जब प्यार में चोट खाकर उसने ड्रगस और शराब में खुद को झोंका

Shreya Das
sad man lying on the table with the glass of alcohol

(पहचान छुपाने के लिए नाम बदले गए हैं)

उसे उसकी सपनो की दुनिया मिल गई थी

अंकित एक २४ साल का महत्वाकांक्षी युवा था जब वो पहली बार मुंबई महानगरी पंहुचा था. एमबीए की डिग्री हाथ में आते ही अंकित को कैंपस से ही इस बड़ी सी कंपनी से नौकरी का ऑफर आ गया था. अब वो कॉर्पोरेट दुनिया में कदम रख चूका था और धीरे धीरे सीढियाँ चढ़ने लगा. नयी नयी आज़ादी और इस महानगरी की चकाचौंध से भरी दुनिया उसे बहुत भाने लगी और वो अपनी इस नयी ज़िन्दगी का हर पल जीने लगा.

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और फिर उसकी मुलाकात आकांक्षा से हुई और उसकी तो जैसे दुनिया ही बदल गई. वो बिलकुल उसके सपनो की प्रेमिका थी-सुन्दर, स्मार्ट, हाज़िरजवाब और जोश से भरपूर. आकर्षण को प्रेम में बदलने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा. अंकित उससे शादी करना चाहता था मगर आकांक्षा हिचकिचा रही थी. वो एक दूसरी जाती की थी और जानती थी की उसके घरवालों की क्या प्रतिक्रिया होगी जब उन्हें अंकित के बारे में पता चलेगा. अंकित उसे समझाता था की वो दोनों अपने प्यार से सबका मन जीत लेंगे।

मगर ऐसा नहीं हुआ. जब आकांक्षा के परिवार को अंकित के बारे में पता चला, तो उन्होंने बहुत तमाशा खड़ा कर दिया. कोई तर्क, दलील या प्यार की दुहाई उनका मन बदलने के लिए काफी नहीं थी. आकांक्षा अपने परिवार और प्यार के बीच में बुरी तरह पीस रही थी. दोनों ही के लिए हर दिन एक भावनात्मक युद्द से कम नहीं होता था. बहुत सोच समझ कर आकांक्षा को लगने लगा था की अगर वो अपने परिवार के खिलाफ जा कर अंकित से शादी कर भी लेती है तो भी वो लोग कभी भी अंकित को स्वीकार नहीं करेंगे और उनके रिश्ते पूरी ज़िन्दगी ख़राब रहेंगे.

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वो एक दुःस्वप्न सा था

अंकित उसके इस फैसले से बुरी तरह आहात हो गया. उसे लगा की आकांक्षा ने उसे धोखा दिया है. जहाँ एक तरफ वो उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ने को तैयार था, वो पीछे हट गई. अंकित डिप्रेशन का शिकार होने लगा. उसे समझ ही नहीं आ रहा था की वो अपनी ज़िन्दगी को कैसे संभाले और आगे बढ़े। एक दिन अंकित को लगा की उसके दर्द को कम करने में शराब बहुत मदद करती है. बस फिर क्या था, अंकित रोज़ ही ऑफिस के बाद बैठ कर शराब पीने लगता. कभी कभी तो सुबह तक वो शराब पीटा, कुछ घंटे सोता और फिर ऑफिस चला जाता. उसकी अस्तव्यस्त हालत देख कर उसके ऑफिस के बॉस ने उसे चेतावनी भी दी मगर अंकित को कोई फर्क नहीं पड़ा.

फिर एक दिन अंकित को लगा की ड्रग्स तो शराब से भी ज़्यादा कारगर होते हैं दर्द मिटाने में और ड्रग्स लेने के बाद भी वो बिलकुल फ्रेश दिख सकता है. बस फिर क्या था. अब अंकित शराब के साथ साथ ड्रग्स भी करने लगा. अब वो सुबह ऑफिस जाता, अपने काम पूरे करता, घर आकर शराब पीता और फिर ड्रग्स.

ड्रग्स और शराब से उसका दर्द “कम” होने लगा

उसके दोस्त कम होने लगे, बैंक अकाउंट में धन राशि भी कम होने लगी और उसकी निजी ज़िन्दगी भी बिखर रही थी. आकांक्षा को उसकी ज़िन्दगी से निकले तीन महीने हो चुके थे. एक दिन जब अंकित सुबह उठा तो उसके पेट में बहुत ही तीव्र दर्द हो रहा था. दर्द इतना अधिक था की वो चाह कर भी उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर पा था.

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उसे डॉक्टर के पास जाना ही पड़ा. डॉक्टर ने तुरंत ही कुछ टेस्ट बता दिए और परिणाम बुरा ही आया. अपने शरीर पर उसने इतने दिनों में जितने अत्याचार किये थे, अब उसका खामियाज़ा भुगतने का समय आ गया था. बहुत काम खाना और बहुत अधिक शराब के कारण उसके पेट में अलसर हो गए थे और उसका लिवर भी ख़राब होने लगा था. डॉक्टर ने उसे तुरंत ही शराब पीने पर रोक लगाने को कहा. ज़िन्दगी उसे चेतावनी दे रही थी. उसे तुरंत ही शराब और ड्रग्स को छोड़ना होगा. अंकित समझ गया की अगर उसे अपनी ज़िन्दगी वापस चाहिए तो उसे ये सब करना ही होगा. वो घर गया और ड्रग्स के सारे पैकेट और शराब की बोतलों को फेंक दिया.

उसके लिए ये लत छोड़ना बहुत मुश्किल था

हर लत की तरह शुरू में उसे भी काफी दिक्कतें आई. उसे शराब पीने की अपनी ललक को बार बार दबाना था. खुद को पीने से रोकने के लिए अंकित देर रात तक ऑफिस में काम करने लगा. ऑफिस से लौटते हुए उसके कदम खुदबखुद ही शराब की दूकान की तरफ जाने लगते थे मगर वो समझा बुझा कर खुद को वापस ले आता. शराब छूटने के कारण उसे विथड्रावल के लक्षण दिखने लगे जो शारीरिक और भावनात्मक दोनों ही थे. उसे बहुत ही तीव्र सिरदर्द होता था और उलटी आती थी और कुछ दिन वो बुरी तरह कांपता था मगर उसने सभी का सामना डट कर किया. सबसे मुश्किल था उसके लिए अपने मन को संभालना. उसका मन बार बार कहता की जाओ एक ड्रिंक ले लो. आखिर एक ड्रिंक से क्या नुक्सान होगा, बस दर्द में थोड़ी रहत मिल जाएगी. जब वो कमज़ोर पड़ने लगता तो अपने माता पिता को फ़ोन कर उनसे बातें करता. उनकी आवाज़ सुन कर उसका निश्चय दृढ़ हो होता और एक और दिन बिना शराब के निकल जाता था.

ड्रग्स से खुद को निकालना और मुश्किल था. उसने एक सपोर्ट ग्रुप के बारे में पता किया और उसका सदस्य बन गया. वहां उसका एक प्रोग्राम मित्र बना जो इस लत को छुड़ाने में उसकी मदद करता था.

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फिर एक दिन उसके दोस्त ने उससे योगा शुरू करने को कहा. वो अंकित की ज़िन्दगी का एक नया पड़ाव था. उसने योगा शुरू किया और फिर उसने बहुत ही शिद्दत से उसे अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बना लिया. अंकित को अपने मन को स्थिर रखना और एकाग्र करना सिखाया. धीरे धीरे शराब और ड्रग्स के लिए उसकी तड़प अब कम होने लगी.

उसके जीवन को एक नयी रह मिलने लगी. वो स्वं उपचार की किताबें पड़ने लगा और आर्ट ऑफ़ लिविंग और विपस्सना के कोर्स भी शुरू कर दिए.

ज़िन्दगी फिर सँभालने लगी

अंकित को शराब छोड़े अब तीन साल हो गए हैं. इस बीच वो एक दूसरी लड़की से मिला. वैसे तो वो अब भी डेटिंग ही कर रहे हैं मगर लगता है की शायद अंकित को अपनी जीवनसाथी मिल गई है. कभी कभी ज़िन्दगी आपको खींच कर नीचे पटक देती है और सब कुछ ख़त्म हुआ दीखता है. अंकित भी कुछ समय के लिए हारा महसूस कर रहा था मगर फिर उसने निश्चय किया की वो लड़ेगा और इस लड़ाई को जीतेगा.

अंत में हमें ही अपने जीवन की राह चुननी होती है. ये हम तय करते हैं की हम क्या चुनेंगे, आसान रास्ता तो आगे अंधकार में ले जाता है या फिर वो दूसरा मुश्किल रास्ता जो मुश्किल मगर सही होता है.

उसने मुझसे कहा था कि उसने अपनी एक्स के साथ ब्रेकअप कर लिया था

उसने कहा कि वह और किसी के साथ भी संबंध रखना चाहता है

मुझे शादी के बाहर इतने सारे भावनात्मक संपर्कों की ज़रूरत क्यों पड़ी?

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