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तीस साल के खूबसूरत साथ के बाद अब मैं अकेले रहना कैसे सीखूं?

उनकी पहली मुलाकात ही उनके प्यार की शुरुवात थी. एक लम्बी यादगार शादीशुदा ज़िन्दगी के बाद जब वो वृद्धावस्था में अकेले हुईं, तो कैसे वो खुद को संभाल रही है?
sad women

(जैसा जोइ बोस को बताया गया)

शादी के तीस साल बाद फिर से अकेले हो गई

हर रोज़ जब मैं उठती हूँ तो अपने ही घर की शान्ति मुझे झंझोर देती है. अब तो कुछ महीने हो गए हैं मुझे इस तरह रहते रहते. तीस साल उसके साथ रहते रहते अचानक सिंगल होना मुझे आज़ादी से कम नहीं लगेगा, ऐसा मैंने सोचा था. मगर ऐसा नहीं था. पता नहीं लड़कियां अकेले कैसे रहती हैं, और कैसे ऐसा तय करती हैं की वो कभी शादी नहीं करेंगी. और फिर कितनी महिलाएं अपने पतियों को छोड़कर अलग रहने लगती है. कैसे कर लेती हैं वो ये सब? मैं तो कभी नहीं कर सकती थी. शायद इसलिए वो मुझे छोड़ कर चला गया.

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old widow
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मुझे अजीब अजीब से डर अचानक घेर लेते हैं. क्या होगा अगर टॉयलेट का फ्लश काम करना बंद कर दे. मेरे पास तो प्लम्बर का नंबर भी नहीं है. मैंने अखबार से लेकर एक नए प्लम्बर का नंबर लिखा था मगर क्या पता वो सचमुच प्लम्बर ही हो या कोई डकैत? आजकल कितनी वारदातें होती रहती हैं. चोर उच्चके भरे दिन में लोगों को लूट रहे हैं. हत्या. बलात्कार. पहले मुझे लगता था की किसी बूढ़ी औरत को तो वो छोड़ ही देंगे मगर फिर एक दिन मेरे पति ने मुझे एक न्यूज़ दिखाई थी जिसमे एक ८५ वर्षीया महिला का बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी. हाँ, मेरे पास पुलिस स्टेशन का तो नंबर है मगर वो हमेशा फ़ोन कहाँ उठाते हैं.

मुझे सिर्फ अपने पति का नंबर याद है और मुझे पता है की वो फ़ोन नहीं उठाएंगे.

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जब मैं उन्हें रोज़ फ़ोन करती थी

मैं अपने पति को रोज़ ही फ़ोन करती थी. रोज़ मैं घर से निकलने से पहले घर के लैंडलाइन से उनके ऑफिस के फ़ोन पर. फिर जब मोबाइल फ़ोन आने शुरू हुए तो उन्होंने सबसे पहले मोबाइल लिया. पहले वो ६ नंबर का होता था फिर सात और फिर १० अंकों का नंबर होता था. मुझे वो सारे नंबर मुहजबानी याद हैं. शायद मैं उन्हें कभी नहीं भूल पाऊँगी. मैं अब भी यूँ ही उन सारे नंबर को डायल करती हूँ. दूसरी तरफ से कोई फ़ोन नहीं उठता, सिर्फ एक रिकार्डेड मशीनी आवाज़ जवाब देती है. काश किसी दिन मैं उनकी वो उत्साही आवाज़ सुन पाती. काश वो किसी दिन मुझसे बात कर पाते, शायद मैं उनसे ब्रेड ले कर आने को कहती.

मुझे बाज़ार जा कर ब्रेड लाना पसंद नहीं. हमेशा मेरे पति ही ब्रेड ले कर आते थे, और हर बार कुछ नयी तरीके की ब्रेड-कभी फल वाली, कभी मसालेदार तो कभी गेहूं वाली. अब तो मैंने ब्रेड खाना ही बंद कर दिया है.

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वो मेरे लिए पेस्ट्री भी ले कर आते थे. मैंने उनसे कभी फरमाइश नहीं की मगर उन्हें पता था की पेस्ट्री मेरी पसंदीदा हैं. स्ट्रॉबेरी और बटरस्कॉच तो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद थे. मुझे आइस क्रीम भी बहुत पसंद थे. हम अक्सर खाने के बाद मीठे में आइस क्रीम ही खाते थे. वो टीवी ऑनकर देते और फिर हम दोनों बैठ कर फिल्में देखते. सुबह सुबह जब मैं हम दोनों के लिए नाश्ता बना रही होती थी, वो मुझे अखबार से न्यूज़ पढ़ कर सुनाते थे. ब्रेड और अंडे. तीस साल तक रोज़ सुबह हम दोनों ने ब्रेड और अंडो का नाश्ता किया है. मगर अब मैं कॉर्नफ़्लेक्स खाती हूँ. मैंने आइस क्रीम और पेस्ट्री खाना बंद कर दिया है. आज भी मुझे लगता है की किसी दिन दरवाज़े की घंटी बजेगी और वो ब्रेड, पेस्ट्री और आइस क्रीम ले कर आएंगे. मगर वो नहीं आएगा. मृत लोग वापस नहीं आते हैं. मगर मेरे लिए ये मानना मुश्किल है की वो अब नहीं आएंगे. मैं अब भी ऐसा नहीं बोल सकती की मेरे पति अब नहीं रहे, मुझे ये सही नहीं लगता.

पहली मुलाकात में ही हम करीब आ गए

ये बात 1980s की है. मैं एक रविवार चर्च से घर वापस न आके बेकरी चली गई. मैं अक्सर वहां से अपने माता पिता के लिए अदरक की कूकीज लाया करती थी. उस दिन माँ की तबियत ख़राब थी और पिता जी उन्हें किसी भी हालत में घर में अकेला नहीं छोड़ सकते थे. तो मैं पहली बार उससे उस कूकीज की दुकान में मिली. वहां एक लम्बी लाइन लगी हुई थी. उन्होंने बड़ी शालीनता से मुझे अपनीजगह आगे बढ़ कर कूकीज खरीदने का आमंत्रण दिया. कुछ तो था जो हम दोनों के बीच में क्लिक हुआ. और उस दिन हमारी बातों का सिलसिला जो शुरू हुआ, वो उसकी आखिरी सांस तक चलता रहा.

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हमारे कोई संतान नहीं थी. मुझे एक बीमारी थी और कोई भी दवा या दुआ मुझे मातृत्व सुख नहीं दे सकती थी. तो इसलिए हम कुत्तों के अभिवावक बन गए. हमने तीन कुत्ते पाले जिसमे से आखिरी तीन साल पहले गुज़र गया. उसके जाने के बाद हमने तय किया की अब हम कोई और जानवर नहीं पालेंगे. हम दोनों की उम्र ढल रही थी. हमें हमेशा ऐसा लगता था की हम दोनों में मैं ही पहले जाऊँगी. आखिर वो मुझसे चार साल छोटे थे और मुझसे ज़्यादा स्वस्थ्य भी. मुझे डायबिटीज थी और मेरी नज़रें भी पिछले कुछ सालों से कमज़ोर हो चली थीं. मगर किसने सोचा था की वो मुझे मुझे छोड़ कर पहले चला जायेगा? मुझे तो आज भी यकीन नहीं होता.

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

नैन्सी मेरी भांजी है और इनके जाने के बाद मुझे अपने साथ सिडनी ले जाना चाहती थी. मगर ये जो इतने सारे पौधे है जो मेरे पति ने लगाए थे, इनका क्या होगा. वो बहुत प्यार से इनकी देखभाल करते थे. अब मुझे ही तो इनका ध्यान रखना है. मुझे पता है की मैं भी ज़्यादा दिनों तक नहीं जीने वाली. मगर जब तक ज़िंदा हूँ, हर पल उनकी याद साथ साथ चलती है. मैं उन्हें बहुत मिस करती हूँ.

 

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