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स्त्रियों के लिए देर से शादी करने के फायदे और नुकसान

देर से विवाह कम से कम शहरी भारतीय स्त्रियों के लिए तो एक वास्तविकता है ही। तो उनके बारे में अच्छा और बुरा क्या है?
happy single woman

भारत जैसे एक देश में जहां हम बलात्कार, एब्यूसिव विवाह, दहेज के लिए मृत्यु और बाल गर्भधारण की खबरों के बीच स्त्रियों के बारे में किसी भी अच्छी खबर के लिए तरसते हैं, हमें अंततः बहुत ज़रूरी आशा की किरण दिखाई देती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, अब भारतीय स्त्रियां पिछले दशक की तुलना में ज़्यादा उम्र में शादी करना पसंद करती है। देर से शादी आज की स्त्री की वास्तविकता है।

जहां 20 की उम्र तक पहुंचते ही शादी को एक लड़की के लिए प्राथमिकता माना जाता है, और इतना ज़्यादा की रिश्तेदारों से लेकर पड़ोस की आंटियां तक हर कोई उसकी शादी की योजनाओं के बारे में पूछने लगता है, क्योंकि ज़ाहिर है उसकी खुशी केवल एक अच्छा दूल्हा प्राप्त करने पर निर्भर है, एक ऐसे समाज में रहने के बावजूद इस बदलाव की बहुत ज़रूरत थी।

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शादी को एक अलग, ज़्यादा तर्कसंगत परिप्रेक्ष्य से देखना

देर से शादी करने के नवीनतम आंकड़े यह पुष्टि करते हैं कि ‘विवाह योग्य आयू’ की लंबे समय से निर्धारित परिभाषा बदल रही है। रीलीज़ किए गए आंकड़ों के मुताबिक, शादी करने वाली स्त्रियों की औसत आयु 18.3 से बढ़कर 19.3 हो गई है।

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1. इस शताब्दी की शुरूआत से ही समाज में बदलाव धीरे-धीरे बढ़ रहा था जब स्त्रियां शादी करने की योजना बनाने की बजाए अच्छी शिक्षा पाने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने पर अधिक ध्यान केंद्रित करने लगीं।

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