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तलाक लेते समय मुझे अहसास हुआ कि मैं उसे वापस पाना चाहती थी

उसे यकीन था कि वह तलाक चाहती थी, जब तक बात अदालत में नहीं पहुँच गई
sunset

जैसा चित्रा वशिष्ठ को बताया गया

हर आम दिन की तरह वह धम् से दरवाज़ा बंद करके काम के लिए चला गया, लेकिन आज मेरी कुछ दूसरी योजनाएं थीं। मैंने उसे बहुत झेल लिया था, या बल्कि हम दोनों एक दूसरे को बहुत झेल चुके थे। अगर हम एक और दिन साथ बिता लेते तो हम दोनों या दोनों में से कोई एक अपराधियों की सूची में ज़रूर पहुंच जाता।

किसी भी तरह की देर किए बिना मैंने उसकी माँ को फोन किया यह बताने के लिए कि मैं उसके बेटे से तंग आ चुकी हू और जा रही हूँ इसलिए वह पूणे आ जाए और उसकी देखभाल करे। एक घंटे के भीतर ही मैं अपने घर से निकटतम होटल में चली गई। फिर मैने मुंबई में अपने माता-पिता को मेरे निर्णय के बारे में बताया।

जैसे ही मैंने अगले दिन अपने ‘माइके’ में प्रवेश किया मैं समझ गई मुंबई में जीवन इतना आसान नहीं होगा। जब मेरी छोटी भतीजियों ने ‘मौसी मौसी’ कह कर मेरा स्वागत किया, तो मैंने राहत की सांस ली।

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