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राम और सीता के संबंध का रोमांटिक पहलू

राम और सीता को एक आदर्श जोड़े के रूप में चित्रित किया जाता है, किसी तरह मानव असफलताओं से ऊपर, लेकिन उनके रिश्ते का भी एक मानवीय पहलू है।
Ram and Sita

संयोग नहीं है। यह संस्कारी फिल्म निर्माता जो ‘महान भारतीय पारिवारिक परंपरा’ को कायम रखना पसंद करता है, वह हमेशा सूरज बड़जात्या की लगभग सभी फिल्मों में रामायण का रूपक होना कोई अपनी प्रमुख जोड़ी को सच्चरित्र पात्रों के रूप में चित्रित करता है। वे आत्मबलिदानी होते हैं, कभी कोई गलती नहीं करते और सिर्फ 100 प्रतिशत एक्स्ट्रा वर्जिन प्यार करते हैं जिसके सामने सबसे महंगा ऑलिव ऑइल भी कुछ नहीं। वे ऐसा व्यवहार इसलिए करते हैं क्योंकि वे राम और सीता के आदर्श जोड़े की नकल करने की कोशिश कर रहे होते हैं। दरअसल, हर भारतीय जोड़े से इसी तरह का व्यवहार करने की उम्मीद की जाती है।

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ध्यान दीजिए कि कैसे घरों में सिर्फ रामायण पढ़ी जाती है महाभारत नहीं क्योंकि हम चाहते हैं कि हमारी औरतें पापहीन सीता जैसा बर्ताव करे ना की उत्साही पांचाली जैसा।

नैतिक कोड सैट करना
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रामायण को लंबे समय से हिंदू समाज में नैतिक कोडबुक माना जाता है। यह बात विशेष रूप से इस महाकाव्य के तुलसीदास के संस्करण रामचरितमानस के बारे में सत्य है, जो वाल्मीकि के मानवीय नायकों को दैवीय अचूकता में बदल देता है। भले ही तुलसीदास मुख्य कहानी को लेकर चलते हैं, फिर भी वे इसे अलग रंग में ढालते हैं। राम और सीता के हर कार्य को ईश्वरीय योजना का भाग माना गया है, और एक स्त्री पुरूष के संबंधों की प्यारी अपूर्णताओं को भुला दिया गया है।

किसी भी नारीवादी से बात करो तो आपको राम के प्रति उनकी घृणा साफ दिखाई देगी। आखिर कौन सी आत्मसम्मान वाली, मुक्त विचारों वाली स्त्री ऐसे पुरूष को पसंद करेगी जो ना केवल अपनी पत्नी को विक्टिम शेम करे बल्कि उसकी गर्भावस्था के दौरान उसे छोड़ भी दे? लेकिन यह विचार उतना ही लघुकारक है जितना पारंपरिक वाला, जो राम को मर्यादा पुरूषोत्तम मानता है। कुछ अतिरिक्त तड़क-भड़क के साथ, पौराणिक कथाएं आखिर मानव सत्य; और जीवन को ही दर्शाती हैं, और जैसा हम इसे जानते हैं, यह कभी कभार ही इतनी ब्लेक और व्हाइट होती है।

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पूरी तस्वीर को देखें

राम के चरित्र के संपूर्ण पहलू पर विचार किया जाना चाहिए, खासतौर पर जो भूमिकाएं वो निभा रहा है, उसके प्रकाश में। एक नायक के रूप में, उसे श्रेष्टतम होना चाहिए चाहे एक बेटा हो, पति या राजा हो। अधिकांश मामलों में, वह नैतिक रूप से कठिन स्टैंड लेता है। इसे देखने के लिए हमें थोड़े धैर्य की ज़रूरत है।

अर्शिया सत्तर अपनी किताब लॉस्ट लव्स में राम को सबसे नाजु़क स्थिति में प्रस्तुत करती है। उसकी तरह, इसे देखने के लिए सीता के अपहरण के प्रकरण को फिर से देखना अच्छा है। राम हर मापक से सबसे अनुग्रहशील साथी है। यह जानते हुए भी कि सुनहरा हिरण एक मायावी राक्षस है, राम सीता की मांगों को स्वीकार करता है और उसके लिए उसे पकड़ने के लिए सहमत हो जाता है। क्या एक अस्नेही पति ऐसा करने के लिए तैयार होता? राम के प्यार का सबूत, दुर्भाग्यवश कथा का बुरा मोड़ बन जाता है और रावण द्वारा सीता का अपहरण कर लिया जाता है। हम सभी इस नाटकीय एपीसोड के बारे में जानते हैं, लेकिन उसके बाद क्या हुआ उसकी चर्चा कभी कभार ही की जाती है।

दर्द महसूस करना

जब राम को पता चला कि सीता जा चुकी है, तो शायद यह सीता के लिए एपिफनी का पल हो। जैसा खलील गिब्रान ने कहा है, ‘‘यह हमेशा से ज्ञात तथ्य है कि जब तक जुदाई की घड़ी नहीं आती तब तक प्यार की गहराई पता नहीं चलती।” राम गमगीन है, टूट चुका है। दुःख की व्यग्रता में, वह पशुओं और पेड़ों से पूछता है कि क्या उन्होंने सीता को देखा है। वह जीने की अपनी इच्छा खो बैठता है। टूटे हुए दिल वाला कौन व्यक्ति इसे नहीं समझ पाएगा? जब लक्ष्मण अपने विचलित भाई को समझाता है तब जाकर राम ठीक होता है और मैन विथ ए मिशन बन जाता है।

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ram sita

रामायण का एक और आकर्षक प्रकरण हमें राम-सीता के रोमांटिक पहलू का पता लगाने में मदद करता है। सीता यह हनुमान को बताती है, जब वह उसकी खबर लाने के लिए पहली बार लंका जाता है। एक दिन, जब जोड़ा चित्रकूट पहाड़ी पर आराम कर रहा होता है, एक भूखा कौवा सीता पर हमला कर देता है। वह उसके स्तन पर दो बार चांच से प्रहार करता है, उसे बहुत परेशान करते हुए। अपनी प्रियसी को इस हाल में देखने पर, उत्तेजित राम कूशा घास की एक पत्ती उठाता है, उसमें जादू फूंकता है, उसे ब्रहॅमास्त्र में बदलता है और उस पापी पक्षी पर छोड़ देता है। डरा हुआ पक्षी पूरी दुनिया में घूमता है लेकिन दैवीय तीर उसका पीछा नहीं छोड़ता। अंत में, वह राम के सामने आत्मसमर्पण कर देता है और अपनी सुरक्षा मांगता है। लेकिन एक बार छोड़ा हुआ ब्रहमास्त्र वापस नहीं लिया जा सकता, इसलिए दयालु नायक खंड को संशोधित कर देता है। वह कौवे का जीवन बचा लेता है और कहता है कि शस्त्र सिर्फ उसकी एक आंख में मारेगा।

पुरूष बनाम राजा

राम का कौशल मानना ही पड़ेगा। अपनी प्रियसी की बहादुर रक्षा, भले ही यह छोटे से कौवे के विरूद्ध हो या लंका के शक्तिशाली राजा के विरूद्ध। हमें ध्यान में रखना चाहिए कि इन मामलों में राम एक प्रेमी और पति के रूप में व्यक्तिगत स्तर पर काम करता है। दूसरी तरफ, उसकी अग्निपरीक्षा और निर्वासन से संबंधित उसके निर्णय एक राजा के रूप में लिए गए होते हैं। दूसरी बार भी राम का दुःख महसूस किया जा सकता है, जब वह अपनी पत्नी के प्यार और एक राजा के रूप में अपने कर्तव्यों के बीच में फंसा होता है। राम अपनी प्रजा को खुश करने का कठिन निर्णय लेता है। लेकिन वह अपने पिता की तरह दूसरी पत्नी कभी नहीं लाता, और धार्मिक समारोहों के दौरान सीता की सुनहरी छवि का उपयोग करता है जबकि एक अयोग्य स्त्री के प्रति उसकी निष्ठा के लिए उसकी लगातार निंदा की जाती है।

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राम होना कोई आसान काम नहीं है

राम जो भी करता है उसके लिए सीता की स्वीकृति, सिर्फ एक पत्नी होने के नाते आज्ञापालन नहीं है। वह अपने आप में शक्तिशाली है और अगर वह चुप्पी या दर्द सहना चुनती है, तो यह प्यार के कारण है।

सीता राम के प्यार को जानती है और बहुत महत्त्व देती है और इसलिए वह अयोध्या में नहीं रहना चाहती और ना ही रावण की धमकियों और प्रलोभन के सामने झुकती है। सीता भी जब तक जीवित रहती है, अपनी तरफ से वैवाहिक संधि को बनाए रखती है।

यात्रा के अंत में राम का चेहरा निराशाजनक रूप से बदल जाता है ये अन्य बात है। लेकिन प्यार ने उन दोनों को राह पर साथ में चलने के लिए प्रेरित किया, हमें भी इसी से प्रेरणा लेनी चाहिए।
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