहले हम स्वयं के घर में स्थानांतरित हुए। अब जब उसका विवाह हो चुका है और हमारा बेटा सिंगापोर में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहा है, तो बहुत सारी निजता के साथ पूरा घर हमारा है। इसलिए मेरे पति कार्तिक, 62 वर्ष की उम्र में इतने अधिक रूमानी हो रहे हैं, जबकि मैं, 59 वर्ष की उम्र में प्रतिपूर्ति नहीं कर पा रही हूँ। पिछले कुछ वर्षों में एकांतता की कमी के कारण रोमांस का महत्त्व कम हो गया था। अब मुझे योनि के सूखेपन का बहुत अनुभव होता है और इसलिए संभोग पीड़ादायक होता है। मैं कष्टप्रद हॉट फ्लेश के साथ घूमती हूँ, इसलिए दूसरे शरीर से संपर्क में आना मुझमें और अधिक गर्मी उत्पन्न करता है, जिससे जलन होती है। हालांकि कार्तिक, हमारे खोए हुए यौन उत्साह को पुनर्जीवित करने के लिए इन दिनों बहुत सचेत प्रयास करते हैं, लेकिन मेरी रूचि की कमी उन्हें कुंठित कर देती है और हमारे संबंध को कमज़ोर कर देती है,” माधवी ने बताया।

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माधवी अपनी प्रीमेनोपॉज़ल (रजनोवृत्ति के पहले की अवस्था) में है। यह एक स्त्री के जीवन का वह चरण है जब उसका मासिक धर्म रूकना शुरू हो जाता है और वह कई परिवर्तनों से गुज़रती है, यह स्थिति कई वर्ष तक चलती है। रजनोवृत्ति के समय एक स्त्री के जीवन में बड़ी संख्या में परिवर्तन हो सकते हैं। कई स्त्रियां ऐसा महसूस कर सकती हैं कि वे स्वयं के एक नए रूप में विकसित हो रही हैं। यह परिवर्तन नया और तनावपूर्ण हो सकता है। रजनोवृत्ति और रजनोवृत्ति की बाद की उम्र वाली अधिकांश स्त्रियों के लिए, यौन इच्छाओं में गिरावट सुस्पष्ट होती है, क्योंकि वे आसानी से उत्तेजित नहीं हो सकती हैं। कम कामेच्छा संबंध समस्याओं और आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावनात्मक समस्याओं का कारण बन सकती है।

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वह कहता है मैं वृद्ध हूँ

“मैं परेशान हूँ क्योंकि कम कामेच्छा का अर्थ है बिस्तर में बहाने बनाना और यह हमारे बीच दरार उत्पन्न कर रहा है। वह ऐसा समझता है कि मुझे उसमें रूचि नहीं है। संयुक्त परिवार में खोने के कारण, कार्तिक कभी मेरी मासिक धर्म की पीड़ा और दर्द समझने के लिए मेरे पास नहीं था और इसीलिए वह रजनोवृत्ति के हार्मोनल कहर को नहीं समझता। उसे लगता है कि मैं वृद्ध हो गई हूँ और सेक्स और रोमांस में मेरी रूचि कम हो गई है, और यह मुझे और ज़्यादा दुखी करता है। वह कहता है कि एक सास बनने के कारण मैं बूढ़ी हो गई हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं हार गई हूँ। इसलिए हार्मोन से लड़ते-लड़ते मुझे अपनी सुंदरता पर भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। कभी-कभी मुझे मजबूरीवश सेक्स करना पड़ता है क्योंकि मैं नहीं चाहती कि बूढ़ा होने और रोमांस में रूचि खत्म होने के विषय में मेरा मज़ाक उड़ाया जाए। यह सब मुझे बहुत कपटपूर्ण लगता है,’’ माधवी ने आगे बताया।

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रजनोवृत्ति के अग्रणी वर्षों में, एस्ट्रोजन का स्तर गिरना शुरू होता है और फिर तेज़ी से गिरने लगता है। स्त्रियों पर इसके कई शारीरिक और मानसिक प्रभाव होते हैं। माधवी अधिकांश लक्षणों से गुज़र रही है; हालांकि, अधिकांश स्त्रियों के साथ ऐसा नहीं होता। अधिकतर स्त्रियों के लिए सेक्स अच्छी शराब की तरह है, यह उम्र के साथ बेहतर होता जाता है, क्योंकि, जब स्त्रियों की उम्र बढ़ती है, वे अपनी शारीरिक ज़रूरतों के नियंत्रण में ज़्यादा होती हैं और वे जानती हैं कि उन्हें सेक्स में क्या चाहिए और संतुष्ट कैसे होना है। 20 के दशक में, ज़्यादातर स्त्रियां अपने साथी के यौन अनुभव पर ध्यान केंद्रित करती हैं, लेकिन जब उनकी उम्र बढ़ती है और वे 40 में पहुंच जाती हैं, वे आत्म-संतुष्टि पर ध्यान देती हैं।

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संयुक्त परिवार के जीवन से निशान

“संयुक्त परिवार के जीवन ने मेरे यौन जीवन पर निशान छोड़ दिए हैं। कुछ कारणों से वृद्ध लोगों के रूमानी होने और सेक्स करने को लेकर एक लांछन है। जैसे ही आप 50वें वर्ष में प्रवेश करते हैं, आपकी योनि चमत्कारिक रूप से बार्बी जैसी चिकनी त्वचा में बदल जाती है, जो संभोग को शारीरिक रूप से असंभव बना देती है। उसके बाद से यह ऐसा होता है जैसे जोड़े ब्रह्मचारी जीवन बिताते हैं। इसने मेरी मानसिकता को प्रभावित किया है और मुझे सेक्स में ही रूचि की कमी महसूस होती है,’’ माधवी ने कहा।

प्रत्येक व्यक्ति की यौन पहचान जीवनभर बदलती है और विकसित होती है। हर चरण के दौरान, जो शारीरिक बदलाव हो रहे हैं उन्हें समझते हुए कोई अपनी कामेच्छा में परिवर्तन कर सकता है। हम सब एक ऐसा यौन जीवन बनाने के लिए शारीरिक बदलाव कर सकते हैं जो रजनोवृत्ति के दौरान अनुकूल हो। यह एक प्रचलित मिथक है कि रजनोवृत्ति के बाद स्त्रियां सेक्स करना बंद कर देती हैं। आमतौर पर अधिकांश समस्याओं का उपचार किया जा सकता है क्योंकि वे अस्थाई प्रकृति की होती हैं।

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कार्तिक के साथ एक खुली चर्चा करना, जिसमें वह उसके शरीर में हो रहे बदलाव, उसकी शारीरिक और मनोवैज्ञानिक असुविधाओं के बारे में उसे बताए, काफी आरामदायक हो सकता है। यह सबसे महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह संबंध में गलतफहमी होने से बचा सकता है। फिर उन्हें एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए और अगर शारीरिक बीमारी परेशान कर रही है तो कुछ चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करनी चाहिए। उसे चरमोत्कर्ष की बजाए आनंद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आखिरकार, वैसे भी मुख्य यौन अंग जननांग नहीं बल्कि मस्तिष्क है।

अपने साथी के साथ यौन संबंधों पर चर्चा करना एक चुनौतीपूर्ण मामला हो सकता है और अधिकांश साथी इसे सुलझाने की बजाए भूलना और अनदेखा करना पसंद करेंगे। समाधानों की भरमार है, इसलिए आदर्श यह है कि साथी सक्रिय और सहयोगी बन जाए। माधवी को अपने शरीर की छवि के बाहर नए शारीरिक विश्वास पर काम करना चाहिए।

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