शादीशुदा हो कर भी उसे एक वेट्रेस से प्यार हो गया, जो वैश्या भी थी

Atish Chowdhury
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पिछले हफ्ते मैं अपने स्कूल के एक पुराने मित्र पंकज से मिलने गया. पंकज एक बहुत बड़ी कंपनी में इंजीनियर था और काम के सिलसिले में अक्सर विदेश यात्रा पर जाता रहता था. पंकज हमेशा ही एक खुशमिज़ाज़ व्यक्तित्व का मालिक रहा है. जब भी मिलता है, ज़िंदादिली से मुस्कुराता है. मगर हाल ही की उसकी अमेरिका की ट्रिप के बाद से वो बहुत उदास रहने लगा था. मैं उसके इस परिवर्तन के पीछे की वजह जानने के लिए उसके घर पहुंचा.

घर पर उसकी पत्नी कविता ने बहुत अच्छे से मेरा स्वागत किया, और फिर मुझे और पंकज को ड्राइंग रूम में बातें करते छोड़ अंदर चली गयी. पंकज ने बताया कि उसे वापस आये तीन दिन हो गए हैं, मगर वो तब से ऑफिस नहीं जा रहा.

“क्या किसी दिक्कत में हो पंकज? काम कैसा चल रहा है?” मैंने पंकज से पुछा.

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एक हिला देने वाला सच

जवाब में पंकज ने जो कहा, उससे मेरे पैरों तले ज़मीन निकल गई.

“बात काम की नहीं है. अभी हाल में जब अमेरिका गया था, तब कुछ हुआ. असल में मुझे प्यार हो गया,” पंकज ने कहा.

“काश कभी तुम्हें मुझसे भी प्यार हो जाता,” कविता हाथ में चाय और नाश्ता लिए, मुस्कुराते hue बोली. सकपकाते पंकज ने बात घूमाते हुए बोला, “वहां, उस शहर, के पूरे वातावरण और मौसम से प्यार हो गया मुझे.”

चाय की चुस्कियां लेते हुए, मैंने पंकज से पूरी बात बताने को कहा. “मुझे वहीं एक लड़की से प्यार हो गया.”

“असल में उसी कांफ्रेंस में एक वेट्रेस थी जिसने हमें लंच परोसा. मैंने उसे धन्यवाद किया, मगर लगा कि वो मुझे कुछ कहना चाह रही थी. मैंने उससे थोड़ी बातें की और अगले दिन मिलने का तय किया,” पंकज ने बताना शुरू किया.

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“और फिर क्या हुआ?” मैंने बहुत आतुर हो कर पुछा.

वो एक कॉल गर्ल थी

उसी रात जब मैं होटल वापस जा रहा था, मैंने उसे रोड के उस पार खड़े देखा. उसने बहुत कामुक शर्ट पहनी थी और साथ में एक काफी छोटी सी स्कर्ट. मैं बिलकुल सकते में आ गया. एक इतने बड़े होटल की कर्मचारी आधी रात इस तरह क्यों खड़ी है, मैंने सोचा,” पंकज ने बताना शुरू किया.

“जब मैं उसके पास पहुंचा और पुछा तो बहुत झिझकते हुए उसने बताया रात के अँधेरे में वो एक कॉल गर्ल बन जाती है.

सच कहूँ तो सुन कर मैं बहुत सकते में आ गया. उसे क्या ज़रुरत थी इस पेशे कि जबकि उसकी एक अच्छी खासी नौकरी थी.”

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“मेरे माता पिता काफी पहले ही इस दुनिया से गुज़र गए और पीछे छोड़ गए मुझे और मुझसे छोटी तीन बेटियां. मेरी तीनो बहनों की ज़िम्मेदारी मैंने ही ले ली और खुद से ये वायदा किया कि इन्हें पढ़ाऊंगी और इनकी ज़िन्दगी सवारूंगी,” उसने बताया.

“मैं उसे लेकर पास के एक फ़ूड प्लाजा में बैठ गया. आस पास के लोग हमें बहुत अजीब नज़रों से देख रहे थे. अब मैं चाहता हूँ की किसी तरह मैं उसे भारत ले आओ और उसके अतीत से निकाल कर यहाँ उसे एक इज़्ज़त भरी ज़िन्दगी दूँ. हमारी थोड़ी सी मुलाक़ातों में ही मैंने महसूस किया है कि वो मुझे अपने बाकी क्लाइंट्स की तरह नहीं देखती है.

“खैर उस रात डिनर के बाद हमारी दोस्ती और गहरी हो गई. अगले दिन फिर से अपनी मीटिंग के बाद मैं उससे मिला और हम दोनों ने घूमते फिरते बहुत अच्छा समय बिताया एक दुसरे के साथ.”

“मैं उसे घर लाना चाहता हूँ”

“वापस आने से पहले मैं जब उससे मिला, मैंने उस बहुत सारे पैसे देने चाहे. मगर उसने कुछ भी लेने से साफ़ मन कर दिया. वो मुझसे कहने लगी’ अगर कुछ करना है, तो प्लीज आप मेरी ज़िन्दगी बेहतर करने में मेरी मदद करें. मैं आप जैसे अच्छे शरीफ इंसान से मिलने के बाद अब फिर उस दलदल में वापस नहीं जाना चाहती. मैं पढ़ कर अपने लिए एक अच्छी ज़िन्दगी चाहती हूँ. मैं इस शहर से निकल कर, आपके साथ इंडिया जा कर एक नयी दुनिया बसाना चाहती हूँ. ‘

“मुझे पता है कि किसी को मेरी बात का यकीन नहीं होगा मगर मैं जानता हूँ कि यह प्यार है. मुझे उससे प्यार हो गया है. मैं एक बार कुछ निश्चय कर लेता हूँ तो उससे डगमगाता नहीं हूँ. तो अगर मैं कह रहा हूँ कि यह प्यार है, तो मान लो कि यह प्यार ही है. अब बस मुझे ये बताओ कि मैं आगे क्या करूँ,” पंकज ने मुझसे पुछा.

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पंकज जैसे इंसान के मुँह से ऐसी बातें सुन कर मैं बहुत आश्चर्यचकित हो गया था. कॉलेज के दिनों में इस पंकज ने ना जाने कितनी लड़कियों के प्यार के ठुकराया था जब तक उसके परिवार ने उसकी शादी अनीता से तय न की थी.

“क्या तुम्हे सचमुच लगता है कि ये प्यार है? हो सकता है न कि एक आकर्षण मात्र ही था जो देश बदलते धीरे धीरे खुद ही धूमिल हो जायेगा. और फिर, कविता? उसके बारे में क्या सोचा है? वो तुम्हारी पत्नी है?”

मैंने बहुत सोच कर पंकज को यह सब समझने कि कोशिश की.

“मेरी शादी तय की गयी थी, मगर प्रेम मेरा निर्णय है”

“यह विचार मात्र कि उसके जैसी प्यारी लड़की पता नहीं किस तरह के असभ्य अयाश लोगों के स्पर्श को बर्दाश्त कर रही होगी, मुझे बहुत परेशां कर देता है. कोई भी लड़की इस पेशे में अपनी स्वीकृति या मर्ज़ी से नहीं जाती है. वो उसकी मजबूरी ही होती है. और दूसरी बात ये है कि कविता मेरे माता पिता की पसंद थी, मेरी नहीं. इसमें मेरी कोई गलती नहीं कि मुझे इस पड़ाव पर पहली बार प्यार हुआ और वो भी एक कॉलगर्ल के साथ. अब मुझे बताओ कि मैं क्या करूँ?”

मैं यह सब सुन कर चुप ही रहा. करता भी तो क्या? बहुत सारे सवालों के साथ मैं पंकज के घर से निकल गया.

“अगर उसे अरेंज्ड मैरिज में विश्वास नहीं था, तो उसने शादी के लिए हाँ क्यों किया था? और कविता? वो क्यों सब कुछ सहे जबकि उसकी कोई गलती भी नहीं है? ”

और क्या पंकज सच में उस लड़की से प्यार करने लगा था या सिर्फ भावनात्मक आकर्षण था दोनों के बीच? पंकज उसके घर का पता तक नहीं जानता तो क्या वो फिर उस गली में खड़े उसका इंतज़ार करेगा? शायद कोई ये सब सुने तो इसे सिर्फ वासना ही समझे मगर मैं पंकज को बचपन से जानता हूँ. मैंने उसकी आखों में सच्चे प्यार की झलक देखी है. वो कभी भी क्षणिक मोह में विश्वास नहीं करता है. वो तो सच्चे प्रेम के इंतज़ार में रहता था हमेशा.

वो मिले, एक दुसरे से बातें की और पंकज उसकी दुखभरी ज़िन्दगी की कहानी सुन कर उससे प्रेम कर बैठा. क्या यह संभव है?

आप इन सब के बारे में क्या सोचते हैं? आप पंकज को जानते तो क्या सलाह देते? हमें नीचे टिपण्णी में ज़रूर बताएं.

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