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पुरूष स्त्रियों से क्या चाहते हैं

अंतरंगता के ढर्रे पर ना चलें; रहस्य बनाए रखें
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मैंने ‘स्त्रियां क्या चाहती हैं’ पर कई लेख, ब्लॉग, चर्चा, टॉक शो, फिल्म और यहां तक कि स्टैंड-अप कॉमेडी रूटीन भी देखें हैं लेकिन कभी-कभार ही कोई लिखता है कि ‘पुरूष क्या चाहते हैं’। मुझे लगता है कि पुरूष स्त्रियों से क्या चाहते हैं इसे इतना ज़ाहिर समझा जाता है कि उस पर सरसरी तौर पर भी ध्यान नहीं दिया जाता और मैग्ज़ीन्स द्वारा भी इतना ज़ाहिर और साधारण समझा जाता है कि उस पर कॉलम की जगह बर्बाद करने की भी ज़रूरत नहीं समझी जाती।

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एक दूसरे के साथ को जानना, समझना और उसका आनंद लेना, एक मानसिक संपर्क स्थापित करना और एक दूसरे की कामुक शारीरिकता को सराहना वर्तमान में अधिकतर लोगों के लिए अनजाना है। पहले की संयुक्त परिवार प्रणाली और भिन्न वर्क टाइम, तनाव और आज का कैरियर अनुसरण, उस समय और विशिष्ठताओं में बाधा डालते हैं जो ऐसे अंतरंग क्षणों के लिए ज़रूरी हैं।

सेक्स अब एक जल्दबाजी का कार्य है।

व्हाम! बाम! शुक्रिया मैडम! और जब बच्चा पैदा होता है, अंतरंग मिलन के सभी खोए हुए पहलुओं पर उल्लास की परत चढ़ जाती है। विश्व इतना बुद्धिमान नहीं है और ना ही जोड़े इतना अधिक जानते हैं।

couple getting closer
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विद्यालयों में सेक्स शिक्षा केवल पुरूष और महिला जननांगों का रेखांकित वर्णन होता है। उसके बाद ऑनलाइन उपलब्ध पोर्न द्वारा ‘उच्च विद्या प्राप्ति’ होती है, जो मन को सेक्स की बिल्कुल गलत धारणाओं, व्याख्याओं और उम्मीदों द्वारा भ्रष्ट कर देती है।

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विवाह केवल एक अनुबंध है जो पुरूषों एवं स्त्रियों को एक कानूनी बंधन में बांधता है।

यह एक दूसरे के प्रति निरंतर आकर्षण की गारंटी नहीं देता। दोनों को इस पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है। यह सत्य है कि अंतरंगता अवहेलना उत्पन्न करती है। यह बहुत आम ढर्रा है जिस पर लंबे अवधि से विवाहित जोड़े पड़ जाते हैं। निजी स्थान और एकान्त अप्रासंगिक हो जाते हैं। नग्नता अपना कामुक मूल्य खो देती है; अंतरंग पल परिवार की बकबक और एक-दूसरे की मौजूदगी में अनाकर्शक और अशिष्ट पर्सनल हाईजीन आदतों की असावधानी द्वारा नष्ट हो जाते हैं। आकर्षण का अर्थ और धारणा कब और कैसे बदल गई? या फिर अब उससे कोई फर्क नहीं पड़ता?

जब आपको आपके साथी का ध्यान आकर्षित करने के लिए कोई प्रयास करने की ज़रूरत महसूस नहीं होती, तो तड़प, कामुकता, पैशन समाप्त हो जाता है। विवाहित पुरूष और स्त्रियां कभी कभार ही शरीर का आकार बनाए रखने पर ध्यान देते हैं (स्वास्थ्य के आधार पर, या आकार के आधार पर)। महिलाओं में स्वयं को तैयार करने की या सेक्सी अंतर्वस्त्र या कपड़े पहनने की पहले जैसी दिलचस्पी नहीं है। क्या वे कभी भी घर पर सेक्सी दिखने और महसूस करने को ज़रूरी समझती हैं? इतनी मेहनत, समय और पैसे… किसलिए? किसे आकर्षित करना है? अब जब उनके पास एक साथी है जो उनकी भोजन, घर और सुरक्षा की मूल आवश्यकताओं को पूरा करता है, तो उन ‘फेरोमोन’ को फिर से जगाने की कोई असली वजह नहीं है।

couple in bed
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प्रचलित धारणा के विपरीत, एक पुरूष सेक्स को केवल इंटरकोर्स की दृष्टि से नहीं देखता।

यह अधिकांश भारतीय जोड़ों के लिए सिर्फ एक बदकिस्मत सच्चाई है। पुरूष प्रकृति के अनुसार राहत के लिए ओरगेज़म पा सकते हैं। हम ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि हम यह कर सकते हैं ना कि इसलिए क्योंकि हम वह चाहते हैं।

पैशन या कामुकता के बगैर सेक्स केवल एक शारीरिक कार्य है।

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तो हम पुरूष चाहते क्या हैं?

हम अपने विचार और भावनाएं प्रकट करने में स्त्रियों जितने निपुण नहीं हैं। यह जानबूझकर नहीं है, ना ही यह इसलिए है कि स्त्रियों के प्रति हमारा प्रेम/सम्मान/प्राथमिकता कुछ कम है। हमें बनाया ही इस प्रकार गया है। तो अगर स्त्रियों के ‘‘तुम क्या सोच रहे हो?’’ पूछने पर हम कन्फ्यूज़्ड दिखाई देते हैं, ऐसा इसलिए है कि शायद हम वास्तव में कन्फ्यूज़्ड हैं।

हम स्त्रियों को सहज रूप से नोटिस करते हैं। हम अच्छे दिखने की सराहना करते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम गुमराह होने के लिए उतारू हैं। अगर स्त्रियां हमें ओछेपन के लिए दोषी ठहराती हैं, तो वे केवल गुप्त व्यवहार को प्रोत्साहित कर रही हैं। खुलने में हमारी मदद कीजिए। हम चाहते हैं कि स्त्रियां हमारी मित्र बनें ना कि अन्य स्त्रियों की उपस्थिति में एक रक्षक बन जाएं।

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हमें टीवी पर खेल देखना, छुट्टियों में गोल्फ खेलना और सुबह की चाय के साथ अखबार पढ़ना पसंद है। हम चाहते हैं कि स्त्रियां समझें कि हम उन्हें पहले की ही तरह प्यार करते हैं और ये चीज़ें उनकी जगह नहीं ले रहीं हैं और ना ही उनकी मौजूदगी को अनदेखा कर रही हैं। बेशक हम इन सब के बगैर गुज़ारा कर सकते हैं, लेकिन यह नहाने के पानी को गर्म करने की तरह है – आप उसके बिना काम चला सकते हैं, लेकिन उसके साथ अच्छा लगता है। स्त्रियां को हमारे समय और हमारे ध्यान की माँग इसलिए करनी चाहिए क्योंकि उन्हें ज़रूरत है और वे चाहतीं हैं ना कि इसलिए कि वे केवल उसे मिस करती हैं।

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एक रोमांटिक नाइटआउट के लिए गुलाब और मोमबत्तियां हमेशा ज़रूरी नहीं होती हैं। बस गंभीर बातों को छोड़ दीजिए। कोई गपशप और कोई पारिवारिक बात नहीं। यह बिल्कुल काम नहीं करता जब हम स्त्रियां को प्यार से देखते हैं और वे सास का ज़िक्र करती हैं!

Couple getting intimate
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हमें पैशन और आपसी तड़प वापस चाहिए। स्त्रियां कपड़े बदलने के दौरान रहस्य वापस लाएं, लेस के छोटे आकर्षणों के साथ हमें तरसाएं, बिस्तर पर हमें हैरान कर दें।इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि स्त्रियां कैसी दिखती हैं- मोटी, पतली, काली, गोरी, थकी हुई, झुर्रियों वाली; हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन महिलाओं को उनकी सेक्स अपील को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। यह हमें इच्छित, वांछित महसूस करवाता है।

और पुरूष केवल यही चाहते हैं।

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