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ससुराल वालों के साथ रहने के फायदे और नुकसान

ससुराल वालों के साथ रहने के बारे में एक महिला का दृष्टिकोण
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सदियों पुरानी परंपराओं को 21वीं शताब्दी में भी पवित्र शासन मानने के लिए पितृसत्ता और इसकी अजीब मानसिकता को दोष दिया जा सकता है। ससुराल वालों के साथ एक ही छत के नीचे रहना और हर दिन बहू, पत्नी, और माँ की भूमिका निभाना एक महिला के लिए बहुत कठिन है।

मैं यह नहीं कह रही हूँ कि सभी ससुराल वाले बुरे हैं और उनके साथ शांतिपूर्ण संबंध होना असंभव है, लेकिन इस संबंध की गतिकी ऐसी है कि बुजु़र्गों के साथ एक सुखद रिश्ता बनाते हुए वैवाहिक जीवन को फलने-फूलने देने के लिए दूरी बनाए रखना ही बेहतर है।

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विवाह के बाद संयुक्त परिवार में रहने वाले अपने दोस्तों और अपने उदाहरणों से में कह सकती हूँ कि भले ही इसमें कुछ अच्छाइयां भी हैं, लेकिन यह व्यवस्था मुख्य रूप से तीन उद्देश्यों को पूरा करती है – यह पति के माता-पिता को एक पूरे समय देखरेख करने वाला व्यक्ति प्रदान करती है, वैवाहिक गोपनीयता की अवधारणा को एक मज़ाक में बदल देती है और एक हालिया अध्ययन के मुताबिक पत्नी में गंभीर हृदय रोग विकसित होने की संभावना को तीन गुना अधिक बढ़ा देती है।

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ससुराल वालों के साथ रहने के फायदे और नुकसान

ससुराल वालों के साथ रहने का मतलब सिर्फ दुख और उदासी नहीं है। ससुराल वालों के साथ रहने का मतलब हमेशा बुजु़र्गों के लिए नौकर होना नहीं होता, क्योंकि अक्सर इसके साथ कई फायदे भी आते हैं।

ससुराल वालों के साथ रहने के फायदे

आइये पहले अच्छी चीज़ों पर बात कर लेते हैं

1. आपके बच्चों को दादा-दादी को जानने का मौका मिलेगा

बच्चों के लिए अपने दादा-दादी को जानना बहुत महत्त्वपूर्ण है। अपने ससुराल वालों के साथ एक ही घर में रहने से मदद मिलती है। सिर्फ छुट्टियों में मिलने की बजाए, उन्हें हर दिन उनके साथ समय बिताना मिलता है।

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2. आपको पालन पोषण में बहुत मदद मिल सकती है

पैरेंटिंग के शुरूआती दिन विशेष रूप से कठिन हो सकते हैं। जब बच्चा एक जोड़े के जीवन में आता है, उसके बाद सभी जोड़ों को कई समस्याओं से गुज़रना पड़ता है। आपकी सास का आपके आसपास होने का मतलब है कि आपको कुछ वास्तविक सलाह मिल सकती है और नई ज़िम्मेदारियों को बेहतर तरीके से लेने में मदद मिल सकती है। यहां तक कि अगर आप पोस्टपर्टम ब्लूज़ की वजह से उदास महसूस कर रहे हैं, तो इससे बाहर निकलने में आपकी सास आपके पति की तुलना में बेहतर मदद कर सकती है, क्योंकि आपके पति से ज़्यादा वह इस परेशानी को समझती हैं।

3. घर पर हमेशा बच्चे की देखभाल करने वाला कोई रहता है

बेशक, आपको इस स्थिति का बहुत ज़्यादा फायदा नहीं उठाना चाहिए, लेकिन ससुराल वालों के साथ में रहने का मतलब है मुफ्त में बेबीसिटिंग करवाना। जब आप काम पर जाएं तो आपको बच्चे को किसी अजनबी की देखरेख में छोड़ने की ज़रूरत नहीं है। दादा-दादी के प्रभारी होने के साथ आपको अपने बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।

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4. घर के कामकाज में हाथ बंटाने के लिए हमेशा कोई ना कोई होता है

विवाह के बाद, खासकर जब आप एक माँ और कामकाजी महिला होने के बीच जगलिंग कर रही हों, तो अकेले सारे घर के काम निपटाना एक मुश्किल काम है। घर में अन्य वयस्क होने का मतलब है कि हर कोई घरेलू कर्तव्यों का भार साझा कर सकता है।

5. आर्थिक रूप से अच्छा है

इस वैश्विक अर्थव्यवस्था में, एक ऐसे घर में रहना एक वरदान जैसा है जहां खर्च बांटे जाते हैं। आप अकेले रहने की तुलना में यहां ज़्यादा बचत कर सकते हैं। लेकिन इस व्यवस्था की कमियां आपके समग्र विवाहित जीवन में परेशानी उत्पन्न कर सकती है।

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ससुराल वालों के साथ रहने के नुकसान

और अब बुरी चीज़ें

1. कोई गोपनीयता नहीं रहती

ससुराल वालों के साथ रहना मतलब किसी भी प्रकार की गोपनीयता नहीं होना। आप बगैर कपड़ों के खाना नहीं बना सकते, रसोई के फर्श पर सेक्स नहीं कर सकते या फिर लिविंग रूम के सोफे पर ठंडी बीयर के साथ अपने शॉर्टस् में नेटफ्लिक्स नहीं देख सकते। भले ही ये केवल क्विर्की उदाहरण हैं, अपने लिए कोई जगह ना होना वास्तव में आपके बाकी युवा जीवन के लिए मनोवैज्ञानिक बोझ बन सकता है। संयुक्त परिवार में आपको अपने साथी के साथ थोड़ा समय बिताने में भी मुश्किल आ सकती है।

2. आप पार्टी करने के लिए दोस्तों को नहीं बुला सकते

अगर आप विवाहित हैं और 20 या 30 के दशक में हैं, और ससुराल वालों के साथ रहते हैं, तो आप घर पर पार्टी रखने के बारे में सोच भी नहीं सकते। खासतौर पर अगर शादी से पहले आपके दोस्त आपके घर में पड़े रहते थे, तो इस बदलाव की वजह से आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि ससुराल वाले आपसे एक गुलाम की तरह व्यवहार करते हैं जहां आपको अपनी पसंद की जीवनशैली जीने की कोई स्वतंत्रता नहीं है।

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3. बहुत ज़्यादा अनचाही सलाह

ज़रूरत होने पर सलाह मिलना अच्छा होता है। लेकिन ससुराल वालों के साथ रहने का मतलब है कि आपको किस तरह खाना चाहिए, कितना सोना चाहिए, कैसे कपड़े पहनना चाहिए, किस तरह बर्ताव करना चाहिए और इस तरह की चीज़ों के बारे में बहुत सारी सलाह मिलेंगी! इनमें से कुछ संकेत बताते हैं कि आपके ससुराल वाले आपसे नफरत करते हैं!

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4. आप अपनी इच्छानुसार खाना नहीं बना सकते, सफाई नहीं कर सकते और घर नहीं सजा सकते

अनकहा नियम यह है कि आपकी सास घर चलाना आपसे बेहतर जानती है, इसलिए आपको एक नौकर बनने में खुश रहना चाहिए और चुपचाप उनके रास्ते पर चलना चाहिए। आप अपनी पसंद के अनुसार अपने घर का अद्भुत इंटीरीयर नहीं करवा सकते, आप एक अलग सफाई विधि का उपयोग नहीं कर सकते जो आपको ज़्यादा व्यवहारिक लगता है और आपके द्वारा बनाए गए भोजन को बहुत आलोचना प्राप्त होती है। आप सोच में पड़ जाते हैं कि आपको अपने ससुरालवालों के साथ क्यों रहना चाहिए जब आप अपनी मर्ज़ी के अनुसार कुछ कर ही नहीं सकते।

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5. आपके बच्चे के पालन पोषण में हस्तक्षेप

हर लाभ कुछ शर्तों के साथ आता है। पेरेंटिंग कर्तव्यों में आपकी मदद के लिए ससुराल वालों के होने का मतलब यह भी है कि आपके बच्चे को पालने के बारे में बहुत सी बिन मांगी सलाह भी मिलेंगी। आपकी सास को अपने आप पर गर्व है कि उन्होंने अपने बेटे को किस तरह पाला है और वह चाहती है कि आप भी उनके नक्शेकदम पर चलें, भले ही उनका अधिकांश ज्ञान इस पीढ़ी पर लागू नहीं होता।

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ससुराल वालों के साथ रहना एक बुरा विचार क्यों है?

हर विवाहित जोड़े को अपने संबंध को समझने और साथियों के रूप में एक साथ जीवन बनाने के लिए स्पेस की ज़रूरत होती है। लेकिन जब जोड़ा ससुराल वालों के साथ रहता है, तो विवाह में अपनी इच्छा से शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी गोपनीयता नहीं होती है, हस्तक्षेप के बिना जीवन के महत्त्वपूर्ण निर्णयों के बारे में तो भूल ही जाओ।

इसके अलावा, एक नवविवाहित महिला एक ऐसे स्थान का सपना देखती है जिसे वह घर कह सकती है और उसे अपने पसंद की विचित्र और कलात्मक सामग्री के साथ सजा सकती है। लेकिन ससुराल वालों के साथ रहने का मतलब है एक ऐसे माहौल में प्रवेश करना जो पहले ही स्थापित हो चुका है और बहू से उम्मीद की जाती है कि मानदंडों को स्वीकार करें और तदनुसार एडजेस्ट करे।

यह कहीं ना कहीं ऐसा है जैसे अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ होस्टल में रहना। क्या यह उचित है? विवाह के बाद ससुराल वालों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करने का मतलब है कि वह अपनी पसंद के कपड़े नहीं पहन सकती है, अपनी पसंद का खाना नहीं बना सकती है, अपनी पसंद की जीवनशैली को बिना किसी हस्तक्षेप के जी नहीं सकती है।

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क्या हो अगर जोड़़े की बहुत बड़ी बहस हो और पत्नी बेडरूम में धीरे-धीरे फुसफुसाने की बजाए लिविंग रूम में झगड़ा जारी रखना चाहे? देखिए, वह ऐसा नहीं कर सकती है, क्योंकि अपने तरीके से मामले को सुलझाने के लिए ससुराल वाले पति-पत्नी के बीच कूद पडेंगे (जिसमें 10 में से 9 बार वे यह कहेंगे कि पत्नी गलत है और हमेशा की तरह उनका बेटा सही है)। इससे शादी में क्या मदद होगी?

एक महिला जीवन के अगले चरण में उदासी के साथ प्रवेश करती है, अपने पति के साथ नया जीवन शुरू करने की अनुमानित खुशी की प्रतिक्षा करते हुए। लेकिन कुछ नया केवल रिक्त कैनवास पर शुरू हो सकता है। ससुराल वालों के साथ रहना उस संभावना को पूरी तरह बिखेर देता है और अक्सर जोड़ों को इतना नुकसान पहुंचाता है कि उसकी मरम्मत होना मुश्किल है।

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