स्त्रियाँ अब भी यह स्वीकार करने में शर्मिंदगी क्यों महसूस करती हैं कि वे हस्तमैथुन करती हैं

Neelu Singh
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हमारी धरती जो कभी कामसूत्र का स्थान रही थी, सेक्स के बारे में बात करने को लेकर पुनः जागृत हो रही है, एक प्रश्न जो अब भी शर्म उत्पन्न करता है वह है हस्तमैथुन। विशेष रूप से महिलाओं के संबंध में। इंटरट्यूब्स में देखने पर आप भारतीय पुरूषों और लड़को पर लक्ष्यित शैक्षणिक वीडीयो पाएंगे। स्त्रियों की आत्म सहायता?….क्रिकेट। उदाहरणः कामुकता के बारे में दो एआईबी वीडीयो, एक पुरूषों के लिए और एक स्त्रियों के लिए। मेन्स बेस्ट फ्रेंड पुरूष हस्तमैथुन के विषय में है; ए वुमन्स बेस्टीज़ असुरक्षित सेक्स और मासिक धर्म के बारे में है!

एक भारतीय लड़की से पूछें कि क्या वह स्वयं को संतुष्ट करती है और आपको उत्तर मिलेगा अ) चकित होते हुए ना कहना, ब) असहमति के साथ कंधा उचकाना, स) झूठी बहादुरी के साथ एक शर्मिंदगी भरा ‘हाँ’। हम सामान्य ‘‘मैं करती हूँ” से कई कोसों दूर हैं।

पश्चिम में, जैसे-जैसे समझ बढ़ रही है और शर्म कम हो रही है, अधिक महिलाएं उनकी आत्म संतुष्टि की दिनचर्या के बारे में बात करने की इच्छुक हैं। अमेरिका में अब 92 प्रतिशत महिलाएं कहती हैं कि वे हस्तमैथुन के लिए समय निकालती हैं, 74 प्रतिशत की तुलना में, जब पिछली बार यह सर्वेक्षण 1979 में करवाया गया था।

एकमात्र भारतीय आँकड़े जो मुझे प्राप्त हुए वे ये थेः शोधकर्ताओं ने महाविद्यालय की पहले वर्ष में अध्ययनरत छात्राओं, जिन्होंने स्वयं का परिचय ‘वर्जिन’ के तौर पर दिया, से पूछा और जाना कि हस्तमैथुन करने वाली 30 प्रतिशत लड़कियां हस्तमैथुन के संबंध मे ग्लानी, चिंता, और शर्म महसूस करती हैं।

इस आँकड़े का अनुकरण करते हुए, डॉ. अवनी तिवारी, मेट्रो अस्पताल, नोएडा (कृपया बोनबोलॉजी में उनकी प्रोफाइल देखें) में मनोचिकित्सक और सेक्सोलोजिस्ट, कहती हैं कि स्त्रियों में हस्तमैथुन की आवृत्ति विभिन्न शोधों में 20-70 प्रतिशत तक वरियता लिए होती है। जागरूकता का आभाव, शर्मिंदगी और सांस्कृतिक प्रतिबंध ‘अंडररिपोर्टिंग’ में एक निर्णायक भूमिका निभाता है।

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मुख्य शब्द ग्लानी और शर्म हैं। एक ऐसे समाज में जहाँ यह कहना कि आपकी यौन आवश्यकताएं हैं स्वतः ही यह साबित कर देता है कि आप नैतिक रूप से भ्रष्ट हैं और सम्मान के योग्य नहीं हैं, वहां आत्म-संतुष्टि को स्वीकार करना और भी अधिक जोखिम भरा है और एक बहुत बड़ी ना है।

लेकिन शायद प्राचीन भारत में यह परिस्थिति इतनी बुरी नहीं थी। नमूने के रूप में गाथा सप्तशती की यह कविता, जो 200 बीसीई और 200 सीई के मध्य संकलित की गई।

अपनी बंद आँखों से

वह उसे अपने मन में बिस्तर पर लाई,

फिर सब कुछ अपने हाथों से किया

जब तक की उसकी खनकती चूड़ियाँ ढीली ना पड़ गई।

डॉ तिवारी के अनुसार, साहित्य, मूर्तिकला, और अन्य कला जो स्त्री की आत्म -संतुष्टि दर्शातीं हैं उनमें भारत का एक समृद्ध प्राचीन इतिहास है। मध्य युग में यह खो गया था क्योंकि राजनैतिक परिदृश्यों के बदलने के कारण कई सामाजिक प्रतिबंध और पाबंदियां आ गई थीं। और स्त्री हस्तमैथुन, राजनीति आधारित परिवर्तनों के सबसे बड़े शिकारों में से एक प्रतीत होता है।

लेकिन शायद समय बदल रहा है। डॉ. तिवारी विवरण देती हैं कि मीडीया एक्सपोज़र के कारण जागरूकता का स्तर बढ़ रहा है। स्त्रियाँ प्रश्न करने लगी हैं। वे स्वयं के शरीरों को और आत्म-संतुष्टि के आनंद को जानने लगी हैं। कामुकता के फोरम में, प्रश्न जैसे ‘‘क्या स्त्रियाँ हस्तमैथुन करती हैं? कैसे? नियमित रूप से उठते हैं।

यहाँ एक वैज्ञानिक दस्तावेज़ से स्त्री हस्तमैथुन की बुनियादी बातों की सही जानकारी हैं (सत्यनारायण राव टी एस, नागराज एएम। स्त्री कामुकता। भारतीय जे मनःचिकित्सा 2015;57, एसयूपीपीएल एस2:296-302)

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आमतौर पर स्त्रियाँ मोन्स और क्लिटोरल क्षेत्र में आगे-पीछे, ऊपर-नीचे और घुमावदार हलचल करने के लिए उनके हाथ और उंगलियों का उपयोग करती हैं। उनमें से अधिकांश अतिसंवेदनशीलता के कारण क्लिटोरिस की ग्लान्स के प्रत्यक्ष उत्तेजन से बचती हैं। कुछ स्त्रियाँ क्लिटोरिस को बिस्तर या तकिये जैसी वस्तुओं के साथ रगड़ती हैं, अन्य स्त्रियाँ जांघों को रगड़कर और पेल्विक फ्लोर मांसपेशियां जो योनीमुख के नीचे होती हैं को छेड़कर चरमोत्कर्श प्राप्त करती हैं। पोर्नोंग्राफी में जो दर्शाया जाता है उसके वितरीत, चरमोत्कर्श तक पहुँचने के लिए योनी प्रवेशन आम नहीं है। कुछ स्त्रियाँ केवल वक्षों को दबाकर और कुछ (2 प्रतिशत) कल्पना कर के ही चरमोत्कर्श तक पहुँच जाती है। कुछ लोग अतिरिक्त आनंद और वरीयता के लिए वाइब्रेटर्स का इस्तेमाल करते हैं। आमतौर पर हस्तमैथुन करते हुए चरमोत्कर्श प्राप्त करने के लिए स्त्रियों को 4 मिनट से कम समय की आवश्यकता होती है।

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आमतौर पर स्त्रियों को 4 मिनट से कम की आवश्यकता होती है Image Source

डॉ. तिवारी आगे कहती हैं कि स्त्रियाँ, चरमोत्कर्श प्राप्त करने के लिए सभी शारीरिक अंगों और सभी इंद्रियों और साथ ही कल्पना का उपयोग करने के लिए जानी जाती हैं। लैंगिक विज्ञान के अग्रदूतों में से एक अल्फ्रेड चार्ल्स किंसे ने कहा है, ‘‘सभी गतिविधियों में से, हस्तमैथुन, हालांकि, वह है जिसमें स्त्रियाँ सबसे अधिक बार चरमोत्कर्श तक पहुँचती हैं।”

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लेकिन हस्तमैथुन केवल अकेले स्वप्नलोक का आनंद लेने के विषय में ही नहीं है।

शोध बताते हैं कि जो स्त्रियाँ नियमित रूप से हस्तमैथुन करती हैं, वे रजोनिवृत्ति के लक्षणों में कमी का अनुभव करती हैं, बेहतर मनोदशा और एक बेहतर शारीरिक छवि का आनंद प्राप्त करती हैं। आत्मसम्मान और समग्र यौन संतुष्टि को भी एक बहुत आवश्यक बढ़ावा मिलता है।

साथ ही, यह सुरक्षित और व्यवहारिक है। सुरक्षित, क्योंकि स्वयं आनंद लेने के कारण आपको संक्रमण नहीं हो सकता (जब तक कि आप खिलौनों का उपयोग नहीं कर रहे हों और उन्हें गंदा नहीं रखते हों)। व्यवहारिक, क्योंकि यह काम करने के लिए पूरी तरह एक साथी पर निर्भर होना स्वयं को कुण्ठाग्रस्त करना है। जब साथी इसके लिए तैयार नहीं है, यात्रा कर रहा है, या फिर एक स्वार्थी व्यक्ति है, आपकी उंगली चमत्कार कर सकती है और आपको मानसिक रूप से स्वस्थ रख सकती है।

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