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स्ट्रेट लोगों को गे लोगों के बारे में ये 10 गलतफहमियां हैं

स्ट्रेट लोगों में संवेदीकरण की कमी के कारण वे गे लोगों के बारे में इन 10 मिथकों को सही मानते हैं जो गलत और होमोफोबिक हैं।
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स्ट्रेट लोग गे लोगों को पर्याप्त रूप से नहीं जानते हैं

यह समस्या उससे कहीं ज़्यादा गहरी है जितनी यह दिखती है। ये विषम मानदंड सिखाए जाने पर, यह बेहद असंभव है कि कई स्ट्रेट लोगों को समलैंगिक समुदाय को अच्छे से समझने का मौका मिला हो।

जहां स्ट्रेट (हेट्रोसेक्सुअल) लोग आम तौर पर गे लोगों के बारे में झूठ और गलत धारणाओं की परवाह नहीं करते, इसने होमोफोबिया को जन्म दिया है। जहां कई लोग ‘सेक्स’ को ‘लिंग’ के साथ कन्फ्यूज़ करते हैं, अन्य लोगों को गे होना संक्रामक लगता है। यह हास्यास्पद है जब स्ट्रेट लोगों को उचित एक्पोज़र मिलने पर वे जान जाते हैं कि ये मिथक कितने गलत हैं।

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भले ही यह कितना भी मनहूस लगे, इन मिथकों को अब तक तोड़ा नहीं गया है। लेकिन किया यह जा सकता है कि लोगों को एक व्यापक तरीके से शिक्षित किया जाए, उन पर दबाव डाले बगैर ताकि उन्हें असहज ना लगे। जहां इनमें से कई लोगों की सदाचार संबंधी तर्क देने की संभावना है, उन्हें याद दिलाना चाहिए कि भारत में किस तरह हमेशा से ही समावेशी संस्कृति का प्रयोग होता आया है। साहित्य में होमोएरोटिसिज़म और ऐसी चीज़ें पाई गई हैं और इन्हें सामान्य माना जाता था।

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