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मेरी पत्नी को चोरी करने की बिमारी है मगर वो कबूल नहीं करती

उसकी लिपस्टिक चुराने की आदत उसे उसके दोस्तों से दूर कर रही थी और लोग उन्हें आमंत्रित करने से कतराने लगे थे...
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नीना को हमेशा से ही मेकअप करने का काफी शौक रहा है. मगर एक दिन जब मैंने देखा कि उसकी लिपस्टिक का संग्रह किसी दूकान से भी कहीं ज़्यादा है, तो मैंने उसे टोका. नीना ने मेरी बात को हंसी में उड़ाते हुए मुझे तसल्ली दी कि अधिकतर महिलाओं की लिपस्टिक के लिए सनक कुछ ऐसी ही होती है. मैंने फिर एक दिन देखा की उसके बैग में काफी लिपस्टिक रखी हुई थी. मगर अजीब बात तो यह थी की जब हम कहीं बाहर जाते थे, तो मैंने उसे कभी भी लिपस्टिक को दुबारा लगाते नहीं देखा था. एक दिन हम अपने दोस्तों के घर क्रिसमस पार्टी के लिए गए थे. डिनर के बाद मैं वाशरूम के तरफ गया तो देखा कि नीना जो अभी वाशरूम से निकल रही थी, अपने बैग में कुछ डाल रही थी.

मेरे पूछने पर उसने बोला की वो लिपस्टिक लगाने गई थी. मैंने गौर से देखा मगर मुझे उसके होंठ फीके ही दिखे, बिना किसी लिपस्टिक के.

उसका आचरण मुझे काफी संदिघ्ध लग रहा था. अगली बार जब हम फिर से किसी मित्र के घर आमंत्रित थे, मैंने नीना पर नज़र रखने का फैसला किया. जब नीना उठी तो मैंने उसका पीछा किया. देख कर हक्का बक्का रह गया कि नीना चुपचाप मेरे दोस्त की पत्नी की ड्रेसर से दो लिपस्टिक निकल कर अपने बैग में डाल रही थी. घर जाकर मैंने जब चुपके से उसका बैग देखा तो मुझे उसमे १६ लिपस्टिक मिलीं. हम आर्थिक तौर पर काफी “वेल प्लेस्ड” हैं. मैं और नीना, दोनों ही, अच्छा कमाते हैं और हमें किसी चीज़ की ज़रुरत नहीं है, तो फिर नीना ये क्यों कर रही है? मेरी समझ जवाब दे रही थी.
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यह तो बस शुरुवात थी…

जब चीज़ों को और कूरेदना शुरू किया, तो बहुत कुछ और पाया. हमारे बच्चों के रूम में उनके बिस्तर के नीचे मुझे एक सूटकेस मिला जिसमे किताबे और स्टेशनरी की चीज़ें प्राइज टैग के साथ रखी हुई थी. साफ़ लग रहा था कि इन्हे किसी दूकान से चुपचाप उठाया गया है. चीज़ें मेरी समझ के बाहर हो रही थी और फिर मैंने अपने एक मित्र को नीना की इन बातों के बारे में बताया. उसने मुझे बताया की इस तरह चोरी करना एक बीमारी होती है जिसे डॉक्टर क्लेप्टोमिनिया कहते है. उस मित्र ने सलाह दी की हमें जल्दी ही नीना को किसी मनोचिकित्सक के पास इलाज़ के लिए ले जाना होगा. “मैंने इस विषय पर बहुत जानकारी ढूंढी और गूगल किया, और अब मुझे यकीन हो गया था कि नीना सचमुच बीमार ही थी. मगर बिल्ली के गले में घंटी कौन टाँगे वाला प्रश्न था. मैं उससे इस बारे में बात करने के लिए खुद को तैयार नहीं कर पा रहा था. एक दिन हम सब मित्रगण बैठे थे. तभी सबकी पत्नियों ने गायब होती लिपस्टिक की चर्चा शुरू कर दी. सब यही बातें कर रहे थी कि उनकी लिपस्टिक्स कब कब गायब हो गयी है. सभी महिलाएं इस बारे में बात करती रहीं और नीना चुपचाप बिना कुछ बोले वहां बैठी रही. मुझे नहीं पता की उनका आशय नीना की तरफ था या फिर उन्हें शक हो रहा था उस पर, मगर इन सब से बिना विचलित हुए, नीना आराम से वहां बैठ कर सबकी बातें सुनती रही,” मनोज अपने विवाहिक जीवन में आये इस तूफ़ान के बारे में बता रहा था.

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क्लेप्टोमिनिया अपने आवेग को काबू न कर पाने की बीमारी है, जिसमे मरीज़ को एक बहुत तीव्र इच्छा होती है चोरी करने की. चोरी कर के उन्हें एक हाई मिलता है और धीरे धीरे मरीज़ अपनी इस बीमारी के शिकंजे में फंसता चला जाता है. अधिकतर मरीज़ अपने डिप्रेशन या एंग्जायटी से निकलने के लिए चोरी को एक एंटी डेप्रेस्सेंट की तरह ही इस्तेमाल करते हैं.

वो अपनी प्रॉब्लम मानने को तैयार नहीं

नीना अपनी इस प्रॉब्लम या बीमारी को कबूल करने के लिए तैयार नहीं है. वो जब लिपस्टिक या कुछ भी चुराती है, बस उस छणिक आवेग में ही करती है. तभी तो वो कभी भी इन चीज़ों को भविष्य में इस्तेमाल नहीं करती. मगर इन सबसे ज़्यादा इस बीमारी में चिंता की बात है उसका खतरे के प्रति रवैया. वो जिस तरह खतरे को अनदेखा कर चोरी करती है, और बिना अपराधबोध सबके बीच बैठती है, वो काफी चिंताजनक है,” मनोज ने अपनी उंगलियां चटकाते हुए अपनी चिंता साझा की.

इस तरह के मरीज़ अक्सर चोरी बहुत स्ट्रेस में होने पर करते हैं. मैंने मनोज से कहा की वो नीना पर बारीकी से नज़र रखे और देखे की आखिर वो किन हालात में चोरी करने का प्रयास करती है. शायद जब वो बहुत परेशां होती है या डिप्रेशन में रह कर ही ऐसा कदम उठती है. वो खुद को उस डिप्रेशन से निकालने के लिए ही वो ऐसा कदम उठाती है. इन हालात में ये ज़रूरी है की परिजन उससे सहानुभूति से पेश आएं और उनकी मदद करें ताकि वो इस समस्या से निकल पाएं. उन्हें समझाने की कोशिश करिये की उनकी इस आदत से वो खुद किस तरह की परिस्थिति में फंस सकते हैं. ज़्यादातर क्लेप्टोमानिएक्स अपनी बिमारी को मानने से साफ़ मुकर जाते हैं और मदद लेना नहीं चाहते. ऐसा करने से उनकी सच्चाई दुनिया के सामने खुल जाएगी और इसलिए वो खुद को शर्मिंदगी से बचाने के लिए अपनी परेशानी कबूल नहीं करते. इसलिए बहुत ज़रूरी है की अगर आप उनकी मदद करना चाहते हैं तो उन्हें दोषी न ठहराए और उन्हें कोई अपराधबोध न महसूस हो.

दोस्त हमसे कतराने लगे

चीज़ें तब बदतर होने लगी जब हमारे दोस्त हमसे कतराने लगे. तीन वीकेंड निकल गए और हमें किसी ने अपनी पार्टी में जब नहीं आमंत्रित किया तो मैंने अपने पुरुष दोस्तों से पुछा की आखिर बात क्या है. जवाब में उन्होंने बस इतना कहा क़ि उनकी पत्नियां नीना को आमंत्रित नहीं करना चाहती. उन्होंने इससे ज़्यादा तो कुछ नहीं कहा मगर मैं उनके इस फैसले का कारण बखूबी जानता था. हम अपने दोस्तों से दूर होते जा रहे थे और हमारी सोशल ज़िन्दगी अब मुझे बिलकुल ख़त्म होती दिख रही थी. नीना इस बारे में बिलकुल बातें नहीं कर रही थी और मैं समझ गया क़ि अब मुझे खुद ही कुछ करना होगा.

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“और फिर एक दिन मैं नीना को एक मनोचिकित्सक के पास ले गया मगर वो उसके सामने भी चुप ही रही. डॉक्टर ने बोला क़ि नीना अंदरूनी डिप्रेशन से ग्रसित है और उसी से उबरने के लिए वो चोरियां करती है. मैं अभी इस बारे में उससे कुछ बातें नहीं करना चाहता और इसलिए मैं चुप हूँ. मैं चाहता हूँ क़ि मनोचिकित्सक ही उससे बातें करे, उसका मन पढ़े. अभी हम उससे सिर्फ एक ही बार मिले हैं मगर मुझे उम्मीद है आगे के दिनों में चीज़ें बेहतर हो जाएँगी. हमारी अगली मीटिंग दो हफ्ते बाद है,” मनोज ने बताया.

इसकी नीव नीना के बचपन से जुडी है

मैंने मनोज को समझाया क़ि उसे नीना को भरपूर सपोर्ट करना है और बहुत खुला वार्तालाप करना होगा ताकि नीना खुद ही ये सब कबूल करे. पूरी गुंजाईश है क़ि नीना अब तक अपना आत्म विश्वास खो चुकी होगी और सोच रही होगी क़ि अब लोगों का विश्वास उस पर से उठ गया होगा. ऐसे में मनोज को उसके आत्म विश्वास को वापस लाना होगा. यह मनोज के लिए एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है जो उसे अकेले ही उठानी है क्योंकि नीना ने उसे बोल दिया था क़ि किसी भी हालात में नीना की माँ को कुछ पता नहीं चलना चाहिए. नीना को डर था क़ि अगर उसकी माँ को सब कुछ पता चला, तो वो उससे नफरत करने लगेगी. नीना की इस ज़िद्द से तो यही निष्कर्ष निकला क़ि नीना के बचपन में ही कही उसकी इस बिमारी के बीज पनपे हैं. शायद इसका सीधा ताल्लुक़ नीना और उसकी माँ के आपसी सम्बन्ध से ही है. अब ये एक और जटिल काम है जो मनोज को करना होगा.
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