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तुम्हीं मुझे सबसे ज़्यादा परिभाषित करती होः द्रौपदी के लिए कर्ण का प्रेम पत्र

वह उसे स्वयंवर में नहीं जीत सका, और जीवन भर बस दूर से ही खेल देखता रहा
Draupadi-vastraharan

यज्ञसेनी,

एक पत्र जो मैं तुम्हें कभी नहीं भेजूंगा। लेकिन फिर भी यह मानना पसंद करूंगा कि तुम्हें इसके बारे में पता है।

उस दिन जब एक सोशल नेटवर्किंग साइट ने मुझसे मेरा ‘रिलेशनशिप स्टेटस’ चुनने के लिए कहा तो मैं अचंभित रह गया। वह कौन सा संबंध है जो मुझे परिभाषित करता है, मेरी पहचान, और मुझे बनाता है? क्या वह पत्नी है, जो पत्नी की भूमिका निभाने के लिए पर्याप्त रूप से कर्तव्यनिष्ट है और इतनी संवेदी है कि मुझसे एक पति होने की मांग नहीं करती, या वह माता है जो मुझे प्यार करती है या वह जो मुझे छोड़ गई या तुम हो? वास्तव में, क्या यह तुम हो जो मुझे सबसे ज़्यादा परिभाषित करती हो? मुझे डर है यह तुम ही हो। और यकीन मानो, ‘इट्स कांप्लिकेटेड!’

हमारे बीच कुछ अलौकिक समानताएं हैं, है ना?

पहली यह कि हमारे परिवार एक ही है। पांडव और हम दोनों में से कोई भी वास्तव में कभी उनके नहीं थें लेकिन फिर, हम उसमें भी कितने अलग हैं। मैं हमेशा उनके साथ जीवन जीने के लिए तरसा हूँ, जहां हमेशा से मेरा दिल था, विश्व के सबसे योग्य भाइयों के साथ। वहां रहने, अपनी संवेदनशीलताओं को खत्म करने, पांच भाइयों की पत्नी की भूमिका निभाने, और एक भी शब्द कहे बगैर आत्मसमर्पण करने के लिए तुम्हारे दिल और आत्मा को कितना कुछ त्यागना पड़ा था।

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