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तुमने वादा किया था कि जीवनभर मेरे साथ रहोगे

वे ऑनलाइन मिले और दूरी एवं बिमारी के बावजूद उनका एक मज़बूत बंधन बन गया, लेकिन फिर उसके मैसेज आना कम हो गए।

अभि और मैं एक सोशल नेटवर्किंग साइट द्वारा मिले। शुरूआत में चीज़े अनौपचारिक थी। वह दूसरे शहर में रहता था और मैंने सोचा कि कुछ भी कार्यान्वित नहीं हो पाएगा, लेकिन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप का दूसरा पहलू यह है कि आपके पास मानसिक और भावनात्मक रूप से कनेक्ट होने के लिए पर्याप्त समय होता है। अभि दक्षिण भारत के एक समृद्ध व्यापारिक परिवार से एक अनाथ था। वह अकेला था। उसे ज़रूरत थी किसी ऐसे व्यक्ति की जो उसका सहयोग करे, उसे समझे और प्यार करे। हमारी बातचीत बढ़ी और हमने महसूस किया कि हमारा कनेक्शन मजबूत था।

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और फिर पता चला कि अभि को स्टेज 1 कैंसर है। इस खबर ने हम दोनों को हिला दिया।

अभि एक नाजु़क मानसिक स्थिति में था। मैं भाग कर उसके पास जाना चाहती थी और उसे कस कर गले लगा कर कहना चाहती थी कि मैं उसे कभी नहीं छोडूंगी। अभि मेरे साथ उसके उपचार का हर विवरण साझा करता था और जब भी वह निराश महसूस करता था, हम आधी रात को भी बात किया करते थे। कीमोथेरेपी के एक साइकल के बाद जब उसे थोड़ा बेहतर महसूस हुआ, तो वह मुझसे मिलने मुंबई आ गया। वह आगे के ईलाज के लिए कुछ दिनों बाद वापस चला गया और मैंने मैसेज के ज़रिए संपर्क बनाए रखा।

काफी दिन ऐसे भी आए जब उसने मैसेज का उत्तर ही नहीं दिया। लेकिन मैंने मैसेज भेजना जारी रखा क्योंकि उसने वादा किया था कि वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा। हमने अच्छे जीवन के लिए कई योजनाएं बनाई थीं।

समय बीता और अभि के मैसेज और कम होते गए। फिर खुद भेजना तो दूर की बात है उसने मेरे मैसेज का उत्तर देना भी बंद कर दिया। वह मेरे जन्मदिन पर भी फोन करना भूल गया। मैं चिंतित होने लगी थी।

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मैंने उसे फोन करने की कोशिश की। हमने कुछ एक बार फोन पर बात की। वह अस्पताल में था और उपचार प्राप्त कर रहा था और वह नहीं चाहता था कि मैं उसे देखूं। मैंने उसके उपचार के बाद उससे मिलने की कोशिश की लेकिन उसने मुझे यह कह कर रोक दिया कि ये लोग बहुत कठोर हैं और इसके बाद उसकी बातचीत और कम हो गई।

सितंबर की एक शाम उसने मुझे फोन किया और कहा कि वह शादी कर रहा था क्योंकि उसका परिवार ऐसा चाहता था। तीन महीनों में यह उसका पहला फोन था। मैं हैरान रह गई थी क्योंकि मुझे लग रहा था कि अब भी उसका उपचार चल रहा है, लेकिन उसने उत्तर दिया कि उसका उपचार खत्म हो चुका था इसलिए उसका परिवार चाहता था की वह शादी कर ले। वह एक रूढ़िवादी तमिल परिवार से था और उसके परिवार वाले किसी अन्य लड़की को स्वीकार नहीं करते। इसलिए उसने हार मान ली।

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मैं बिखर गई थी। यह मेरी समझ से परे था कि एक शिक्षित वयस्क को इस तरह मजबूर कैसे किया जा सकता है। एक महीने बाद उसकी शादी हो चुकी थी और उसने मुझे मैसेज भेजा की उसे सामान्य होने के लिए समय चाहिए और वह हमेशा मेरे साथ रहेगा और मेरा दोस्त बन के रहेगा। यह एक और झटका था।

मैं एक करीबी सहेली के साथ बात कर रही थी और उसने बताया कि मैं बदल गई थी और ये अच्छी बात नहीं है। इस पूरे समय मैं बुरी तरह पीड़ा झेल रही थी, हर छोटी बात के लिए अपना आपा खो रही थी और हर चीज़ से परेशान हो रही थी। मैं खुद के प्रति कठोर हो रही थी। मैंने खुद से पूछा, ‘‘मैं अपने साथ ऐसा क्यों कर रही हूँ? मैं खुद को सज़ा क्यों दे रही हूँ और अब तक अतीत को लेकर क्यों बैठी हूँ?’’ ऐसा नहीं है कि मैंने अपने प्यार को बचाने की कोशिश नहीं की। तो मैं खुद के साथ और उन लोगों के साथ इतनी कठोर क्यों हो रही हूँ जो शायद कभी मुझे छोड़ कर नहीं जाएंगे? जो भी हुआ उसमें किसी की भी गलती नहीं थी; तो मुझे क्यों पीड़ा झेलनी पड़ रही है? मैंने 5 महीनों तक पीड़ा झेली, तीन अनिश्चितता में और दो यह सोचते हुए कि मैं ही क्यों।

मैंने निष्कर्ष निकाला कि मुझे बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना बस उसे माफ कर देना चाहिए; माफी या फिर भावनात्मक रिप्लाए तक की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

उसने वह किया जो उसे सही लगा, भले ही वह हम दोनों के लिए सही हो या ना हो। मुझे अब इसके बारे में चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। मुझे अब इसके पीछे की वजह जानने की ज़रूरत नहीं है।

मैं भूल गई थी कि मेरा भविष्य मेरे वर्तमान का प्रतिबिंब है और अगर आज मैं जीवन के और खुद के प्रति आशा खो देती हूँ, तो मेरा भविष्य कभी बेहतर नहीं हो पाएगा। मैंने उसे जो आखरी मैसेज भेजा था वह यह था कि मैं उसे माफ कर चुकी हूँ। उसके बाद उसने कुछ मैसेज भेजे लेकिन मैंने उनका उत्तर नहीं दिया। अब उसके पास अपना जीवन है।

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मैं मेरा जीवन जीना चाहती हूँ, मैं नई जगहों पर जाना चाहती हूँ, अनजान लोगों से मिलना चाहती हूँ, नए दोस्त बनाना चाहती हूँ, फिर से प्यार में पड़ना चाहती हूँ, और इस बार किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जो मुझे कभी छोड़ कर ना जाए। मैं अब भी उद्देश्यहीन लॉन्ग ड्राइव्स पर जाना चाहती हूँ, धूप में बैठना चाहती हूँ, मूर्खतापूर्ण अजीब चीज़ें करना चाहती हूँ और नई कला सीखना चाहती हूँ। मैं जीना चाहती हूँ। और इसके लिए मैंने फैसला किया है कि अतीत का बोझ अपने सिर से हटा दूंगी। जल्द ही मैं एक नए देश की सुंदरता को एक्सप्लोर करने वहां जाउंगी और वहां से बहुत अच्छा अनुभव लाकर अपना नया साल एक खुश नोट से शुरू करूंगी।

अगर जीवन कभी हमें एक दूसरे के सामने लाता है, तो मैं अपनी कड़वी यादों को याद नहीं करूंगी, क्योंकि मैं सिर्फ इतना जानती हूँ कि मेरे पास जीने और प्यार करने की योग्यता थी और हमेशा रहेगी।

मैं दुबारा शादी अपने लिए करना चाहती हूँ, अपने बेटे के लिए नहीं

तलाक मेरी मर्ज़ी नहीं, मजबूरी थी

मेरे साथी की मृत्यु के बाद मुझे इन चीज़ों का पछतावा है


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