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शादी के तीन साल बाद पति ने मुझे अचानक अपनी ज़िन्दगी से ब्लॉक कर दिया

मैं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हूँ मगर मानसिक तौर पर बिलकुल टूट चुकी हूँ..
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प्रश्न
मेरी ये दूसरी शादी है. मेरी उम्र ३८ साल है और मेरे पति ३३ साल के हैं. हमारी शादी हम दोनों के परिवारों की मर्ज़ी से फरवरी २०१४ में हुई थी. हमारी एक १२ साल की बेटी भी है. हमारी शादी के बाद के कुछ साल बहुत ही सुखद थे, सब कुछ बिलकुल सही चल रहा था. मगर उस समय भी बहुत कम ही बाहर घूमने जाते थे या कहीं बाहर खाने खाने निकलते थे. हम हमेशा उसकी ही स्पोर्ट्स और कोचिंग में बिजी रहते थे. फिर मुझे खुद नहीं पता की कहाँ क्या गलत हो गया और मेरे पति ने घर आना बंद कर दिया. वो अचानक अपनी माँ के साथ रहने लगा और मेरे फ़ोन कॉल लेना भी उसने बंद कर दिया. ये सब जून २०१७ में शुरू हुआ. उसने मुझे अपने फेसबुक, व्हाट्सप्प से ब्लॉक कर दिया, मेरा नंबर तक उसने ब्लॉक कर दिया. अब मेरे पास उससे सीधा संपर्क करने का कोई चारा ही नहीं बचा था. दोनों पक्षों के घरवालों ने भी उससे बात की और उसे समझने की कोशिश की, मगर वो सबको बस यही कहता है की अब वो मुझे वापस अपनी ज़िन्दगी में नहीं चाहता है. मैंने उससे बात करने की बहुत बार कोशिश की है, उससे माफ़ी मांगी है, रोयी गिड़गिड़ाई हूँ. मैं उससे जब भी उससे अपनी गलती पूछती हूँ, वो बहुत पुरानी पुरानी बातें उठाने लगता है. अजीब बात ये है की जब की घटनाएं वो बताता है, उस समय तो इन बातों को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था, फिर अचानक अब क्यों यह मुद्दा बन गए हैं.

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मैं बुरी तरह टूट चुकी हूँ. ज़िन्दगी ने एक बार मुझसे सब कुछ छीन लिया था. अब दोबारा सब कुछ नहीं खोना चाहती. इन सब बातों को, और उसे मुझसे अलग रहते कई महीने हो चुके हैं. वो कहता है की उसकी ज़िन्दगी में कोई दूसरी स्त्री नहीं है और वो बस शान्ति से रहना चाहता है. अब हमारी बातें बहुत कम होती हैं, और वो भी तब जब कोई काम आ जाए. उसकी अधिकतर चीज़ें अब हमारे घर पर नहीं नहीं. मैं एक किराये की फ्लैट में रहती हूँ और क्योंकि मेरी नौकरी है, मैं आर्थिक रूप से सुरक्षित हूँ. मगर मानसिक तौर पर मैं बहुत टूट चुकी हूँ. कृपया मुझे बताएं की मैं किस तरह अपने पति को अपने जीवन में वापस ला सकती हूँ. मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ.

स्निग्धा मिस्त्र कहती हैं:

मैं समझ सकती हूँ की इस समय आपकी मनोदशा क्या होगी. मगर इस बात से मुकरा नहीं जा सकता की किसी भी रिश्ते की कामयाबी में दो लोगों का हाथ होता है. अगर आपके पति इस शादी में कोई योगदान नहीं देना और इस रिश्ते को ख़त्म करना चाहते हैं, तो फिर बात करके की कोई हल निकल सकता है. मगर जैसा आपने बताया, आपके मामले में ये भी काम नहीं कर रहा. मेरी समझ के हिसाब से आप आगे का रास्ता जानना चाहती हैं और अपने पति को अपनी ज़िन्दगी में वापस चाहती हैं. है न?

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चीज़ों को सुधारने के लिए सबसे पहले ये ज़रूरी है की आपदोनो आपस में बातचीत करो. हो सके तो आप अपने पति से बात करें और किसी मैरिज काउंसिलर से मिलें. शायद आप दोनों उससे बातें करके के अपनी मुश्किलों और दिक्कतों को बेहतर समझ पाओगे. आप माफ़ी न मांगे और न ही रोये गिडगिडाएँ. क्योंकि ऐसा करके आप आप उसे और खुद को ये बता रहे हो की जो भी हो, गलती तो आपकी ही है. क्यों? क्यों औरतें हमेशा अपनी गलती ही मान कर चलती हैं. आपकी शादी टूट रही है क्योंकि आपके पति अलग हो रहे हैं, आप नहीं तो प्लीज अपने आप को दोष देना बंद करें.

मैं आपसे एक और बात पूछना चाहूंगी. आपको ऐसा क्यों लगता है की आप एक और टूटी शादी नहीं सेह पाएंगी? क्या आप पहले भी एक बार ऐसे दौर से नहीं गुज़री और खुद को उस स्तिथि से उबारा भी? इस बार आप अकेली नहीं हैं. आपकी एक बारह साल की बेटी है जिसके आपके प्यार और समय की भरपूर ज़रुरत है. आप आर्थिक रूप से आत्म निर्भर हैं और आप इतनी सक्षम हैं की आप अपनी और अपनी बेटी का पूरा ध्यान रख सकती हैं.आप क्यों किसी पुरुष के सामने गिड़गिड़ाएंगी की वो आपको अपना ले जबकि वो ऐसा नहीं करना चाहता? क्या बेहतर नहीं होगा की आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहे जो आपको सम्मान देता हों और आपके साथ रहना चाहता हो? ये भी सोचे की क्या सचमुच अपने जीवन में एक पुरुष का साथ इतना ज़रूरी है?

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अब बात करते हैं आपकी दूसरी इच्छा की जो है अपने पति को अपने जीवन में वापस लाना. मैं यहाँ आपको एक बात बहुत साफ़ शब्दों में कहूँगी, माफ़ कीजियेगा मगर ये काम कोई नहीं कर सकता. आप दोनों दो व्यस्क लोग थे जिन्होंने साथ रहने का सोचा समझा फैसला लिया था. अगर आगे जाकर एक साथी इस रिश्ते से निकलना चाहता है, तो उस परिस्तिथि में कोई कुछ नहीं कर सकता. आप किसी को ज़बरदस्ती किसी रिश्ते में नहीं बाँध सकते हैं.

मैं समझ सकती हूँ की ये मानना आपके लिए बहुत ही कष्टप्रद होगा मगर इस समय आपके लिए सबसे अच्छा होगा की आप इस रिश्ते के दरवाज़े बंद कर लें. आपको किसी मनोचिकित्सक से मिलने चाहिए और मदद लेनी चाहिए. एक सलाहकार आपको सही दिशा देंगे और आपकी वर्तमान मानसिक परिस्तिथि में आपको एक सही और संतुलित मार्ग दिखाएंगे.

अपना ध्यान रखें और अगर आगे भी मार्गदर्शन में मदद चाहिए तो हमें फिर से लिखें.

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