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तंत्र के लिए व्यवहारिक मार्गदर्शिका

भारत तंत्र की भूमि है, लेकिन हम यह भूल गए हैं कि इसे कैसे कार्यान्वित करें। यहां तांत्रिक सेक्स का पुनः परिचय है
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तंत्र निर्विवाद रूप से एक भारतीय पंथ है। इसकी जड़ें किसी भी धर्म के अस्तित्व से पहले देखी जा सकती हैं। बाद में, यह उपमहाद्वीप के भीतर हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के एक छोटे से भाग के रूप में उभर आया। तंत्र परमानंद का एक पंथ है। इसका लक्ष्य यौन सुख को अधिकतम करना है और आध्यात्मिक उन्नति और आत्मज्ञान की ओर बढ़ने के लिए रॉकेट ईंधन के रूप में इस आनंद का उपयोग करना है। पारंपरिक मन को एक तांत्रिक पागल प्रतीत हो सकता है, क्योंकि वह पूरे समय खुशी से पागल होता है।

आज के कोरपोरेट द्वारा चलित अमानवीय विश्व में, तंत्र, प्रयोगकर्ता के जीवन में खुशी और अर्थ लाने में बेहद महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मैंने स्वयं तंत्र की खुशी का अनुभव किया है और उम्मीद है कि आप भी करेंगे। यद्यपि तंत्र की एक जटिल दार्शनिक पृष्टभूमि है, अभ्यास शुरू करने के लिए इसे पूरा समझने की आवश्यकता नहीं है। अध्ययन या पढ़ने की बजाय तंत्र करने के विषय में अधिक है।
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तंत्र का मेरा पहला अनुभव

मेरा पहला तांत्रिक अनुभव लंबे इंतज़ार के बाद आया था। इस विषय को पढ़ना और जानना शुरू करते ही, मैं एक डाकिनी, एक महिला साथी जो तिब्बती बौद्ध तंत्र में क्रुद्ध देवी का मानवीकरण है, को तलाशने लगा। एक डेटिंग एैप टिंडर पर भी मेरा बायो ‘डाकिनी की तलाश कर रहा हूँ’ था। एक वर्ष या थोड़ा अधिक इंतज़ार करने के बाद, मुझे एक सहकर्मी के रूप में डाकिनी मिली जो आध्यात्मिक रूप से इच्छुक थी।

हमने सबसे आसान लेकिन दार्शनिक रूप से सबसे जटिल संस्कारों में से एक यब-यम का अभ्यास शुरू कर दिया। तिब्बती तंत्र में, यब-यम एक ऐसी स्थिति है जिसमें करूणा और कुशल उपायों के पुरूष सिद्धांत और अंतर्दृष्टि के महिला सिद्धांत का संघ शामिल है। यह भगवान शिव और पार्वती, काली एवं भैरवी सहित विभिन्न रूपों में उनकी साथी शक्ति के संघ की अवधारणा के समरूप है।

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तंत्र का विधिवत अभ्यास

चूंकि यब-यम सहित अधिकांश तंत्र विधि संबंधित हैं, एक निश्चित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाना होता है। मैंने प्राचीन वजरायन सूत्र से विधि का अध्ययन किया, लेकिन ओशो सहित आध्यात्मिक मार्गदर्शकों द्वारा लिखी गई आधुनिक समीक्षाएं उपलब्ध हैं। मेरी साथी और मैं इस प्रकार विधि का अभ्यास करते हैं: पहले, हम दोनों 10-15 मिनट के लिए क्रास-लेग्ड स्थिति में ध्यान केंद्रित करते हैं। लचीलेपन के आधार पर, कोई अर्द्धकमल या पूर्ण कमल (पद्मासन) में बैठ सकता है। फिर, हम दोनों एक दूसरे के सामने इस तरह बैठते हैं कि केवल हमारे घुटने स्पर्श करते हैं। इस समय, हम दोनों अपनी श्वास में तालमेल बैठाना शुरू कर देते हैं और हमारी आँखे बंद होती हैं। प्रारंभ में, हमें सही गति प्राप्त करने और एक दूसरे की श्वासों से मेल खाने में थोड़ा समय लगा। शुरूआती कुछ समय बाद, यह आसान हो गया।

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लगभग 5 मिनट बाद, वह मेरी गोद में बैठती है और मेरी रीढ़ की हड्डी के पीछे अपने पैर लपेटती है। जहां श्वास पर अब भी तालमेल बैठाते हुए, मेरी साथी सृष्टि का वैश्विक नृत्य शुरू करना प्रारंभ करती है, जबकि मैं अब भी चट्टान की तरह बैठता हूँ और श्वास की गतिविधि पर ध्यान केंद्रित करता हूँ। वास्तविक संसार में, अब तक यौन संबंध हो गया होता। हालांकि यह आवश्यक नहीं है, और यब-यम पूरे वस्त्र पहने हुए भी किया जा सकता है। दोनों साथी यौन आनंद के प्रति जागरूक होने और इसे अधिकतम करने का प्रयास करते हैं। पुरूष चरमोत्कर्ष को जितना हो सके उतना लंबा करने का प्रयास करता है। यहां परंपराएं भिन्न हैं। कुछ मानते हैं कि स्खलन आदर्श नहीं है क्योंकि वीर्य महत्त्वपूर्ण शक्ति है और इसे खर्च नहीं किया जाना चाहिए। अन्य लोगों को इसमें कोई समस्या नज़र नहीं आती।

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तंत्र के लिए मासिक धर्म सबसे अच्छा समय है

यह भी कहा जाता है कि मासिक धर्म के दौरान स्त्रियों की यौन शक्ति सबसे अधिक होती है इसलिए तांत्रिक क्रिया के लिए सबसे उपयुक्त समय वही है। कोई आश्चर्य नहीं: तंत्र, पाबंदियों को गले लगाने और प्रतिबंधात्मक सामाजिक नियमों से मुक्ति पाने के लिए परंपराओं को तोड़ने के बारे में है। अगर आप रक्त से घृणा करते हैं, तो शायद तंत्र आपके लिए नहीं है। मेरे अनुभव में, मासिक धर्म का रक्त अपवित्र होने के बारे में रूढिवादी निषेध पूरी तरह गलत है। साथ ही, बिजली की रोशनी को बंद करके, दीये या तैल के दीपक जला कर माहौल बनाना ना भूलें। कुछ अगरबत्तियां जलाएं, और यदि आप चाहें, तो बगैर गायन वाला संगीत बजा सकते हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत या तिब्बती मंत्र वास्तव में अच्छा काम करते हैं।

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वे जोड़े जो प्रयोग करने के लिए नया अवसर तलाश रहे हों, उनके लिए तंत्र बेहद रोमांचक साहसिक कार्य हो सकता है। यौन आनंद की स्पष्ट वृद्धि के अलावा, यह स्वास्थ लाभ की भरमार लाएगा और दोनों भागीदारों के बीच एक आध्यात्मिक बंधन उत्पन्न करेगा। अब समय आ चुका है कि तंत्र को इसकी स्थापना की कई सदियों बाद, इसके जन्मस्थान में एक पुनर्जागरित मुख्यधारा स्वीकृति प्राप्त हो।
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