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सास की तरह खाना बनाना, पतले रहना, बच्चों की देखभाल करना…क्या विवाह में खुशी का यही रास्ता है?

दोस्त, वाइन, पर्याप्त स्पेस और दो टीवी सेट बेहतर काम करते हैं, क्रिस्टीना बताती हैं
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एक बार मैं अपने ससुराल पक्ष में एक शादी में गई। मैं मुश्किल से 22 वर्ष की थी लेकिन मेरे पास पहले ही एक नन्ही बच्ची थी।

वह एक भयानक शादी थी। सोने के लिए कोई उचित जगह नहीं थी। मेरी बेटी लगातार रो रही थी और मेरे पति मुझे नज़रंदाज़ कर रहे थे क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि लोग उन्हें ‘जोरू का गुलाम’ कहें। उस समय, मेरे पति का प्यार ही मेरे लिए सबकुछ था। तब तक मैं शराब पीने, सहेलियों, मास्टरबेशन, चुराई हुई किस आदि के आनंद से वाकिफ नहीं थी। मैं अपनी बच्ची की देखभाल करते हुए अपना समय बिताती थी और बहुत कम खाती थी क्योंकि मेरे लिए पतला रहना महत्त्वपूर्ण था। मैंने सोचा अगर मेरा वज़न बढ़ जाएगा तो मेरे पति मुझसे बहुत नाराज़ हो जाएंगे। मैंने अपने पति की माँ की तरह खाना बनाने की कोशिश की और बुरी तरह विफल हो गई। मैं एक असफल गृहणी थी। खाना बनाने की मेरी अक्षमताएं मेरे पति के परिवार में बातचीत का विषय बन गईं, खासतौर से वह टिफिन जो मैं अपने पति के लिए पैक करती थी। वह उनके परिवार में उपहास की चीज़ बन गया। मैं आत्म-सम्मान की गंभीर कमी से पीड़ित हो गई।

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जब मैं हाथों में हाथ डाले, एक दूसरे के करीब बैठे युवा जोड़ों को देखती थी तो मेरी आँखें आसूंओं से भर जाती थी और मैं सोचती थी कि मेरे साथ यह कब होगा। मेरे पति कब मुझसे मीठी-मीठी बातें करेंगे और मेरा हाथ थाम कर मेरी आँखों में झाकेंगे?

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