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सेक्स तब और अब

एक ऐसा समाज जो सेक्स का उत्सव मनाता था से लेकर वह जिसने उसे दबाया और वह जिसने फिर से खुलना शुरू कर दिया, भारत ने एक लंबा सफर तय किया है
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जब मैं अपनी किशोरावस्था में थी, टेलिफोन की घंटी का तेज स्वर मेरी दिल की धड़कन बढ़ा दिया करता था – शायद, हो सकता है शायद (भगवान करे) वह मेरा हाल फिलहाल का क्रश हो…..

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उस समय, पूरा परिवार अपने प्रसंगों को पूरा करने के लिए केवल एक लैंडलाइन पर निर्भर रहता था – प्रेम वाले भी और दिनचर्या के भी। और अगर लैंडलाइन खराब हो जाए (जैसा अक्सर होता रहता था), तो मेरा लगभग अस्तित्वहीन प्रेम जीवन भी खराब हो जाता था (भले ही किशोरावस्था के हार्मोन हो या नहीं, कामक विचारों पर ध्यान नहीं देना चाहिए)। ऐसा कहना भी कम होगा कि तब से अब तक बहुत कुछ बदल गया है।

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हमारा देश सेक्स का कीर्तिगान गाया करता था। दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक अजंता गुफाओं के चित्रों में सुंदर स्त्रियों को नग्न रूप में दिखाया गया है। 5वी से 10वी शताब्दी के बीच एलोरा गुफाओं में भी कामुक कला का चित्रण किया गया है। 9वी और 12वी शताब्दी के बीच खजुराहो मंदिर की मूर्तियां सेक्स का आनंद ले रही हैं -थ्रीसम से लेकर व्यभिचार और वहशीता तक। स्पष्ट रूप से सेक्स छुपाने का विषय नहीं था। सेक्स आनंद मनाने की वस्तु थी ना कि बंद दरवाजों के पीछे छुपाने की।

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लेकिन यह सब बदलने वाला था। 14वी शताब्दी के आसपास मुगल आ गए थे। अब स्त्रियों को ढंक-छुप कर निरीक्षण की दृष्टि से बचना होता था।

अंग्रेज़ों के आने के साथ वस्तुएं बदतर हो गईं जिन्होंने उनके नैतिक मूल्यों को हम पर थोपने की ठान ली। और इसलिए हमने सेक्स से किनारा कर लिया। और नग्नता को प्रतिकूल दृष्टि से देखने लगे।

जहां बाकी दुनिया हिप्पियों के साथ यौन स्वतंत्रता समझ रही थी, 70 के दशक में भारत में युवा पुरूष और स्त्रियाँ परिवार के साथ विवाह कर रहे थे एक दूसरे के साथ नहीं, और प्यार के लिए तो बिल्कुल नहीं। सेक्स का उद्देश्य प्रजनन था सुख नहीं।

फिर 90 का दशक आया और अर्थव्यवस्था खुल गई। और एमटीवी शुरू हो गया। युवाओं का उत्साह, कुलबुलाते आकर्षक, युवा बदन, कामुक कपड़े, आसान खिंचाव….देशभर के लड़के लड़कियां मंत्रमुगध हो गए थे। एक पीढ़ी जो पहले ही डेटिंग और डिस्को हॉपिंग कर रही थी उसने सेक्स के प्रति खुले रवैये को आसानी से ग्रहण कर लिया।

एमटीवी और अंतर्राष्ट्रिय टीवी कार्यक्रमों के साथ इंटरनेट भी आया। अचानक ही, युवाओं के लिए एक निजी प्रेम जीवन और सेक्स जीवन होना आसान हो गया। साइबर कैफे में चोरी-छुपे सेक्स किया जा रहा था जहां कुछ ही रूपयों के लिए पोर्नोग्राफी पहुंच के अंदर थी।

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डेटिंग और डिस्को हौपिंग वाले बच्चे सेक्स के प्रति खुले थे Image Source

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सेल फोन के शुरू होने के साथ वस्तुएं और तीव्र हो गई थीं। कामोत्तेजक मैसेज, और ज़्यादा कामोत्तेजक फोन कॉल, बहुत ज़्यादा सेक्स।

संबंध बनाना इससे अधिक आसान पहले कभी नहीं रहा। और मुझसे विपरीत, युवा किशोर ना केवल कामुक विचारों को ग्रहण कर रहे थे बल्कि उसमें स्वतंत्रता से सम्मिलित भी हो रहे थे।

उदाहरणः दीक्षा का फोन धीरे से घुरघुराता है। धुंधली आखों के साथ वह उसे उठाती है। उसकी धड़कन रूक जाती है।

आकाशः हाय। कैसी हो तुम?

दीक्षा मुस्कुराती है।

आकाश उसका ब्वायफ्रेंड नहीं है। वह वो है जिसे मधुर शब्दों में ‘फ्रेंड्स विथ बेनिफिट्स’ (ऐसा मित्र जिसके साथ शारीरिक संबंध हों) कहा जाता है। लाभ में बेहिचक, उन्मुक्त और असंलग्न सेक्स शामिल है। गर्म, पसीने वाला, शानदार सेक्स। केवल सेक्स के आनंद के लिए सेक्स।

दीक्षा 30 के आसपास की आयु वाली स्त्री है। और केवल आनंद के लिए सेक्स करने वालों में वही एकमात्र नहीं है। उसके कई एकल और कुछ विवाहित मित्र भी यह करते हैं। सेक्स ने वापसी की है और तकनीक के साथ, एकल, विवाहित और ‘इट्स काँप्लिकेटेड’ संबंधों वाले सभी लोग शयनकक्ष तक जाने में खुश हैं।

एक ऑनलाइन समाचार पोर्टल पर एक विवाह चिकित्सक और मनोचिकित्सक का कहना है, ‘‘पांच वर्ष पहले की तुलना में आज जो बेवफाई के मामले मेरे पास आते हैं, उनमें 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।”

इन दिनों जोड़े अधिक महत्त्वाकांक्षी हैं -उन्हें वह उच्च वर्गीय जीवनशैली चाहिए जो वे अपने आसपास देखते हैं, उनके पसंदीदा टीवी कार्यक्रमों में, उनके मित्रों के फेसबुक/इंस्टाग्राम पोस्टों में। वहां तक पहुंचने की हुल्लड़ में, कभी-कभी विवाहेतर संबंध गुज़ारा करने का माध्यम बन जाते हैं, विवाह के बोझ और उसकी अपेक्षाओं के बगैर।

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और सेक्स अब केवल वयस्कों का विशेषाधिकार नहीं है। अधिक से अधिक किशोर इसमें शामिल हो रहे हैं।

4जी पीढ़ी के पास अब ना केवल लैपटॉप और आईपैड तक पहुंच उपलब्ध है, बल्कि उत्तम संपर्क के साथ सेल फोन तक भी। साइबर सेक्स, फोन सेक्स और पुराना सामान्य वैनिला सेक्स, सेल्फी पीढ़ी बेझिझक होकर प्रयोग कर रही है। देशभर के कैफे नाममात्र के वयस्क बच्चों से भरे पड़े हैं जो निर्लज्ज होकर एक दूसरे को रिझा रहे हैं। कॉफी और सेलफोन, और कभी-कभी सिगरेट के साथ वे पार्टियों की योजनाएं बनाते हैं और पार्टियों के बाद संबंध बनाने के लिए फोन का सहारा लेते हैं। वे कम विशेषधिकार वाले जो हाथ में हाथ डाले शॉपिंग मॉल में घूमते हैं, कुछ निजी समय बिताने के लिए सुनसान बगीचों और स्मारकों में पहुंच जाते हैं।

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और कार्यालयों में बैठी सहस्त्राब्दी पीढ़ी भी उत्सुक है। बेशक वे कड़ी मेहनत करते हैं। लेकिन वे आनन्द भी ज़्यादा लेते हैं। ऐसे रियालिटी कार्यक्रम जो डेटिंग के साथ संबंध तोड़ने के विषय में भी है, को देखकर बड़ा होने के कारण वे सहकर्मियों से संबंध स्थापित कर लेते हैं, जो आमतौर पर एक प्रोजेक्ट, जिस पर वे काम कर रहे हैं, के समाप्त होने जितने कम समय तक टिकते हैं। हालांकि शारीरिक संबंध स्थापित करने के लिए इतना समय पर्याप्त है।

अब एक संबंध में सेक्स उतना ही महत्त्वपूर्ण हो गया है जितना प्यार। कोई भी शादी करने की जल्दी में नहीं है और शादी से पूर्व का सेक्स लगभग बहुत सहजता से लिया जा रहा है। एक व्यक्ति के साथ बंधन में बंधने से पहले, युवा कई संबंध बनाते हैं, और इसके बावजूद ज़रूरी नहीं कि यह टिके। दूसरा संबंध बस एक एैप की दूरी पर है।

उसे आघात पहुंचा था और वह सेक्स से डरता था, लेकिन उसने ठीक होने में उसकी सहायता की

विवाह से बाहर किसी दोस्त में प्यार पाना

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