स्ट्रेट लोगों को गे लोगों के बारे में ये 10 गलतफहमियां हैं

स्ट्रेट लोग गे लोगों को पर्याप्त रूप से नहीं जानते हैं

यह समस्या उससे कहीं ज़्यादा गहरी है जितनी यह दिखती है। ये विषम मानदंड सिखाए जाने पर, यह बेहद असंभव है कि कई स्ट्रेट लोगों को समलैंगिक समुदाय को अच्छे से समझने का मौका मिला हो।

जहां स्ट्रेट (हेट्रोसेक्सुअल) लोग आम तौर पर गे लोगों के बारे में झूठ और गलत धारणाओं की परवाह नहीं करते, इसने होमोफोबिया को जन्म दिया है। जहां कई लोग ‘सेक्स’ को ‘लिंग’ के साथ कन्फ्यूज़ करते हैं, अन्य लोगों को गे होना संक्रामक लगता है। यह हास्यास्पद है जब स्ट्रेट लोगों को उचित एक्पोज़र मिलने पर वे जान जाते हैं कि ये मिथक कितने गलत हैं।

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भले ही यह कितना भी मनहूस लगे, इन मिथकों को अब तक तोड़ा नहीं गया है। लेकिन किया यह जा सकता है कि लोगों को एक व्यापक तरीके से शिक्षित किया जाए, उन पर दबाव डाले बगैर ताकि उन्हें असहज ना लगे। जहां इनमें से कई लोगों की सदाचार संबंधी तर्क देने की संभावना है, उन्हें याद दिलाना चाहिए कि भारत में किस तरह हमेशा से ही समावेशी संस्कृति का प्रयोग होता आया है। साहित्य में होमोएरोटिसिज़म और ऐसी चीज़ें पाई गई हैं और इन्हें सामान्य माना जाता था।

शीर्ष 10 मिथक जो स्ट्रेट लोग गे लोगों के बारे में मानते हैं

ये किसी की भी समझ से परे है कि ये मिथक कैसे उत्पन्न हुए लेकिन हम यहां ये चर्चा नहीं करने वाले हैं। स्ट्रेट लोगों को गे लोगों के बारे में ये 10 गलतफहमियां हैं

1. गे पुरूष स्त्रियों जैसे होते हैं

नारीत्व और मर्दानगी ये दो रेखाएं हैं या बल्कि बाइनरीज़ हैं जो विषम अनुरूपताओं का निर्माण करते हैं। ये बाइनरीज़ ना केवल पितृसत्तात्मक कंडीशनिंग द्वारा निर्धारित की जाती हैं बल्कि इस हद तक प्रतिकूल है कि पुरूषों में नारीत्व होने से उन्हें गे मान लिया जाता है। क्वियर स्पेक्ट्रम लिंग बाइनरी की पारंपरिक सीमाओं से परे है, नारीत्व हमेशा गे होने के गुणों को इंगित नहीं करता है।

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2. लेस्बियन के बाल छोटे होते हैं (बॉय कट)

ये मिथक स्ट्रेट लोगों के दिमाग की उपज है जहां वे ऐसे मिथकों को मानते हैं और उन पर कार्य करते हैं। ज़रूरी नहीं है कि लेस्बियन के बॉय कट हों और अगर हों भी, तब भी आप ऐसा अनुमान नहीं लगा सकते।

लेस्बियन के बाल छोटे होते हैं
लेस्बियन के बाल छोटे होते हैं

3. गे लोग अविवेकी होते हैं

अविवेकी होना एक मानव तथ्य है जो किसी के सेक्सुअल ओरिएंटेशन के अनुसार होना ज़रूरी नहीं है। जहां कई गे लोग यौन रूप से सक्रिय होते हैं, अन्य नहीं होते। यह सोचना भी एक बेतुकी अवधारणा है कि गे लोग स्ट्रेट लोगों की तुलना में यौन रूप से ज़्यादा सक्रिय हैं। आखिर मोनोगोमी एक चयन योग्य चीज़ है!

4. लेकिन पत्नी कौन है?

जेंडर भूमिकाएं स्ट्रेट लोगों के दिमाग में इतनी गहरी हैं कि वे अपनी कंडीशनिंग के अनुसार सब कुछ सीमित कर देते हैं। होमोसेक्सुअल संबंधों में भी ऐसी कोई मूलभूत भूमिकाएं नहीं है जो आपको जेंडर रोल के लिए निभानी होंगी। लेकिन यह स्ट्रेट संबंधों में भी सही नहीं है। गे लोग तदनुसार प्रभावशाली, विनम्र और बहुमुखी हो सकते हैं।

5. गे लोगों की संतान नहीं होती है

गे लोगों के बच्चे होते हैं और वे या तो गोद लेते हैं या सेरोगेसी जैसे वैकल्पिक तरीकों का उपयोग करते हैं। और नहीं, सिर्फ इसलिए कि उनके माता-पिता गे हैं, ज़रूरी नहीं कि उनके बच्चे गे हों। बल्कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो इसके विपरीत को साबित कर सके।

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गे लोगों की संतान नहीं होती है
गे लोगों की संतान नहीं होती है

6. गे लोगों के सामान्य संबंध नहीं हो सकते हैं

यह दुखद है कि स्ट्रेट लोगों की रूचि अनुसार ‘सामान्य’ पहले ही तय कर लिया गया है। गे लोगों के स्वस्थ, कार्य करने वाले संबंध होते हैं जो ज़रूरी नहीं कि मोनोगोमस हों लेकिन निश्चित रूप से टिपिकल स्ट्रेट परिवार जैसे दिखते हैं, अगर इस मिथक में यही निहित है तो।

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7. गे लोग अपनी कामुकता शान से दिखाते हैं

अगर हाथ पकड़ना या सार्वजनिक रूप से अंतरंग होना गलत है तो स्ट्रेट लोगों को भी अपनी कामुकता प्रदर्शित नहीं करनी चाहिए।

8. गे लोगों को सेक्स के दौरान प्रिकोशन की ज़रूरत नहीं होती है

गे लोगों को सेक्स के दौरान प्रिकोशन की ज़रूरत नहीं होती है
गे लोगों को सेक्स के दौरान प्रिकोशन की ज़रूरत नहीं होती है

उन्हें ज़रूरत होती है! भले ही आपका सेक्सुअल ओरियेंटेशन कुछ भी हो आपको प्रिकोशन की ज़रूरत होती है। एसटीआई और एसटीडी से बचने की संभावनाओं को रोकने के लिए प्रोटेक्शन ज़रूरी है।

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9. गे लोग स्ट्रेट लोगों को भी गे बना सकते हैं

या तो आप जन्म से गे होते हैं या नहीं होते हैं। आप किसी को गे बना नहीं सकते हैं। यह बिल्कुल बेतुकी बात है।

10. गे लोग सेक्स नहीं कर सकते हैं

अगली बार जब आपसे कोई यह कहे, उन्हें एक वीडियो दिखाएं कि यह किस तरह किया जाता है

दुखद सत्य

बढ़ती उम्र में उचित यौन शिक्षा और संवेदीकरण की कमी ने ये मिथक उत्पन्न् किए हैं जो ना केवल क्वीयर समुदाय के लिए एक समस्या है लेकिन स्ट्रेट लोगों के बीच कई अवांछित गर्भधारण या यौन रोगों का भी कारण हैं। ये मिथक समाज में गहराई से बैठे होमोफोबिया का एक सबूत है जो ना केवल एक समस्या है बल्कि हर किसी के लिए खतरनाक भी है।

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