“उसे मुझसे ज़्यादा मेरे पिता में दिलचस्पी थी”

Saurabh Das
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जैसा सौरभ दास को बताया गया

(पहचान छुपाने के लिए नाम बदले गए हैं)

हमारी शादी दिसंबर २०१३ में हुई थी और हम मेरे माँ बाप के साथ रहने लगे. मेरे डैड, जो आर्मी से रिटायर हुए थे, अपने आकर्षक व्यक्तित्व के लिए काफी जाने जाते थे. जब मेरी शादी हुई, डैड बहुत खुश थे. इतने सालों से मैं शादी से ना नुकुर करता था क्योंकि मैं एक फोटोग्राफर हूँ और मुझे अक्सर काम के सिलसिले में सफर करना पड़ता है. मगर फिर घरवालों का दबाव बढ़ने लगा और मुझे अंत में शादी के लिए हामी भरनी ही पड़ी.

उसके अजीबोगरीब सवाल

हमारी शादी के कुछ दिनों बाद ही मेरी पत्नी मुझसे अजीब सवाल पूछने लगे. जैसे मैंने बड़ी कार क्यों नहीं ली या फिर ये की मैंने कभी विदेश में सेटल होने का क्यों नहीं सोचा या ये की मैं ज़्यादा क्यों नहीं कमाता. सभी सवाल फिर भी बर्दाश्त हो जाते थे मगर उसका जो एक सवाल मुझे अंदर तक भेद देता था, वो था, “तुम अपने डैड की तरह हैंडसम और सुन्दर क्यों नहीं हो?” इसमें जवाब में मैं क्या बोलता तो खीज के कह देता था, “क्या करता. यह मेरे हाथ की बात तो नहीं थी न?” शुरू में तो ऐसी थोड़ी बहुत बातें ही होती थी मगर धीरे धीरे डैड से मेरी तुलना वो हर बात में करने लगी. एक दिन तो हद् ही हो गई तब उसने मुझसे पुछा,की क्या मेरे ७० वर्षीया डैड सेक्स करते होंगे. मैं इस अजीब बात से उबरपाता इससे पहले ही उसने मुझसे पुछा, “तुम्हे क्या लगता है डैड को तो अंदाज़ा हो गया होगा न की मेरे पीरियड्स शुरू हो गए हैं.” डैड उसके दिमाग में हर समय रहते थे, और मुझे ये दिखने लगा था.

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पहले कुछ महीने तो मैं खुद को फटकार कर मन को समझा लेता था मगर फिर धीरे धीरे चीज़ें बद से बदतर होने लगी. उसे जैसे डैड के अलावा कुछ भी नहीं दीखता था. डैड के रूटीन के हिसाब से वो अपना रूटीन सेट करती थी. चीज़ें अब मुझे परेशां करने लगी थी.

वो डैड से ऑब्सेस हो रही थी

वो डैड से बातें करने के बहाने ढूंढ़ती रहती थी, बात करते करते चुप हो जाते और डैड को बस घूरती रहती थी. हर हाल में उसे डैड के आस पास ही बैठना होता था और ये सब अब मैं और मेरी माँ अनदेखा नहीं कर पा रहे थे. माँ ने उसे रोकने की कोशिश की और उसे समझाया की वो डैड से दूर ही रहे, जिसपर उसने तिलमिला कर जवाब दिया, “माँ आप तो बहुत ही पुराने ख्यालों की हैं.” जब मैं उसे टोकता तो मुझसे कहती, “तुम बहुत शक्की इंसान हो,” मुझे तब समझ आने लगा की वो बहुत ही शातिर फ़्लर्ट है और हम सब घरवालों को अपने हिसाब से गोलमोल बातों में घुमा रही थी. इन सब से बेखबर डैड को शायद अंदाजा भी नहीं था की उनकी बहु के दिमाग में क्या चल रहा था.

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अब मैं अपना मन तलाक के लिए बना रहा था. मैंने अपने मन की बात अपनी माँ से करी मगर उन्होंने कहा की मुझे कोशिश करके इस शादी को बचाना चाहिए. बहुत सोच कर मैंने फैसला किया की मैं अपनी शादी को एक अंतिम चांस दूंगा और छह महीनें और देखूँगा. मैंने अपनी पत्नी को भी बोल दिया की उसने अब तक सारी हदें पार कर दी हैं और अब मैं हमारे रिश्ते को ये आखिरी मौका दे रहा हूँ. “तुम अब हद से ज़्यादा शक कर रहे हो,” उसने मुझसे कहा.

इधर डैड अब भी उसे इग्नोर कर रहे थे और वो उनके इस रवैये से और तिलमिलाने लगी थी. वो एक दिन डैड को नहीं देख पाती तो बिलकुल बौखला जाती थी. डैड के लिए उसका ये एकतरफा प्यार बहुत ज़्यादा बढ़ रहा था.

मेरी ज़िन्दगी और काम प्रभावित होने लगे

मैं मानसिक तौर पर इतना बिखर गया था की मैं अपनी एक्स प्रेमिकाओं से मिलने लगा, यहाँ तक की मैं उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध भी स्तापित करने लगा. बेतरतीब शराब पीने लगा, अक्सर होश में नहीं रहता था. ऐसी हालत देख कर मेरे क्लाइंट भी कम होने लगे.

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इस बीच मेरी पत्नी डैड को रिझाने की पूरी कोशिश में लग गई. हालात इतने बिगड़ गए की एक दिन डैड ने मुझे बुला कर कहा की हमें हमारे घर के पहली मंज़िल पर शिफ्ट हो जाना चाहिए. वैसे तो मुझे पता था की ये हमारी समस्या का कोई हल नहीं था मगर फिर भी मैं मान गया. एक महीने के अंदर ही हम पहली मंज़िल पर शिफ्ट हो गए. मेरी पत्नी फिर भी किसी न किसी बहाने से बार बार नीचे जा कर डैड से बातें करने के मौके ढूंढ़ती थी. हमारी लड़ाइयां बढ़ती जा रही थी और एक दिन गुस्से में मेरा हाथ उठ गया. उसने मुझे धमकी दी की वो मेरे खिलाफ पुलिस में घरेलु हिंसा की शिकायत दर्ज़ करेगी.

जब बात इतनी बढ़ गयी

एक दिन मैं बाहर ड्राइंग रूम के सोफे पे बैठा था. अचानक मेरी पत्नी मेरे पास आई और मुझे ज़ोर से आलिंगन में भींच लिया. मैं कुछ समझ पता इससे पहले ही वो मुझे किस करने लगी. अजीब हरकत थी ये क्योंकि उन दिनों तो हम एक दुसरे से बातचीत तक नहीं कर रहे थे. मुझे कुछ शक तो हुआ मगर कुछ साफ़ समझ नहीं आया. तभी अचानक मुझे डैड की आवाज़ सुनाई दी. उसने डैड को आते हुए देख लिया था और उन्हें दिखाने के लिए मुझसे यूँ अंतरंग हो रही थी.

उस घटना मैं घृणा से भर गया और मैंने अगले ही दिन तलाक की अर्ज़ी दे दी. उसने मुझ पर दहेज़ और घरेलु हिंसा के झूठे आरोप लगाए मगर चार साल साल बाद अंततः मुझे उससे तलाक़ मिल होगया. आज मैं एक खुश इंसान हूँ और दोबारा शादी के बारे में सोचना भी नहीं चाहता. अपने डेढ़ साल के विवाहित जीवन में मैं एक बहुत ही नकारात्मक इंसान बन गया था जिसने अपने माँ बाप, बहन, दोस्त, क्लाइंट्स हर किसी से लड़ाइयां की और अपने सारे सम्बन्ध बिलकुल कड़वे कर दिए. मेरा काम बिगड़ता चला गया और मैंने इतनी सम्पति इस दौरान खोई की शायद मुझे वो धनराशि फिर से इक्कठा करने में कम से कम एक साल लग जायेंगे. जहाँ तक बात शादी की है, तो इस रिश्ते से मेरा विश्वास बिलकुल उठ चुका है.

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