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शादी के लिए मैं जब इन दिलचस्प लड़कों से मिली

वो बताती है की अरेंज्ड मैरिज करने के चक्कर में उसका पाला कैसे कैसे लड़कों से पड़ा...
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इंडिया में अरेंज्ड मैरिज के रिंक में एक बहुत ही अजीब सी फीलिंग होती है, बस आप अपने आप से हताश होने ही वाले होते हो. मगर धीरे धीरे आपको यूँ रिजेक्ट होने की आदत पड़ने लगती है. यह किसी आईपीएल से कम रोमांचक खेल नहीं होता. हर कोई अपने साथ एक लिस्ट लेकर चलता है जिसमे उसकी पसंद नापसंद लिखी होती है. उस चेकलिस्ट में एक टिक और आप गेम से बाहर.

तो मैंने भी अपनी खोज एक चेकलिस्ट से शुरू की थी, जिसमे लिखा था: रोमांचक, दिलचस्प, सुन्दर, और तमीज़दार. धीरे धीरे मेरी लिस्ट बदल के हो गई: लीचड़ न हो, बॉसी न हो और बेवक़ूफ़ न हो. खैर, सच कहूँ तो उस लिस्ट से इस लिस्ट तक के सफर में मैंने कुछ बड़े ही मज़ेदार पल भी बिताये.

चश्मे वाला लड़का

मेरी आँखें के स्क्लेरा का रंग हल्का नीला है और डॉक्टर की माने तो यह कोई ख़ास अच्छी बात नहीं है. तो खैर, मुझे इस लड़के से एक पास के कैफ़े में मिलना था. हमारी वार्तालाप कुछ ऐसी हुई:

वो: अरे वाह! तुमने तो कांटेक्ट लेंस लगाए हैं.

मैं: क्या? नहीं, नहीं. मेरी आँखें तो बिलकुल ठीक हैं.

वो: अच्छा! मुझे असल में वो नीली दिखीं.

मैं: वो नीला भागमेरा स्क्लेरा है. लेंस हम आईरिस पे पहनते हैं.

इसके बाद हम दोनों एक अजीब सी भेदने वाली शान्ति में चले गए और करीब दस मिनट तक चुपचाप रहे. उसके बात करने की शुरुवाती ढंग से मैं काफी खिन्न हो गई थी, मगर आज भी उस दिन को याद करके बहुत हंसती हूँ.

मज़ाक करने वाला लड़का

हम एक क्रेप के आउटलेट पर मिले.

वो:आप तो शाकाहारी हो न?

मैं: हाँ

वो गया और कुछ ऐसा ले आया जो मैंने पहले कभी नहीं खाया था.

मुझे चिढ़ाने के अंदाज़ में उसने कहा: ओह! सो सॉरी। मैं तो भूल ही गया की आप शाकाहारी हो. मैं तो आपके लिए चिकेन ले आया.

उसे लग रहा था की वो बहुत अच्छा मज़ाक कर रहा है. तभी मैंने उसे डब्बे पे बने लाल गोले को दिखाया. उसकी शक्ल देखने वाली थी उस समय.

वो: सो सॉरी. मुझे लगा मैं मज़ाक कर रहा हूँ मगर मैं गलती से चिकन ही ले आया.

मैं:अब मज़ाक आप पर है.

जिसके पिता को मैं पसंद आयी

मेरे ही बैच के एक लड़के ने एक शादी की साइट पर मुझ में दिलचस्पी दिखाई और मुझे “इंटरेस्टेड” का मैसेज भेजा. जब मैंने फेसबुक पर उसे मैसेज कर के कन्फर्म किया तो वो तुरंत ही मुकर गया. पता चला की उसके पिता उसकी शादी का प्रोफाइल देखते हैं और वहीं हज़ारों लड़कियों मेंआई मेरी भी प्रोफाइल उनके बेटे के लिए.

अगले दिन उसने मुझे फिर मैसेज कर के पुछा की अब जब उसके पिता ने इंटरेस्ट दिखा ही दिया है, तो वो भी जानना चाहेगा की मेरा जवाब क्या है. जवाब में मैंने कहा, “प्लीज अपने पापा को मेरी तरफ से नो बोल देना।”

कहना न होगा उसने उसी समय मुझे अपनी फ्रेंड लिस्ट से भी बेदखल कर दिया.

वो लड़का जो मेरा भाई निकला

इसे मैं अपनी ज़िन्दगी का यक़ीनन सबसे शर्मनाक हादसा कह सकती हूँ. मेरी माँ का परिवार बहुत ही बड़ा है. उनके सारे ममेरे चचेरे भाई बहन अलग अलग देशों में करीब करीब पूरी दुनियाभर में ही फैले हुए हैं. लिहाज़ा मेरा उन सब से मिलना कोई दस साल में एक बार ही होता है.

हुआ यूँ की मुझे एक शादी की वेबसाइट में एक लड़का पसंद आया. उसकी प्रोफाइल अच्छी थी, उम्र करीब करीब मेरे जैसी ही थी. पता नहीं क्यों मगर उसकी शक्ल मुझे कुछ जानी पहचानी सी भी लग रही थी. उसके जन्म का स्थान और मेरी माँ का जन्मस्थान एक ही था. मैं थोड़ी उत्सुक हो गई. अगले दिन माँ से पुछा की उस देश में उनके कौन कौन से रिश्तेदार रहते हैं. काफी खोजबीन के बाद पता चला की वो मेरा कजिन ही था. और इंस्टाग्राम के कई फ़िल्टर का कमाल ही कहिये की मैं उसे इतनी फेसबुक की फोटो में देख कर भी नहीं पहचान पाई.

वो अहम् वाला लड़का

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इस घटना के कई दिनों बाद तक मुझे भर भर के नफरत भरे ईमेल आते थे और ईमेल को बिलकुल फुल कर दिया था.

इस लड़के ने मुझे एक शादी की साइट पर देखा और मुझमे दिलचस्पी दिखाई. वो एक नामीगिरामी कंपनी में कार्यरत था और उसका प्रोफाइल भी अच्छा खासा था. हमने थोड़ी बहुत गूगल पर बातें की. मुझे वो बहुत ही खोखला और घमंडी लगा और मैंने फैसला किया की उससे बात आगे नहीं बढ़ाऊँगी.

उसके मेल इतने अधिक आते थे की अंत में मुझे उसके मेल को डिलीट करने के लिए एक फ़िल्टर लगाना पड़ा. मेरा एक दूसरा ईमेल भी है जिसे मैं कम ही देखती हूँ. पिछली दफा जब देखा था, तो उसमे उस लड़के के १३ मेल दिखे और ये उसे रिजेक्ट करने के एक हफ्ते बाद की ही बात है.

वो लड़का जिसे अब भी अपनी एक्स से प्यार था

वो लड़का बहुत मधुरभाषी था, देखने में भी अच्छा ख़ासा था और हमारी कई बातों में जमने लगी. यहाँ तक तो सब ठीक था. हमने कई बार चैट भी करीऔर फिर अपनी दोस्ती को दुसरे स्तर पर ले जाने के लिए हम फेसबुक पर भी दोस्त बन गए.

मगर ये क्या था? उसे उसकी गर्लफ्रेंड ने चार साल पहले छोड़ दिया था मगर आज भी उसकी याद में डूबा था. उसके फेसबुक पर सिर्फ जुदाई के शेर और कविता भरे हुए थे. तो मैंने उससे पूछ ही लिए की अगर वो इतना दुखी था, तो अरेंज्ड मैरिज के लिए तैयार क्यों हुआ था. इस पर उसने कहा की वो तो बस ईमानदारी से अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहा है. अब ईमानदार होना एक बात होती है और इस तरह किसी में झूठी दिलचस्पी दिखाना और.

मुझे उसे भी अपनी लिस्ट से बेदखल करना पड़ा.

ये ज़रूर बताना चाहूंगी की इस घटना के बाद मुझे अब फेसबुक से प्यार हो गया है.

वो लड़का जो बकवास में ग्रेजुएट था

मोबाइल पर हमारी बातचीत

वो: तुम्हे कैसे लड़का चाहिए बॉयफ्रेंड मटेरियल या पति मटेरियल

मैं: सीमेंट और स्टील जैसा

वो: एक खीजी सी इमोजी भेजता है.

शायद उसके इतना संजीदा सवाल पर मेरे मज़ाकिया जवाब से वो खिन्न हो गया.

वो नौकरी वाला लड़का

हम दोनों के बीच की ऑनलाइन बातचीत कुछ ऐसी थी:

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मैं: तो तुम काम कहाँ करते हो?

वो: वो एक अमेरिकन कंपनी है बैंगलोर में.

मैं: अच्छा

वो: हमारा क्लाइंट बेस काफी बड़ा है. फलाना फलाना कंपनी भी हमारे क्लाइंट हैं. हम शोध…….. “(फिर उसने एक लम्बा पारा लिख भेजा अपनी कंपनी के व्याख्या करने के लिए).

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मैं: वाह! ये तो बहुत शानदार लगता है.

वो:मगर मुझे अपने काम से नफरत है.

मैं: अच्छा. वैसे तुमने क्या बताया? तुम किस कंपनी के लिए काम करते हो?

वो: बताया था न एक अमेरिकन कंपनी है बैंगलोर में.

भगवान् की दया से मेरी शादी एक बहुत ही अच्छे इंसान से हो गई है और शुक्र मनाती हूँ की ये लव मैरिज है. अगर अरेंज्ड मैरिज ही करनी होती, तो मेरा क्या होता!

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