उसके पति ने तर्क दिया, ‘‘किसी के जीवन में दूसरी औरत होना सफलता का हिस्सा है”

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एक अरेंज मैरिज जो परफेक्ट लगती थी

वह परेशान थी। ऐसा कैसे हो सकता है? जब वह अपने बैग पैक कर रही थी तो उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, उसके हाथ में जो भी आ रहा था, वह सबकुछ बैग में डालती जा रही थी। जहां वह बहुत पहले से जानती थी कि उसका पति रमेश हानिरहित फ्लर्ट था लेकिन किसी औरत से अनुचित संपर्क वह बरदाश्त नहीं कर सकती थी। अपने बैग उठाकर उसने घर पर एक आखरी नज़र डाली जो पिछले दो वर्षों से उसका दूसरा घर था, धीरे से मुड़ी और कैब की ओर चल दी। कैब ड्राइवर आगे आया, उससे बैग लिए और सुडान कार में रख दिए। विचारों में खोई हुई अनीता चुपचाप पिछली सीट पर बैठी थी। ड्राइवर ने पूछा, ‘‘चलें मैडम?’’ और वह वर्तमान में लौट आई। उसने हामी में सिर हिलाया और ड्राइवर एयरपोर्ट की ओर चल दिया।

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अनीता पंजाब के उच्च मध्यम वर्गीय परिवार से संबद्ध थी। वह एक ऐसे परिवार से थी जो आपस में बहुत करीब था। उसका प्रारंभिक जीवन मुख्य रूप से अविभाजित भारत के पंजाब में बीता था, जो क्षेत्र अब पाकिस्तान में है। उसके चार भाई बहन थे, सबसे छोटा भाई उससे 10 साल छोटा था। उसने अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की ही थी कि उसके पिता की मृत्यु हो गई। उसकी माँ बहुत ही गर्वित और ईमानदार महिला थी और उन्होंने परिवार के किसी भी सदस्य से किसी भी तरह की वित्तीय सहायता लेने से इन्कार कर दिया था। परिवार में सबसे बड़ी होने के नाते, अनीता के युवा कंधों को परिवार को सहारा देने का बोझ उठाना पड़ा। उसने एक मोंटेसरी शिक्षक होने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था और उसे स्थानीय स्कूल में नौकरी मिल गई।

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“माँ, प्लीज हमें छोड़ कर मत जाओ!”

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वह बहुत अच्छा पति था

शिक्षण पेशे के कुछ ही वर्षों में वह बहुत ही लोकप्रिय शिक्षिका बन गई थी। और जल्द ही परिवार के सदस्यों ने उसकी शादी के बारे में बात करना शुरू कर दिया। उन दिनों अठारह साल के होते ही शादी करने का चलन था। अठारह नहीं तो ज़्यादा से ज़्यादा बीस वर्ष में। एक साझा रिश्तेदार पड़ोस के गांव से एक प्रस्ताव लाया। ‘लड़का’ एक आर्मी अफसर, एक सुंदर युवा कैप्टन था। माता-पिता के मिलने की व्यवस्था की गई थी और उसके बाद दोनों को बातचीत करने का अवसर दिया गया। औपचारिकताएं समाप्त होने के बाद, प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया था। कोर्टशिप की एक संक्षिप्त अवधी के बाद पंजाबी शैली में अनीता और रमेश की शादी हो गई।

यह सुनिश्चित करने के बाद की उसकी माँ और भाई बहनों की देखभाल की जाएगी और उनपर किसी भी तरह का वित्तीय संकट नहीं होगा, अनीता अपने पति के साथ उसके ड्यूटी स्टेशन पर चली गई। जिस गर्मजोशी के साथ उसका स्वागत किया गया, उससे वह हमेशा के लिए मिलिट्री जीवनशैली की कायल हो गई। रमेश एक बहुत ही लविंग, उदार और समझदार पति था जो उसकी हर ज़रूरत पूरी करता था। उसके साथ एक रानी जैसा व्यवहार किया जाता था और उसे यह बहुत पसंद आता था।

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लेकिन वह बहुत ज़्यादा सेक्स चाहता था

हालांकि रमेश की एक कमज़ोरी थी। उसकी सेक्स ड्राइव बहुत तीव्र थी और वह हर दिन मजबूत जोशीले लवमेकिंग में लिप्त हो जाता था।

शुरू में, अनीता ने भी सेक्स के आनंद का मज़ा लिया। वह सोचती थी कि विवाहित जीवन के शुरूआती चरणों में यह सामान्य था और उसे उम्मीद थी कि यह समय के साथ बदल जाएगा। वह कितनी गलत थी! उनके पहले बच्चे का जन्म भी रमेश को रोक नहीं पाया और वह एक जोशीला बैल बना रहा। उसका प्यार अब मांग में बदल चुका था। वह हर रात सेक्स की मांग करता था। और आज्ञाकारी पत्नी होने के नाते अनीता उन मांगों को स्वीकार कर लेती थी भले ही वह हमेशा मूड में ना हो।

कुछ वर्षों बाद, दूसरे बच्चे के जन्म के बाद, अनीता ने प्रार्थना की कि अब तो उसे थोड़ी राहत मिले। लेकिन रमेश की सेक्स ड्राइव ज्यों की त्यों बनी रही। सैन्य जीवन भी अनीता को परेशान कर रहा था। आधिकारिक प्रतिबद्धताएं और सामाजिक जुड़ाव फ्रिक्वेंट थे और वह सचमुच सभी मोर्चों पर व्यस्त थी। उन दिनों से लेकर, जब वह उत्साहित युवा दुल्हन थी जो वैवाहिक यौन संबंध की दुनिया में प्रवेश कर रही थी, अब वह अपने पति की इच्छाओं को तृप्त करने वाली मूक साथी बन चुकी थी। अब वह थोड़ी राहत चाहती थी।

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उसके काम की वजह से थोड़ी राहत मिली

अपने अधिकारियों के साथ थोड़ी कहासुनी के कारण, रमेश ने आर्मी से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। एक सेवानिवृत्त अधिकारी के रूप में एक संक्षिप्त कार्यकाल के बाद, उसने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के सीइयो के रूप में नौकरी कर ली। यह काम उसे दूसरे शहर में ले गया। अनीता को बच्चों की शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए वहीं रूकना पड़ा। साप्ताहांत पर रमेश आ जाया करता था या फिर वह और बच्चे उसके पास चले जाया करते थे। रोज़ रोज़ का यौन मिलन अब साप्ताहांत तक सीमित हो गया था। यह व्यवस्था अनीता को काफी ठीक लग रही थी।

एक बार जब वह अपने पति के घर गई हुई थी, उसने बैडरूम में कुछ बदलाव देखा।

बदलाव सूक्ष्म थे, फिर भी बदलाव ही थे। रमेश भी अब उससे और बच्चों से मिलने सिर्फ महीने में एक बार आने लगा। ऑफिस से बढ़ता वर्कलोड भी नियमित चीज़ थी। अनीता ने यह स्वीकार कर लिया लेकिन एक संदेह उसके मन को परेशान करता रहता था। वे सूक्ष्म बदलाव उसे परेशान करते रहे। क्या रमेश धोखा दे रहा था? क्या उसका अफेयर चल रहा था? हांलाकि, किसी भी सबूत की अनुपस्थिति में वह रमेश के साथ अपने संबंध को खतरे में नहीं डालना चाहती थी।

दूसरी महिला की उपस्थिति के अचूक संकेत

एक बार जब वह रमेश से मिलने गई थी, उसे बाथरूम के शीशे पर बिंदी चिपकी हुई दिखी। वह कभी भी बिंदी नहीं लगाया करती थी। उसने नौकरानी को बुलाकर डांटा कि उसने शीशा साफ क्यों नहीं किया था। नौकरानी के उत्तर ने उसे भौंचक्का कर दिया। नौकरानी ने अपने उदासीन लहजे में कहा, ‘‘मैं हमेशा साफ करती हूँ लेकिन मैडम हमेशा बिंदी शीशे पर चिपका देती है”। ‘‘क्या…कौन – कौनसी मैडम?’’ अनीता के दिमाग में ये सब अनियंत्रित तरीके से गूंज रहा था। फिर नौकरानी ने पूरी कहानी सुनाई कि कैसे एक मैडम जिसने अपने पति को तलाक दे दिया था, नियमित रूप से घर में आया करती थी। एक-एक करके अनीता ने कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की। जिस बात का उसे शक था, आखिरकार वह बात सच थी।

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दूसरी महिला की उपस्थिति के अचूक संकेत

उस शाम जब रमेश घर आया, अनीता ने उससे इस बारे में पूछा, उसे जितना भी कुछ पता था वह बताते हुए। शुरूआत में रमेश ने यह बात हंसी में उड़ाने की कोशिश की यह कहते हुए कि नौकरानी कुछ ज़्यादा ही कल्पनाशील है। अनीता द्वारा लगातार पूछे जाने पर, रमेश मुड़ा और एक ककर्श स्वर में बोला, ‘‘तो क्या हुआ? कोरपोरेट जगत में सभी सफल पुरूषों के पास दूसरी औरत होती है। इसलिए बात का बतंगड़ मत बनाओ। तुमहें एक अच्छी जीवनशैली जीने के लिए पर्याप्त पैसे मिल रहे हैं।”

मैं अब भी इस बात पर अटकी हूँ कि इसमें बुराई क्या है?

अनीता अफेयर के पीछे का तर्क सुनकर भौंचक्की रह गई थी। ‘‘तुम्हें मेरी और बच्चों की कोई परवाह नहीं? तुम मेरे साथ ऐसा कर कैसे सकते हो? मैं हमेशा से एक अच्छी पत्नी, एक अच्छी माँ रही हूँ और अब यह?’’ वह रो पड़ी और अनियंत्रित रूप से सुबकने लगी। ‘‘तुम पागल बन रही हो। तुम अच्छी पत्नी और अच्छी माँ हो, इसे कोई झुठला नहीं रहा है। लेकिन जैसा मैंने कहा, ज़िंदगी में दूसरी औरत का होना सफलता का ही हिस्सा है।”

“जीवन में दूसरी औरत का होना सफलता का हिस्सा है।”

“मैंने हमेशा सुनिश्चित किया है कि तुम्हें और बच्चों को किसी चीज़ की कमी ना रहे।” रमेश ने अनीता के कंधो पर हाथ रखने की कोशिश करते हुए कहा। रमेश का हाथ झिड़कते हुए उसने कहा, ‘‘मैं यहां नहीं रह सकती। मैं तुम्हारे साथ अब और नहीं रह सकती। तुमने धोखा दिया है, मेरा तुमपर जो विश्वास था तुमने वह तोड़ दिया है।”

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रमेश, जिसे इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, उसने कहा, ‘‘वह तुम्हारा फैसला है। मैं चाहता हूँ कि तुम रूको लेकिन अगर तुम पहले ही अपना मन बना चुकी हो तो मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं।” फिर वह अचानक घर से निकला, कार में बैठा और चला गया।

एयरपोर्ट तक के रास्ते में और फ्लाइट में भी अनीता अचरज में थी। घर पहुंचने पर, उसने बच्चों को बुलाया, उन्हें बताया कि उनके माता-पिता के बीच क्या हुआ था, और अपना फैसला सुना दिया। उसने उनसे हिम्मत रखने को कहा और यह भी कहा कि साथ मिलकर वे उनके जीवन में आए इस तूफान का सामना कर लेंगे। सौभाग्य से, दोनों लड़कों में से बड़े वाले को आईटी उद्योग में एक अच्छी नौकरी मिल गई थी और वह अपनी माँ और भाई को सहारा देने की स्थिति में था। वे एक छोटे से घर में चले गए और रमेश के बिना उस घर में रहने लगे।

Woman with her children
मैं जानती थी कि मेरा पति मुझे धोखा दे रहा है फिर भी मैं चुप रही

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जब वर्षों बाद एक फोन कॉल आया

कुछ वर्षों बाद, लैंडलाइन पर एक फोन ने अनीता को चकित कर दिया। रमेश का फोन था। वह उससे विनती कर रहा था और जो दुख उसने अनीता और बच्चों को दिया था उसके लिए माफी मांग रहा था। उसने माफी मांगी और अनीता से अनुरोध किया कि उसे वापस आने दे और फिर से परिवार का हिस्सा बनने दे। ‘‘मुझे एक और मौका दो, प्लीज़ मैं हाथ जोड़ता हूँ। मुझे मेरी गलती का अहसास हो गया है,’’ उसने पछतावे से भरी आवाज़ में कहा।

जब रमेश आग्रह कर रहा था तब उसके दिमाग में असंख्य विचार आने लगेः उसके शुरूआती विवाहित दिन, रमेश द्वारा बरसाया गया प्यार और देखभाल, गहन लवमेकिंग, बच्चे और बहुत कुछ। उसके बाद उसके साथ किए गए बेवफाई, धोखे और अपमान ने उसे विमुख कर दिया। रमेश को माफ करने और उसके साथ बिखर चुके जीवन को फिर से शुरू करने के विचार ने उसका दिल तोड़ दिया। मिश्रित विचार धीरे -धीरे स्पष्ट हो गए। वह अपना मन बना चुकी थी।

अनीता ने हल्की सी आवाज़ में उत्तर दिया ,‘‘रॉन्ग नंबर” और फोन काट दिया।

“क्या हम मिलें?”

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