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पुरुष जिन्हे प्यार करते हैं, उन्हें छोड़ कैसे देते हैं?

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अक्सर आपने देखा होगा की आपकी कोई मित्र अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम पे अपने साथी के साथ इतनी रूमानी फोटो लगाती हैं, बारम्बार लव मेस्सगेस सोशल मीडिया पे भेजती हैं, और फिर एक दिन अचानक सब बदल जाता है और रूमानी फोटो और मेस्सगेस की जगह आध्यात्मिक वचन पोस्ट होने लगते हैं. आखिर ऐसा क्या बदल जाता है जो यह चेंज दीखता है. अधिकतर तो उन महिलाओं को भी नहीं पता चलता की आखिर यह सब क्यों और कैसे हुआ.

एक दिन जब मेरी एक मित्र की ज़िन्दगी में भी ऐसे ही बदलाव आने लगे, मैंने उससे कारण पुछा. वो बस सिसकते हुए यही बोलती रही, “क्यों? मैं ही क्यों?” उसके इस प्रश्न ने मुझे भी सोच में डाल दिया. सच में, क्यों. आखिर क्यों पुरुष उन महिलाओं को छोड़ देते हैं, जिनसे वो प्यार करते हैं?

आइंस्टीन ने एक बार कहा था की पुरुष शादी इस उम्मीद पर करता है की उसकी पत्नी कभी नहीं बदलेगी और स्त्री इस आशा से शादी करती हैं की उनके पुरुष कभी तो बदलेंगे. अंत में दोनों ही मायूस रह जाते हैं.

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मर्द बिना किसी दलील या सफाई के कैसे चले जाते हैं

भारत में सामाजिक शर्मिंदगी से बचने के लिए अधिकांश दम्पति तलाक से ज़्यादा अलग रहना ही पसंद करते हैं. अलग रहने वाले पति पत्नी की संख्या तलाकशुदा दम्पतियों से तीन गुनी है. संबंधों की पेचीदगी और बढ़ती जा रही है. ऐसे ही पेचीदा और न समझने वाली घटना है पुरुष का अपने साथी को बिना किसी वजह बताये, या सफाई दिए छोड़ देना. अगर आपको पता ही नहीं की परेशानी क्या है तो फिर उसका हल कैसे निकालेंगे आप? किसी भी सम्बन्ध को सफल होने के लिए सबसे ज़रूरी है आपसी बातचीत.

२०११ के भारतीय जनगणना के मुताबिक भारत में २३ लाख स्त्रियां अपने साथी द्वारा छोड़ी जा चुकी है जबकि इसकी आधी संख्या है तलाकशुदा स्त्रियों की. सोचिये अगर इसमें उन महिलाओं की गिनती भी की जाए जो लीव इन सम्बन्ध में थी और फिर उनके साथी ने उनसे नाता तोड़ लिया, तो यह संख्या कितनी बढ़ जाएगी. खैर ये संख्या भी कोई कम परेशां करने वाली नहीं है, और उससे भी दुखद है ये मसला की इनमे से अधिकांश महिलाओं को अंदाज़ा भी नहीं है की उनके साथ यह क्यों हुआ.

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क्या सोचती है वो जब एक पुरुष उसे छोड़ देता है?

“प्यार बहुत मुश्किल से मिलता है और जब मिलता है, तो हम उसे बहुत हिफाज़त से रखना चाहेंगे. है न? तो फिर पुरुष कैसे अपने प्यार से मुँह मोड़ कर चले जाते हैं?
क्यों वो मुझे छोड़कर चला गया?”

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अधिकतर स्त्रियां सन्न रह जाती हैं जब उनके साथ ऐसा कुछ होता है. शुरुवाती शॉक के बाद शुरू होता है “क्यों” का सिलसिला. एक इंसान जब अपने साथी के साथ एक सुरक्षित भविष्य के सपने बुनने लगता है, तब उसकी ज़िन्दगी में आया यह तूफ़ान सबकुछ नेस्त नाबूद कर देता है. आइये बातें करें कुछ ऐसे विचारों की जो अक्सर ऐसे हालत में स्त्रियों के मन में आती है.

१. अगर वो मुझे सच में प्यार करता था, तो मुझे छोड़ कैसे गया? — यह सवाल उसे चैन से रहने नहीं देता है. अपने सम्बन्ध के ऊपर इतने सवालिया निशाँ हो जाते है. उसे अब प्यार, साथ जैसे शब्दों पर यकीन नहीं रहता और न किसी इंसान पर भरोसा.

२. क्या किसी रिश्ते से निकलना इतना आसान होता है? — जब आपको कोई सफाई नहीं दी जाती, तो बहुत ज़्यादा सोचने लगते हो. कुछ ज़्यादा ही. इसलिए जब कोई महिला अपने साथी से यूं धोखा खाती है, तो उसकी ज़िन्दगी बिलकुल थम जाती है और वो खुद अपनी सोच से अपनेआप को प्रताड़ित करती है.

३. वो इतनी अच्छी औरत को छोड़ कैसे सकता है? — जब एक महिला किसी रिश्ते को अपनी पूरी ईमानदारी और निष्ठां से निभाती है तो उसके लिए ये सवाल सोचना बिलकुल लाज़मी है. शायद इस क्यों का जवाब ढूंढ़ने में वो अपने कई साल, या फिर पूरी ज़िन्दगी ही, लगा देती है.

४. वो इस तरह अचानक कैसे चला गया? — जब भी रिश्ता टूटता है और उसमे कोई बातचीत नहीं होती, वजह नहीं बताये जाते, ऐसे में पीछे छूटा साथी बार बार अपने मन में इस टूटन की वजह ढूंढ़ता है. ऐसे मामलों में महिला हालफिलहाल की घटनाओं को मन में दोहराती है और सोचती है, “कहीं तो इस अलगाव की कड़ी मिलेगी.” मगर जब ऐसा नहीं हो पता तो डिप्रेशन से ग्रसित हो जाती हैं.

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टॉप ८ कारण जिनकी वजह से मर्द बेवफा होते हैं

पुरुष कई कारण बताते हैं अपने साथी को छोड़ने के और ये कारण बहुत अजीब से बहुत संगीन तक कुछ भी हो सकते हैं. “मेरी पत्नी मेरे लिए चाय नहीं बनाती,” से लेकर “मुझे अपनी बॉस की बीवी से प्यार हो गया है,” कुछ भी कारण दिए जा सकते हैं. ज़्यादातर कारण की बात न करें, मगर कुछ कारण ज़रूर होते हैं जिनका कुछ तो प्रमाण होता है.आपका तर्क यहाँ ये भी हो सकता है की ये शिकायतें तो एक पत्नी की अपने पति से भी हो सकती है. बिलकुल हो सकती है, और सच कहें तो होती ही है मगर क्योंकि ये लेख हम सिर्फ पुरुषों के दृष्टिकोण से लिख रहे हैं, अभी चर्चा उन्ही की करेंगे.

१. पारस्परिक सराहना

कई बार महिलाएं अपनी रोज़मर्रा के काम में इतना खो जाती है की शायद वो अपने प्रेमी या पति को उतना तवज़्ज़ो नहीं दे पाती जितना उनसे अपेक्षा होती है. जॉन टेम्पलटन फॉउंडेशन के एक सर्वे के मुताबिक ५९ प्रतिशत महिलाएं अपनी साथी की सराहना नहीं करती और इससे उनके बीच के रिश्ते खट्टे होने लगते हैं.

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कई बार ये तथ्य की पुरुष है तो अपने परिवार की देख रेख और पालन पोषण उसकी ड्यूटी का हिस्सा है, हममे विरक्ति की भावना ले आता है. कभी कभार अपने पति को मुस्कुरा कर यह जता देना की हमें उनकी कदर है और हम समझते है की एक सरल ज़िन्दगी के लिए वो कितनी मेहनत करते हैं, उन्हें खुश कर सकता है, मगर अधिकतर महिलएं ऐसा करना या तो ज़रूरी नहीं समझती या खुद के कामों में व्यस्त होती हैं की भूल जाती हैं. ज़िन्दगी में इस आभार का आभाव रिश्तों में खटास ला सकता है और पुरुष अनायास उस तरफ खींचने लगता हैं जहाँ उन्हें थोड़ा भी मान मिलता है.

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२. खुद को नाकारा समझना

कई बार पुरुष इस अपराधबोध का शिकार हो जाते हैं की वो नाकाबिल है. कारण: क्योंकि उनकी पत्नियां हमेशाउन्हें उलहाने देती हैं और महसूस कराती हैं की दुनिया के बाकी पुरुष उनसे कितने बेहतर हैं. कई महिलाएं जब ऐसी तुलना करती है, उनका उद्देश्य मात्र दिल हल्का करना ही होता है, मगर ठीक इसके विपरीत पुरुष अक्सर इससे व्याकुल हो जाते हैं और खुद को धिक्कारने लगते हैं. वो इन मुश्किलों से निपटने का झटपट उपाय ढूँढ़ते हैं, और जब कुछ न हो तो बहुत परेशां हो जाते हैं. स्वयं पर ये दबाव कि वो अपनी साथी को आर्थिक, शारीरिक अथवा भावनात्मक स्तर पर संतुष्ट नहीं कर पा रहा है, उनके आत्म विश्वास को तोड़ने लगता है और कई पुरुष इस परिस्थिति से निकलने का एक ही तरीका पाते है — साथी से अलग होना.

3. अनुकूल साथ

रिश्ता कैसे भी शुरू हुआ है, अगर आगे चल कर कहीं भी साथी के साथ पारस्परिक समानता में कमी होती है तो पुरुष इस बारे में कम ही चर्चा करेंगे. कभी कभी शायद उनके पत्नी/साथी को अंदाज़ा भी नहीं हो कि ये बेमेल उनके पुरुष साथी के लिए कितनी बड़ी परेशानी का विषय है. आखिरकार फिर जब दोनों के बीच ऐसा कुछ भी कॉमन नहीं रहता तो महिलाएं शायद सब कुछ नज़रअंदाज़ कर निर्वाह करती रहे मगर कई बार पुरुष ऐसे संबंधों के डोर तोड़ आगे बढ़ना पसंद करते है और फिर एक दिन वो चले जाते हैं, बिना किसी स्पष्टीकरण या जवाब -तलबी के.

4. अंतरंगता का अभाव

यह एक अवधारणा है कि सेक्स का अभाव पुरुषों को सम्बन्ध तोड़ने के लिए मजबूर करता है. असल में आत्मीयता का आभाव उन्हें ज़्यादा कचोटता है. किसी भी रिश्ते का असली श्रोत होता है उसमे बंधे लोगों के बीच का शारीरिक और भावनात्मक आत्मीयता या सान्निध्य. अगर साथियों में इनकी भरमार हो तो मिल कर वो किसी भी परेशानी का सामना कर सकते हैं, और अगर इसका अभाव हो तो इससे बड़ी कोई परेशानी ही नहीं. अगर दो लोगों की शारीरिक ज़रूरतें या उमीदें अलग हों, तो निश्चित कि दोनों में से एक साथी तो असंतुष्ट ही रहेगा. इसका सीधा असर दोनों के पूरे रिश्ते पर पड़ता है और कोई भी दम्पति अगर इस मुश्किल में खुद को न संभाले तो निश्चय ही रिश्ते के भविष्य के ऊपर खतरा हो सकता है.

5. हावी होने वाली महिला साथी

पुरुषों के अहम् का सच तो जग विख्यात है. और अगर किसी पुरुष को यह लगने लगे कि उसकी पत्नी उस पर हावी हो रही है, तो उसका पुरुषत्व अक्सर तिलमिला उठता है. चाहे वो अपनी पत्नी को कितना भी प्रेम करता हो, एक सीमा के बाद वो हथियार डालने को तैयार नहीं होता. जब उसे लगता है कि उसकी राय या पसंद नपसंद की कदर नहीं हो रही, वो अक्सर अपने स्वाभिमान को वापस लाने के लिए रिश्ते कि कुर्बानी देने को भी तैयार हो जाता है. अधिकतर देखा गया है कि पुरुष उन महिलाओं को ज़्यादा मानते हैं जो उनकी इज़्ज़त करती हैं, बनिस्पत उनकी जो उन्हें सिर्फ प्यार करती हैं. और जब उसे एहसास होने लगता है कि वो अपनी बीवी पर हावी नहीं हो सकते, बल्कि उसके विपरीत वो ही उनपर तानाशाही चलती है, तो वो उस रिश्ते से बाहर होने में कोई हिचकिचाहट नहीं महसूस होती.

6. बेवफाई

धोखा देने वाला साथी तो किसी भी रिश्ते को ख़त्म करने के लिए अकेली ही काफी बड़ी वजह है. बेवफाई, चाहे वो पुरुष की हो या स्त्री की, तलाक या अलग होने का एकमात्र बहुत सशक्त कारण है. अगर कोई स्त्री धोखा देती है तो पुरुष अक्सर उसे भुला पाना नामुमकिन मानते है और उनके रिश्तों की दरार बढ़ते बढ़ते अलगाव की तरफ हो लेती है. अगर पुरुष ने धोखा दिया हो और उसकी प्रेमिका उसे माफ़ कर भी दे, फिर भी अक्सर रिश्तों में खटास और अनमनाहट तो रह ही जाती है. या तो दिन प्रतिदिन के उलहाने शुरू हो जाते हैं या फिर खुद पुरुष अपराधबोध महसूस करता रहता है. दोनों ही सूरतों में साथ रहना धीरे धीरे काफी मुश्किल हो जाता है.

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7. दूसरी ज़िम्मेदारियाँ

कभी कभी पुरुषों की ज़िन्दगी में कई और ज़िम्मेदारियाँ होती है जिनकी महत्ता शायद उनकी प्रेमिका न समझ सके. जब इस समझ की तकरार बहुत बढ़ जाती है और पुरुष को अपनी उस ज़िम्मेदारी और प्रेम के बीच चुनने की नौबत आती है, तो कई बार पुरुष अपने प्रेम सम्बन्ध को त्यागना ही चुनते हैं. यह तथाकथित ज़िम्मेदारी क्या हो सकती हैं. यह एक बीमार परिजन की देखरेख, नौकरी को लेकर महत्वाकांक्षा, अपने पूर्वे रिश्ते से हुए बच्चे या कुछ और भी हो सकते हैं. अगर किसी पुरुष को अपने कर्त्तव्य को अनदेखा कर अपने प्रेम को सींचना है, तो कोई भी कर्मनिष्ठावान पुरुष शायद प्रेम को छोड़ना ही सही मानेगा.

8. उसका “मैं” सर्वोपरि है

प्रसिद्द रिहाना ने एक बार कहा था, “अपनी गलतियों के लिए आपको अपराधबोध करने की पुरुषों की कला को कभी आप काम आंकने की गलती न करें.” ये बात शत प्रतिशत सच बैठती है उन पुरुषों पर जो बिना किसी ढोस वजह, दलील, जवाब तलबी के अपने प्रेम को छोड़ देते हैं. जी हाँ, ऐसे भी पुरुष है हमारे समाज में जिनके पास कोई वजह नहीं होती ऐसा कदम उठाने के लिए. वो स्वयं में इतने लीं होते हैं, और इतने आत्मकेंद्रित होते हैं,की मौका मिलने पर वो अपने हित के लिए किसी का भी नुक्सान कर सकते हैं. उनके लिए एक सम्बन्ध तोडना कोई बहुत महत्त्व नहीं रखता और सच मानिये तो ऐसे पुरुष अगर आपके जीवन से निकल जाए, तो बेहतर ही है.

सच तो यह है की कई बार दो लोग एक दुसरे से बहुत प्यार करते हुए भी साथ रहने में समर्थ नहीं होते.

शायद यहाँ दिए गए कारण आपकी मदद कर सके आपके रिश्ते को आंकने में या भविष्य के आपके रिश्तों की नीव मज़बूत करने में.

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