तीन मुख्य कारण कि जोड़े एक ही चीज़ के बारे में क्यों लड़ते रहते हैं

ranveer deepika in argumenet

एक गांठ में फंसे

“यह ऐसा है जैसे हम एक गांठ में फंसे हैं,’’ मेरी दोस्त ने कहा। वह और उसका पति महीने में सत्रहवीं बार एक ही बात पर लड़े थे, और लग रहा था कि अब वह और सहन नहीं कर सकती थी। मेरे पिछले अनुभवों ने मुझे सिखाया था कि उसे कोई भी ज्ञान देने की कोशिश ना करूं इसलिए मैंने उसे गुस्सा निकालने दिया। जहां तक मुझे याद है कि उसका पति और वह, पति की देर से आने की प्रवत्ति के बारे में लड़ रहे थे। वह उससे प्यार करती थी लेकिन हर दिन उसका इंतज़ार करना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था। पत्नी को पति की वजह से लेट होना बिल्कुल पसंद नहीं था और ऐसा लग रहा था कि वे वास्तव में किसी परेशानी से गुज़र रहे थे।

हालांकि इस चीज़ ने मुझे बहुत परेशान किया। वे एक ही चीज़ के लिए इतने लंबे समय तक क्यों लड़ रहे थे? यह लादर-रिंस-रिपीट जैसा था। ऐसा लगता नहीं था कि यह कभी भी हल होने वाला है और हम अनिश्चित थे कि वह बेहतर हो रहा है या बदतर। मैंने छानबीन करने का फैसला किया और निम्नलिखित जानकारी पाई।

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थोड़ा गहरा खोदें

बहस के बार-बार होने के पीछे मुख्य कारण यह है कि लोग मुख्य बात नहीं समझते हैं। यह स्पष्ट प्रतीत हो सकता है, लेकिन यह एक आवश्यक सत्य है। हम सभी यह सोचते हैं कि बहसें तथ्यों के बारे में और ‘क्या हुआ’ के बारे में होती हैं। वे इस बारे में नहीं हैं। वे पूरी तरह से भावनाओं के बारे में भी नहीं हैं।

वे मूल्यों के बारे में हैं। हमारे लिए क्या प्रिय है, हमारे लिए क्या मायने रखता है। चूंकि हम बाहरी चीज़ों के बारे में बात करते रहते हैं इसलिए हम मुख्य बात से दूर रहते हैं। उदाहरण के लिए, मेरी दोस्त को महसूस हुआ कि उसका पति उसके समय का सम्मान नहीं करता था क्योंकि वह हमेशा देर करता था।

उसके पति के लिए, उसके लेट होने के बारे में उसकी पत्नी की शिकायतें उस समय को भी बर्बाद कर देती थीं जो वे साथ में बिताते थे। वे दो भिन्न चीज़ों को महत्त्वपूर्ण समझते थे लेकिन हमेशा इस बारे में बात करते थे कि वह लेट क्यों होता है और बहस आगे बढ़ती ही जाती थी। हम यह नहीं कहना चाहते कि बहसें जादुई रूप से हल हो जाएंगी, लेकिन यह जानना कि आप दोनों में अंतर क्या है, एक ज़्यादा रचनात्मक वार्ता शुरू करने में मदद कर सकता है।

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हमें क्या सिखाया गया है

हमारे माता-पिता ने हमें अपने लिए आवाज़ उठाना सिखाया और यह एक अच्छी सलाह थी। हालांकि, हम घर पर हमेशा झगड़े का स्वस्थ समाधान नहीं देखते थे। हमने हमेशा झगड़े और मन में दबी भावनाएं देखीं। हमने देखा कि वे भावनाएं दबाते थे और फिर बाधाएं उत्पन्न होती थीं। वे उनके अनुसार सबसे अच्छा काम कर रहे थे, लेकिन आप बेहतर कर सकते हैं। लेकिन अगर हम अपनी भवनाएं ना दबाएं और चर्चा में हमारा अहं हावी रहे, तो बहस हो सकती है। स्पष्ट चर्चा महत्त्वपूर्ण है। हम अपने माता-पिता को टेम्प्लेट्स के रूप में इस्तेमाल करते हैं और उनके तरीकों के दोषों से अवगत नहीं होते हैं। जागरूक होना हमें अपने व्यवहार को ढालने में मदद कर सकता है। हमारे माता-पिता अपने अहंकार की रक्षा करते थे, क्योंकि अपनी भावनाओं को स्वीकार करने के लिए वल्नरेबिलिटी की ज़रूरत होती है। अगर आप इसे आने देते हैं तो वल्नरेबिलिटी एक उपहार हो सकती है। आप असली, सच्ची बातचीत शुरू करते हैं जो बेहद असहज लग सकती है लेकिन अंत में अच्छी होती है। इस बारे में सोचें, क्या आप लड़ते रहेंगे क्योंकि आप कमज़ोर नहीं होना चाहते हैं या आप वास्तव में एक निष्कर्ष तक पहुंचना चाहते हैं? वल्नरेबिलिटी आसान नहीं है। लेकिन हम कठोर हैं, हम मुश्किल चीज़ें कर सकते हैं। और पुरस्कार श्रेष्ठ हैं।

अंतर्निहित अंतर

कुछ ऐसी चीज़ें जिसपर आप और आपका साथी बहस करता है, वह हल करने योग्य नहीं हो सकती हैं। मैं उन गलतियों और परिस्थितियों के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ जिन्हें आप सुधार सकते हैं, अगर अपने अहंकार को ताक पर रख दें तो। मैं दृष्टिकोण और तरीकों के बारे में बात कर रहा हूँ। इसमें धार्मिक मान्यताएं, राजनीतिक विचारधाराएं, और अन्य चीज़ें शामिल हैं। जब आप एक संबंध में आते हैं तो आप जानते हैं कि आपका साथी कौन है। अगर आप नहीं जानते हैं, तो आपको पहले इन चीज़ों के बारे में बात करने की ज़रूरत है।

कुछ समय बाद उन्हें बदलने की उम्मीद करना आप दोनों के लिए अनुचित है। आपको कभी-कभी अपने अंतरों को स्वीकार करना होगा और उनके माध्यम से रास्ता बनाना होगा। हो सकता है आपके साथी को हमेशा बाहर जाना पसंद ना हो, इसलिए आपको अपने जीवन में ऐसी जगह बनाने की ज़रूरत है जहां उनके बिना आपके बाहर निकलने से समस्याएं पैदा ना हों।

अगर आप लंबे समय तक संबंध बनाना चाहते हैं तो उन चीज़ों के लिए अपने साथी को मजबूर करना काम नहीं करता है जिन्हें वह पसंद नहीं करते हैं। इन अंतरों के प्रति स्वस्थ सम्मान आपको आने वाली समस्याओं को नेविगेट करने में मदद कर सकता है।

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बार-बार एक ही लड़ाई करना थकाउ हो सकता है। हो सकता है कि आप इस तरह लड़ने लगें जैसे आप और आपका साथी दो भिन्न भाषाएं बोल रहे हैं। मज़े की बात तो यह है कि अहंकार की भाषा भी ऐसी ही है। यह आपके दिमाग पर नियंत्रण कर लेती है और आप ज़िद्दी बन जाते हैं और सामने वाले व्यक्ति के दृष्टिकोण को देखने से इन्कार कर देते हैं। इससे उबरना और अपने दिल में गहराई से देखना इस भ्रमित पथ को नेविगेट करने में सहायक हो सकता है।

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