जब जीवनसाथी से मन उचटा तो इंटरनेट पर साथी ढूंढा

Abhijit Gadre
Hands-on-Keyboard

(पहचान छुपाने के लिए नामों को बदला गया है)

कोई बेहतर शब्द नहीं है विवरण के लिए, इसलिए कहूंगा कि उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी बासी हो रही थी. कितनी बासी, मैं किसी मनोचिकित्सक की तरह नहीं बता सकता, कितनी बासी, मैं किसी कवि की तरह कोई दिलचस्प उपमा भी देने में असमर्थ हूँ. हाँ, मैं ये तो कह सकता हूँ कि दो दिन पुरानी ब्रेड सी बासी हो गई थी उनकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी. जैसा कि अमूमन देखा गया है, उसे यह सब खटक रहा था. उसे अपनी ज़िन्दगी में कुछ नयी तरंगो की तलाश थी.

वो एक बहुत ही सफल व्यवसायक था और उसकी पत्नी एक समझदार सुलझी हुई स्त्री. सब कुछ त्रुटिहीन था, शायद कुछ ज़्यादा ही सही था सब कुछ.

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उसका काम जैसे जैसे फ़ैल रहा था, उसकी व्यावसायिक ज़रूरतें भी बढ़ रही थी. जैसे अब उसका काम मात्र टाइपिस्ट से नहीं चल सकता था. उसे अब ज़रुरत थी इस ऑनलाइन दुनिया में लोगों से ताल्लुक़ रखने की. तो उसने आनन् फानन एक बिलकुल मॉडर्न कंप्यूटर लिया, एक युवक को बुलाया और सीखने लगा कंप्यूटर का इस्तेमाल. बिलकुल जादुई सी थी कंप्यूटर की स्पीड. वो पलक झपकते ही अपने ग्राहकों और सहकर्मियों को सारी ज़रूरी बातें बता सकता था. वो जितना कंप्यूटर सीख रहा था, उतना ही अचंभित भी हो रहा था. उस मशीन ने जैसे उसे अपने मोहजाल में जकड़ लिया था. अब उसकी ज़िन्दगी में इस कंप्यूटर से ज़्यादा कोई अज़ीज़ नहीं रह गया था. धर्मपत्नी भी शांत थी क्योंकि पति अपने काम में लगे थे, व्यवसाय और सफल हो रहा था. हाँ इन सब के एवज़ में पति पत्नी के बीच अब कोई शारीरिक सम्बन्ध नहीं हो पाते थे. होते भी कैसे, पति देर रात तक कंप्यूटर पर काम जो करते थे.

ऐसे ही एक रात जब वो कंप्यूटर पर काम कर रहा था, अचानक क्लिक क्लिक करते वो याहू के चैट रूम में पहुंच गया. उसके लिए ये तो एक बहुत ही सुनहरा मौका था कमसीन युवतियों से दोस्ती गाठने का. इस विचार भर से वो बहुत उत्तेजित हो गया. मगर कुछ दिन यु ही इधर उधर की बातें करके उसका मन अब इस चैट रूम से भी उकताने लगा था. अब उसे कुछ अंतरंग बातें करने वाले की तलाश थी.

ऐसी ही एक तलाश में उसे लक्ष्मी मिली. दोनों ने एक दुसरे के बारे में जानकारियां दी. लक्ष्मी के पति जहाज़ पर काम करते थे और अक्सर बाहर ही रहते थे. उसने भी बताया कि यूं तो वो भी शादीशुदा है मगर उसकी शादी में अब कोई जान नहीं. बातों का सिलसिला धीरे धीरे बढ़ने लगा और दोनों हर तरह की बातें करते, हास परिहास करते और एक दुसरे का ये ऑनलाइन साथ काफी पसंद करने लगे.

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कई बार सालो बाद अपने पुराने भूले प्यार से मिल कर काफी मदद मिलती है वर्त्तमान को, जैसा ही इस महिला को लगा सोशल मीडिया पर अपने पूराने प्यार को पा कर.

उनके सम्बन्ध की सबसे विस्मरणीय बात थी उनकी बातों के विषय. वह “आर्ट ऑफ़ लिविंग” और सुदर्शन क्रिया जैसे विषयों पर घंटों बातें करते थे.

असल में वो अपनी असली ज़िन्दगी में इतने उलझे और परेशां थे की इन बिलकुल ही गुमशुदा और बेमेल विषय उन्हें जोड़ने में कामयाब हो गए.वो अपने पति से परेशां थी और यह अपनी पत्नी से बेमानी.

उन दोनों ने अब तक इतनी बातें कर ली थी की प्रेमियों की श्रेणी में आने के लिए बिलकुल योग्य थे. तो बस फिर क्या था. दोनों ने आख़िरकार मिलने का इरादा कर ही लिया.

क्योंकि उसका पति साल के ग्यारह महीने समुद्र पर ही होता था, उसने उसे अपने घर आमंत्रित किया. मुलाकात के शुरू के पल बड़े झिझकते गुज़रे, फिर दोनों ने शराब के घूँट भरे और फिर उसकी आड़ में झिझक और शर्म छोड़ दी. दो प्यासे प्रेमियों की तरह एक दुसरे में वह खो गए. नए स्पर्श, नयी भीने खुशबुएं, सब कुछ नया लगा और इसलिए बहुत ही उत्तेजक भी. उनके बीच का सेक्स उन दोनों के लिए बहुत नशीला था और उनकी पहली मुलाकात दूसरी तीसरी में बदलती गई. एक दुसरे का हर स्पर्श, अधरों की गर्माहट… सब कुछ उन्हें मदहोश करने वाला था.

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सब कुछ अच्छा ही चल रहा थी कि एक दिन उसने फ़ोन किया और अपने प्रेमी को आईन्दा मिलने से मन कर दिया.

अब वो यह सब ख़त्म करना चाहती थी. ठीक ही तो था. उसे भी ख़ास बुरा नहीं लगा. आखिर एक चैटरूम से शुरू हुआ एक प्रेम प्रसंग दो सालों तक चलना अपने आप में काफी थी.

वो समझ रहा था. आज भी वो समझता है कि क्यों सब तब तक चला जब तक चला. मगर आज भी वो ये नहीं समझ पाता कि जो उन दोनों के बीच में था क्या था. क्या वो प्यार था या फिर बस एक बहुत ही रोचक अनुभव?

मेरे दोस्त ने मुझे अपने घर बुलाया और मुझे उसकी पत्नी से प्यार हो गया

पूर्वनिर्धारित अंतरंगता भी संतोषप्रद हो सकती है

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