सीटी बजाने, छेड़छाड और उत्पीड़न के अन्य तरीकों से कैसे निपटें

कैटकॉलिंग (टिप्पणी करना), वोल्फविस्लिंग (सीटी बजाना), कभी सोचा है कि इन शब्दों में पशु उपसर्ग क्यों है? ये सड़क पर होने वाले उत्पीड़न को दिए गए नाम हैं जिनका सामना हज़ारों या शायद लाखों स्त्रियां और लड़कियां हर रोज़ करती हैं जब वे घर से बाहर कदम रखती हैं। इस प्रकार के यौन हमले सड़क पर मनुष्यों के रूप में घूमने वाले भयानक जानवरों द्वारा किए जाते हैं। श्रेणियां छेड़ने वालों से लेकर उत्पीड़न करने वालों तक विस्तृत हो सकती है, और परिमाण चश्मिश बुलाने से लेकर सीटी बजाने या चुंबन की आवाज़ निकालने, ज़बरदस्ती छूने, उत्पीड़न करने और अत्यंत चरम मामले में बलात्कार करने तक भी हो सकता है।

कैटकॉल, जैसा कि इसे शहरी शब्दकोष द्वारा परिभाषित किया जाता है, ध्यान प्राप्त करने और भविष्य में संबंध बनाने की आशा के उद्देश्य से सीटी बजाना या चिल्लाना है। लेकिन अधिकांश उत्पीड़क यह भूल जाते हैं कि 99.9 प्रतिशत ऐसी हरकतें किसी संबंध में नहीं बदलती हैं।

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हमारे देश में अधिकांश स्त्रियों ने अपने जीवन में किसी प्रकार के यौन उत्पीड़न का सामना ज़रूर किया होगा और जब हम यह पढ़ रहे हैं, कई तो अब भी इससे लड़ रही होंगी।

यह किसी उम्र, पृष्ठभूमि या लिंग (एलजीबीटी पढ़ें) और निश्चित रूप से रूपरंग तक सीमित नहीं है। इन सब नारी द्वेशियों के मन का भ्रम है कि यह एक तरह की तारीफ है या फिर अपने मन की बात कहने का उनका अधिकार है। लेकिन अस्वीकृति का सामना करने पर, वे तेजाब फैंकने जैसी चरम सीमाओं तक भी जा सकते हैं, जो ना केवल त्वचा को बल्कि आत्मा को भी जला देती है।

युवा से शुरूआत

एक 12 वर्ष की लड़की अपने जन्मदिन पर नए कपड़े खरीदने के लिए अपनी दादी के साथ बाज़ार जा रही थी। जैसे ही वे ऑटोरिक्शा से बाहर निकले और दुकान के दरवाज़े की ओर बढ़ने लगे, उसने कुछ मीटर दूर खड़ी बाइक पर बैठे एक लड़के को सीटी बजाते और उसकी ओर मुस्कुराते हुए देखा। उसने हैरानी से दादी को देखा और पूछा, ‘‘क्या हम इसे जानते हैं दादी? वह हँस क्यों रहा है?’’ अवसर तलाश रहे गुंडो की दुनिया में यह उसका पहला कदम था। दादी ने उसका हाथ कस कर पकड़ा और कहा ‘‘उसकी तरफ मत देखो, और भविष्य में ऐसी आवाज़ों पर ध्यान मत देना।”

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उसने कुछ मीटर दूर खड़ी बाइक पर बैठे एक लड़के को सीटी बजाते और उसकी ओर मुस्कुराते हुए देखा।
उसकी तरफ मत देखो, और भविष्य में ऐसी आवाज़ों पर ध्यान मत देना

काम पर भी जारी रहना

कॉर्पोरेट जगत में काम करना उसका सपना था, लेकिन यह मुश्किल था। 26 वर्षीय सारा ने अपनी बिज़नेस स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली और अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए वह तैयार थी। उसने यह किया ज़रूर, लेकिन निरंतर अवांछित टिप्पणियों के साथ। यह टिप्पणियां उसके पुरूष सहकर्मियों द्वारा उसके कपड़ों के लिए हो सकती थी (कपड़ों के भीतर झांकती नज़रों के साथ) और स्त्री सहकर्मियों द्वारा चुगली और तानों के साथ ईर्ष्या भरी नज़रें जो उसकी क्षमताओं पर शक करती थीं और उसकी उपलब्धियों को अनुचित उपकार का परिणाम बताती थीं। यह स्थिति सिर्फ कॉर्पोरेट तक ही सीमित नहीं है, यह किसी भी क्षेत्र में हो सकती है जिसमें मानव जाति शामिल है जो स्वयं के टकराव का समाधान नहीं कर पाई है और अपनी कमियों का प्रदर्शन करने के लिए बाहर स्त्रोत ढूंढती है। ये अहानिकारक घटनाएं लग सकती हैं, लेकिन इतनी छोटी भी नहीं है कि नज़रअंदाज की जा सके।

बद से बदतर होती जा रही है

जिन्होंने इसके गंभीर रूप का सामना किया है, वे बदतर हालात से गुज़री हैं, शारीरिक रचना पर टिप्पणी करने, पीछा किए जाने, और बलात्कार या तेजाब हमले की शिकार होने के साथ उन्हें घटिया/फूहड़ स्त्री भी बुलाया गया है। इस अपराध की त्रासदी यह है कि यह कभी कभार ही देखने वालों द्वारा प्रतिक्रिया या प्रतिफल उत्पन्न करता है। सड़कों पर उत्पीड़न के ऐसे अनगिनत मामले हैं। अधिकांश स्त्रियां इस बात पर चिंता व्यक्त करती हैं कि छेड़छाड़ किस तरह बढ़कर उत्पीड़न में बदल जाती है जो प्रकृति में भयावह हो सकते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं जो इसे जीवन के एक अनिवार्य भाग के रूप में स्वीकार कर के खुश हैं। आंकड़े प्रदान करने के लिए अनगिनत ऐसे लेख, कहानियां, साक्षात्कार हैं जो यह कहते हैं कि भारत स्त्रियों के लिए एक सुरक्षित देश नहीं है। लेकिन क्यों?

बद से बदतर होती जा रही है
सड़कों पर उत्पीड़न के ऐसे अनगिनत मामले हैं

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उत्पीड़न पीड़ितों के लिए कानूनी आधार

हालांकि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कानून यदा कदा ही जादू की छड़ी की तरह काम करते हैं। इसकी बजाए, ऐसी उच्च दंडनीय दर होनी चाहिए जो ऐसे लोगों के दिमाग में दंड और उत्पीड़न का खतरा पैदा कर सके। दंड, अपराध की गंभीरता के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए। भारतीय दंड संहिताओं में निर्भया मामले के बाद 2013 से 2016 तक कुछ सुधार किए गए हैं। एफआईआर दायर करते समय इनके बारे में जागरूक होना पीड़ित की मदद कर सकता है।

धारा 354 (ए)

कोई भी शारीरिक संपर्क, अवांछित और प्रकट यौन प्रस्ताव वाले कृत्य; यौन उपकार की मांग या अनुरोध; एक स्त्री की इच्छा के बगैर पोर्न दिखाना; या कामुक टिप्पणियां करने वाला पुरूष, यौन उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा। इसके परिणामस्वरूप 3 वर्ष तक की कठिन सज़ा हो सकती है।

धारा 209

किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य, दूसरे को खीज दिलाने के लिए अश्लील गीत गाना। इससे तीन महीने की कैद, या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

धारा 509

एक स्त्री के सतीत्व का अपमान करने के इरादे से कुछ कहना या करना। इससे एक वर्ष तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

कुछ करीए

कुछ करीए
इस तरह की घटनाओं के मूकदर्शक ना बने।

इस तरह की घटनाओं के मूकदर्शक ना बने। जब तक कानून अपना मार्ग तय नहीं कर लेता, तब तक हस्तक्षेप की निरंतरता बरकरार रख कर सताए जाने के इस कृत्य को खत्म करें। यह किसी भी रूप (मौखिक/गैर-मौखिक), किसी भी तरीके (अपराधी और पीड़ित के बीच खड़े रहने के लिए पुलिस, सुरक्षाकर्मी को बुलाना) और सभी लोगों को शामिल करना हो सकता है। हर स्थिति में एक ऐसा चरण आता है जब कोई हस्तक्षेप करके इस उत्पीड़न को रोक सकता है। पीड़ित से पूछना ‘‘क्या तुम ठीक हो?’’ ‘‘तुम्हें किसी मदद की ज़रूरत है?’’ उसे खड़ा होने की शक्ति देगा और वह अकेला नहीं महसूस करेगी। अन्य मूकदर्शकों को भी अस्वीकार करने में शामिल होने के लिए एकत्र कीजिए। एक ऐसी संस्कृति बनाएं जो स्त्रियों के विरूद्ध हिंसा को चुपचाप अनदेखा ना करती हो, बल्कि इस तरह के अपराध को रोकने के लिए सक्रिय रूप से उन्हें सशक्त बनाने में सहायता करती हो ।

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