पति ससुराल वालों के प्रभाव में आकर मुझे और बच्चों को छोड़ कर चले गए हैं

surprised woman with man

प्रश्नः

हमारा प्रेम विवाह है और हमने 7 साल पहले शादी की थी। उनका परिवार और मेरी माँ हमारे साथ रह रही थी। उसके माता-पिता आलसी थे लेकिन हमारे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते थे। लेकिन मेरी ननद को पैसा चाहिए। वह मेरे पति को फोन करके मेरे बारे में बुरा भला कहती है और उनसे कहती है कि मेरी बात ना सुने और मेरे साथ एक गुलाम जैसा तरह बर्ताव करे। मेरे पति मुझसे कहते थे कि इस बारे में चिंता ना करूं। वह कहा करते थे, ‘मैं तो उसकी बात नहीं सुनता ना? तो चिंता की क्या बात है? मेरी बहन ऐसी ही है।’

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सास-ससुर मेरे बच्चों का ख्याल नहीं रखते थे। हमेशा मेरी माँ ही सारा काम करती थी। जब मैं अपने पति को यह बताती थी तो वे कहा करते थे, ‘चिंता मत करो, मैं संभाल लूंगा। मैं मदद कर दूंगा लेकिन अपने माता-पिता को घर के कामों में हाथ बटाने को नहीं कहूंगा।’

समय के साथ, मेरे पति अपनी बहन की बातें सुनने लगे और उन्होंने मुझसे बात करना बंद कर दिया। बीस दिन बीत गए। मैंने उनसे दुबारा पूछा, लेकिन उन्होंने मेरी माँ के बारे में बुरा भला कहा और अपशब्द भी कहे। उन्होंने कहा कि मेरी माँ ने ही मुझे सिखाया है कि उनके साथ झगड़ा करूं। मुझे गुस्सा आ गया और मैंने उन्हें घर से निकल जाने को कहा। वह अपने माता-पिता के साथ चले गए और एक महीने बाद लौट आए। फिर मेरे भाई ने सुझाव दिया कि सिर्फ हम दोनों पति पत्नी और बच्चों को ही साथ में रहना चाहिए ताकि झगड़े हो ही नहीं। हम एकल परिवार की तरह रहने लगे लेकिन तीन ही महीनों में उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उनके माता-पिता हमारे साथ रहें।

वे इस तरह बात करते हैं कि वे मेरे पति के दिमाग में इन्फीरिओरिटी कॉम्प्लेक्स बना देते हैं। मैं भी नौकरी करती हूँ और मुझे ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो घर के कामकाज में और मेरी पांच साल और डेढ़ साल की बेटियों का ध्यान रखने में मेरा हाथ बटाए। लेकिन कोई मेरा साथ नहीं देता। अचानक से मेरे पति ने कहा, ‘मेरे पिता आएंगे’। मैंने पूछा, ‘हम उनकी देखभाल कैसे कर पाएंगे?’ उन्होंने कहा कि वो देखभाल कर लेंगे। मैंने कहा, ‘नहीं, फिर से नहीं। फिर से समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी’। लेकिन मेरे पति ने कहा कि वह मेरे साथ तभी रहेंगे जब उनके माता-पिता भी यहां रहेंगे। मैंने कहा नहीं और उन्होंने हमें बिल्कुल अकेला छोड़ दिया और हम पिछले चार महीनों से अलग रह रहे हैं।

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अब वह कहते हैं कि मुझे उनके परिवार के पास आना होगा और माफी मांगनी होगी। अगर मैं ऐसा करती हूँ और स्वीकार करती हूँ कि सभी समस्याएं मेरी ही वजह से हैं – तभी वह वापस आएंगे। लेकिन मेरे गुस्से का कारण यह है कि उनकी माँ हमेशा कुछ ना कुछ बात याद रखेंगी और हमेशा मेरे पड़ोसियों से मेरी बुराई करती रहेंगी और मेरी छोटी बेटी के लिए उपयुक्त भोजन नहीं देंगी। लेकिन वह इन सब बातों का विश्वास नहीं करते हैं। अब वह पूरी तरह बदल चुके हैं और पूरी तरह अपने माता-पिता का ही पक्ष लेते हैं।

विवाह से पहले और पिछले मार्च 2017 तक सबकुछ बिल्कुल विपरीत था। वह अपने माता-पिता की कमियों को स्वीकार करते थे और मुझसे एडजेस्ट करने को कहते थे। लेकिन अब अचानक से वह हर बात के लिए मुझे और मेरी माँ को दोष दे रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं उनके लिए महत्त्वपूर्ण हूँ लेकिन वह एक अलग परिस्थिति में हैं। वह एक परामर्शदाता या किसी तीसरे व्यक्ति से मिलने के लिए तैयार नहीं हैं। वह कहते हैं कि समस्या उत्पन्न करने वाली तुम हो, इसलिए तुम्हें यह करना ही होगा तभी मैं लौटूंगा वरना जाने दो। और यहां तक कि अगर मैं माफी मांग भी लूं और सभी समस्याओं का दोष अपने सिर ले लूं और फिर जब सब वापस आ जाएं, मुझे उनके कहे अनुसार चलना होगा। प्लीज़ इस समस्या को हल करने में मेरी मदद करें। मैं फंसी हुई हूँ।

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स्निग्धा मिश्रा कहती हैं:

प्रिय फंसी हुई सहेली,

यह एक बहुत ही जटिल स्थिति है। मेरा मतलब है कि बहुत सारे लोग और डानेमिक्स शामिल है। क्या कोई आपसे और आपके पति से अलग-अलग बात कर सकता है? मेरा सुझाव है कि आप समय लें और इनके बारे में सोचें:

अ. वर्तमान में आपके पति के साथ रिश्ते की प्रकृति?

ब. उनसे आपकी उम्मीदें?

स. संबंध से आपकी अपेक्षाएं?

द. आप रिश्ते में क्या लाने के लिए तैयार हैं?

ई. आप 5 साल में अपने रिश्ते को कहां देखती हैं?

फ. अगर आप उनसे माफी मांग लेती हैं और वह आपके पास लौट आता है तो? फिर क्या?

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वर्तमान स्थिति पर विचार करते हुए इन प्रश्नों का उत्तर दें। कृपया इसमें तीसरे पक्ष के बीच-बचाव पर भी विचार करें। कृपया समझें कि आपका पति एक वयस्क है। ‘वह किसी के प्रभाव में है’ और वह ‘उनकी बात सुनता है’ जैसे शब्द किसी बच्चे के बारे में कहते समय ठीक हैं। अगर वह वयस्क है तो उसके पास अपने मूल्यों के आधार पर फैसला लेने के लिए खुद का दिमाग और बुद्धिमत्ता है। वह अपने स्वभाव के अनुसार ही व्यवहार कर रहा है और ऐसा करने के लिए उसे कोई मजबूर नहीं कर रहा है। भले ही वह आपके साथ कितना भी गुस्सा हो जाए, लेकिन वह अपने बच्चों को भी छोड़ कर चला गया है। भले ही आप यह भी मान लें कि वह किसी के प्रभाव में है, तो उसके बच्चों के प्रति उसकी ज़िम्मेदारी का क्या?

आपको स्मार्ट बनना होगा और खुद को सुरक्षित रखना होगा। आपको अपने बच्चों के भले के बारे में सोचना होगा और उन्हें एक सुखी घर प्रदान करना होगा। और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आप एक वयस्क पुरूष को मजबूर नहीं कर सकते हैं कि वह अपने बीवी बच्चों के पास आकर रहे। भले ही अगर उसे अभी कोई कारण नहीं दिख रहा है, तो भी उसका इंतज़ार करने या उसे जाने देने के अलावा आपके पास और रास्ता ही क्या है?

फैसला आपको ही लेना होगा, आपके लिए कोई और ऐसा नहीं कर सकता।

शुभेच्छा!
स्निग्धा

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