रामायण में लक्ष्मण के लिए उर्मिला के प्यार की बहुत कम प्रचलित कहानी

लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला का कम ज्ञात बलिदान

प्यार अज्ञात रूपों में आता है। और उनके बारे में कहानियां भी कई हैं।

यहां तक कि हमारे अपने मिथक और किवदंतियों में भी, इतने सारे लोगों के प्यार की कहानियाँ हैं कि कोई भी उन बलिदानों की प्रशंसा कर सकता है जो उन लोगों ने एक दूसरे के लिए किए थे। कुछ कहानियाँ काफी लोकप्रिय हो गईं जबकि अन्य समय के साथ फीकी पड़ गईं। लेकिन अगर कोई हमारे महाकाव्य और पौराणिक कथाओं की खोजबीन करे, तो वह उन फीकी कहानियों का पता लगा सकता है, हालांकि उन्हें विभिन्न संस्करण मिल सकते हैं।

ऐसी ही एक कहानी का ऐसा ही एक संस्करण लक्ष्मण के प्रति उर्मिला के प्यार का है। रामायण अपने नायकों और मुख्य पात्रों – राम और सीता की प्रेम कहानी को प्रदर्शित करने के लिए काफी लोकप्रिय है। यह तारीफों के पुल बांधता है कि किस प्रकार राम ने सीता को ढूंढने के लिए ज़मीन आसमान एक कर दिए जब लंका के असुर राजा रावण ने उसका अपहरण कर लिया, जिसके कारण लंका का युद्ध हुआ जिसमें रावण मारा गया।

हम सब इस कहानी को जानते हैं। लेकिन क्या हम इस तथ्य से अवगत हैं कि जिस तरह सीता ऐसी स्त्री थी जो अपने बलिदानों के लिए जानी जाती थी, उसी तरह उसकी बहन उर्मिला ने भी इस तरह का व्यक्तित्व बरकरार रखा था?

उन्होंने अयोध्या के सभी चार राजकुमारों के साथ अपनी चार बेटियों की शादी करने का फैसला लिया।
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उसने अपनी बहन की तरह एक राजकुमार से शादी की

कई लोग ऐसा करते हैं। कई लोग नहीं कर सकते।

प्यार परफेक्ट नहीं होता है, यह लोगों से कुछ काम करवाता है; उनमें से कुछ कामों को बलिदान कहा जाता है। उर्मिला ने भी कुछ बलिदान दिया था।

उसने क्या बलिदान दिए उसपर जाने से पहले, पहले हम उसका परिचय करवा देते हैं। उर्मिला सीता की बहन थी। वह मिथिला के तत्कालीन राजा जनक और रानी सुनैना की बेटी थी। सीता और वह, और उनकी दो अन्य बहनें आपस में बहुत करीब थी। ऐसा कहा जाता था कि उनका बंधन अटूट था। वे एक साथ बचपन से युवावस्था की ओर बढ़ीं और जल्द ही वह समय आ गया जब शिवजी का धनुष तोड़ कर राम ने स्वयंवर जीत लिया। जब जनक ने यह देखा की अयोध्या के राम ने उनकी बेटी सीता का हाथ जीत लिया है और जब उन्हें पता चला कि अयोध्या के राजा दशरथ के तीन पुत्र और हैं, उन्होंने अयोध्या के सभी चार राजकुमारों के साथ अपनी चार बेटियों की शादी करने का फैसला लिया। सीता ने राम से शादी की और उर्मिला ने लक्ष्मण से शादी की।

जैसा की हम जानते हैं, मंथरा ने राम और सीता के खिलाफ कैकेई के मन में ज़हर भरा। इसी वजह से कैकेई ने उस वचन का आह्वान किया जो दशरथ ने उसे दिया था और उसने मांग की कि राम और सीता चौदह वर्षीय वनवास के लिए जाएंगे। दशरथ ने बहुत समय और नखरों के बाद रानी की मांग मान ली। राम और सीता ने उन्हें मना लिया कि वे उन्हें जाने दें और भरत को अयोध्या का राजा बना दें।

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उसने कहा मैं अकेला जाउंगा

लक्ष्मण ज़िद पर अड़ा था कि वह अपने भाई और सीता के साथ वनवास में जाएगा। जब वह नहीं माना, तो उर्मिला ने भी साथ चलने को कहा, लेकिन लक्ष्मण ने इन्कार कर दिया। वह चाहता था कि वह शाही परिवार की देखभाल करने में मदद करे और शायद किसी अन्य तरीके से मदद करे; वह उसे अपने साथ जंगल में नहीं ले जाने वाला था। लक्ष्मण ने उससे कहा कि उसकी सोने की कोई चाह नहीं है और उसे दिन रात राम और सीता की रखवाली करनी होगी। इसलिए उर्मिला वहीं रूक गई और उसने अपने पति को राम और सीता के साथ जाते हुए देखा।

लक्ष्मण अपनी जु़बान का पक्का था और दिन रात अपने भाई और भाभी की रखवाली करता था। एक ऐसी ही रात में, नींद की देवी निद्रा उसके पास आई और उससे कहा कि वह सोने के बारे में सोचे और खुद को ऐसे कर्तव्य से राहत दे। लक्ष्मण टस से मस नहीं हुआ। उसने देवी से कहा कि वह उसकी नींद को नज़रंदाज़ कर दे। अपने बड़े भाई के प्रति उसकी निष्ठा को देखते हुए, उसने उसे वरदान दिया, लेकिन इस शर्त पर कि संतुलन बनाए रखने के लिए किसी और को उसकी जगह 14 वर्षों तक सोना होगा। लक्ष्मण ने देवी से कहा की उर्मिला से मदद करने को कहें।

हाँ, मैं तुम्हारे लिए सोउंगी

उर्मिला ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया और एक बार भी जागे बगैर 14 वर्षों तक सोती रही। उसने अपने पति की प्यार की खतिर और उसका कर्तव्य पूरा करने में मदद करने के लिए अपने जीवन के 14 वर्षों का बलिदान कर दिया। वह भी एक वरदान साबित हुआ। चूंकि उर्मिला सोने के लिए तैयार हो गई, लक्ष्मण जागते रहे और नींद को हरा दिया।

उर्मिला ने अपने पति का कर्तव्य पूरा करने में मदद करने के लिए अपने जीवन के 14 वर्षों का बलिदान कर दिया।
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चूंकि उर्मिला सोने के लिए तैयार हो गई, लक्ष्मण जागते रहे और नींद को हरा दिया।

चूंकि वह नींद को हरा चुका था इसलिए वह रावण के पुत्र मेघनाथ को मार सकता था, जिसे यह वरदान प्राप्त था कि उसे केवल वही व्यक्ति मार सकता है जिसने नींद को हरा दिया है। लक्ष्मण इस शर्त पर खरा उतरता था।

प्यार में भारी शक्ति होती है और यह लोगों, उनके कार्यों और घटनाओं को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करती है। उर्मिला के बलिदान ने लक्ष्मण को लंका की सेना में सबसे भयानक योद्धाओं में से एक को हटाने में सक्षम किया, जो अन्यथा राम और उनके अनुयायियों के लिए कांटा साबित हो सकता था।

जब मैंने पहली बार उर्मिला के बलिदान की कहानी सुनी, तो मुझे उसपर दया आई, फिर भी वह अपने पति को सुरक्षित रखने के लिए जिस हद तक गई उसके लिए मैंने उसकी सराहना की। हालांकि उसकी कहानी पृष्ठभूमि में टिकी रहती है। फिर भी यह प्रेम कहानी का एक मजबूत संकेतक है जिसकी प्रशंसा विश्वास और वफादारी के लिए की जानी चाहिए।

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