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सेक्स रहित विवाह के बारे में आप जानना चाहते हैं लेकिन पूछने से डरते हैं

क्या कोई व्यक्ति इस आधार पर तलाक या ऐनल्मन्ट फाइल कर सकता है कि उसका साथी सेक्स रोक रहा है या उनके साथ सेक्स क्रिया में भाग नहीं ले रहा है?
Sexless Marriage

जैसा आरती पाठक को बताया गया

पुरूषों के अधिकार की कार्यकर्ता शोनी कपूर ने हमें बताया है कि सेक्सहीन विवाह क्या होता है और क्या ऐनल्मन्ट या तलाक फाइल करने के लिए इस स्थिति का उपयोग किया जा सकता है।

एक सेक्सहीन शादी क्या है?

एक विवाह जिसमें जोड़े ने कभी सेक्स नहीं किया है या जहां जोड़े की यौन गतिविधि लंबे समय से पूरी तरह बंद हो गई है उसे सेक्सरहित विवाह कहा जाता है।

विवाह और सेक्स

एक विवाह इस समझ और उम्मीद के साथ आता है कि थोड़े समय में यौन संबंध स्थापित हो जाएगा। यौन गतिविधि एक ऐसी गतिविधि है जिसमें जोड़े विशिष्ट रूप से एक दूसरे के साथ शामिल होते हैं, चाहे संतान प्राप्त करनी हो या अन्यथा। घर चलाने, बच्चों को पालने या यात्रा पर जाने के विपरीत, सेक्स एक ऐसी चीज़ है जो एक विवाह में पति और पत्नी सिर्फ एक दूसरे के साथ कर सकते हैं। जब यौन गतिविधि विवाह में स्थायी रूप से अनुपस्थित होती है, कानूनी तौर पर यह तलाक के लिए एक आधार होता है (हालांकि इसे अदालत में साबित करना होगा)।

सेक्सहीन विवाह के संभावित कारण क्या हैं?

o पुरूष नपुंसकता, जो ऐनल्मन्ट करने के लिए मान्यता प्राप्त आधारों में से एक है

o महिला नपुंसकता – हालांकि यह असंभव प्रतीत होता है, कुछ मामलों में यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा माना जाता है और इसलिए ऐनल्मन्ट के लिए आधार के रूप में स्वीकार किया जाता है।

o साथी को दंडित करने के लिए सेक्स से स्थायी परहेज़

o आध्यात्मिक कारण, लंबे समय की बिमारी, साथी से आकर्षित नहीं होने की वजह से सेक्स से परहेज़

o एक जोड़ा पारस्परिक रूप से प्लेटोनिक जीवन जीने का फैसला कर सकता है

तलाक के लिए यह कब आधार बनता है?

जब यह क्रूर होता है तब यह तलाक के लिए आधार बन जाता है।

जस्टिस विजया कापसे- ताहिलरमानी और जस्टिस पीएन देशमुख ने कहा कि ‘‘विवाहित जीवन में सेक्स एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे अन्य कारकों से अलग नहीं किया जा सकता है जो विवाह में सुख और पूर्ति की भावना लाते हैं।” सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अगर एक सामान्य स्वास्थ्य वाले व्यक्ति ने अपने साथी के साथ सेक्स करने से इंकार कर दिया, तो उसका साथी पीड़ा और निराशा से गुज़रेगा और यह मानसिक क्रूरता के अधीन होने के समान है। बैंच ने कहा, ‘‘(शैलेश के) सबूत कि नैना ने उसके साथ शारीरिक संबंधों से परहेज़ किया, यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि वह मानसिक क्रूरता के अधीन था।”

कानूनी रूप से कहें तो

हिंदू विवाह अधिनियम और मुस्लिम विवाह अधिनियम दोनों ही पुरूष नपुंसकता को ऐनल्मन्ट का एक आधार मानते हैं (अगर वे कानूनी तौर पर पति-पत्नी हैं)। महिला नपुंसकता को भी पहचाना जाता है और यह भी ऐनल्मन्ट का आधार हो सकता है।

अगर किसी भी कारण से यौन गतिविधि से परहेज़ एक अस्थायी मामला है, तो यह तलाक का आधार नहीं है। हालांकि, अगर सेक्स से परहेज़ विवाह में स्थायी स्थिति है और साथी को यातना देने के लिए इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो यह तलाक का आधार बन जाता है। अदालत यह सबूत मांगेगी कि साथी इसके लिए परामर्श का विरोध कर रहा है और फिर बात को वहां से आगे बढ़ाएगी।

प्यार की कहानियां जो आपका मैं मोह ले

मैं निम्नलिखित कारणों से एक सेक्स रहित विवाह में हूँ, क्या मुझे तलाक फाइल करना चाहिए?

1. मेरी पत्नी मुझे यातना देने के लिए एक हथियार के रूप में सेक्स को रोक रही है।

2. मेरे पति ने धार्मिक कारणों से सेक्स करना छोड़ दिया है

3. मेरा साथी नपुंसक है

4. मेरे साथी की बिमारी ने उसे हमेशा के लिए यौन गतिविधि में असमर्थ बना दिया है

5. मेरा साथी मुझे यौन रूप से असंतुष्ट छोड़ देता है….आदि।

अगर मैं सेक्स रहित विवाह में हूँ तो क्या मुझे तलाक/ ऐनल्मन्ट फाइल करना चाहिए?

कोई भी किसी व्यक्ति के लिए इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता है। यह हर व्यक्ति, हर जोड़े पर निर्भर करता है। एक विवाह को अनगिनत कारण प्रभावित करते हैं और तलाक को भी। उदाहरण के लिए, प्यार और संपर्क की गहराई जो एक जोड़ा साझा करता है, एक व्यक्ति द्वारा महसूस की जाने वाली यौन कुंठा, उस व्यक्ति के लिए सेक्स कितना महत्त्वपूर्ण है, क्या वह अदालत में यह साबित करने में सक्षम होगा कि विवाह वास्तव में सेक्सहीन है, क्या जोड़े की कोई संतान है, आदि…

और सेक्सहीन विवाह का कारण क्या है? अगर साथी का सेक्स से परहेज़ या सेक्स की अनुपस्थिति शादी के बाद किसी बिमारी की वजह से है, तो यह तलाक का आधार नहीं होगा। कुछ प्रकार के कैंसर नपुंसकता पैदा कर सकते हैं, इसलिए वह भी ऐनल्मन्ट/ तलाक का आधार नहीं होगा।

आगे क्या करना है केवल इस तरह के मामलों से निपटने वाले सक्षम व्यक्ति के साथ बैठकर व्यक्ति द्वारा स्वयं ही तय किया जा सकता है।

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