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उसकी “मदद” से बॉयफ्रेंड अब घुटन महसूस करता है

वो अपने बॉयफ्रेंड से कहीं ज़्यादा काबिल और समझदार है और हमेशा उसे सलाह देने की कोशिश करती है. मगर क्या बॉयफ्रेंड इससे खुश है...
lady fighting with husband

वो एक दुसरे के लिए परफेक्ट थे और साथ रहने लगे

मिमी ने कॉलेज से निकलते ही लिव इन रहने लगी थी. वो मेरी कॉलेज के दिनों से दोस्त थी. मिमी और सोमनाथ का प्यार तो ऐसा लगता था, मानो हमेशा से ही रहा होगा. तो इसलिए जब दोनों साथ रहने लगे, उनके जानने वालों में शायद ही किसी को अचम्भा हुआ होगा. जब मैं सोमनाथ से पहली बार मिली, देखते ही समझ गई की सोमनाथ और मिमी की जोड़ी क्यों सही है. जहाँ एक तरफ मिमी बहुत ही चंचल और बातूनी थी सोमनाथ शांत था. मगर हाँ वो कटाक्ष करने में हमेशा ही तत्पर रहता था. मिमी काबिल भी थी और सब कुछ खुद कण्ट्रोल करने का उसके अंदर एक कीड़ा भी था. सोमनाथ आरामपसंद मगर ज़िम्मेदार था. दोनों एक दुसरे के लिए परफेक्ट थे.

तो इस रविवार की सुबह मिमी खिड़की के अपने सबसे पसंदीदा कोने पर कॉफ़ी पीने बैठ गई. वो बैठ कर खिड़की के बाहर देखने लगी और मैं कॉफी की चुस्कियां लेने लगी.

अचानक उसने मेरी तरफ देख कर कहा, “पता है इस बार सोमनाथ ने क्या किया?”

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मैंने उसका सारा समय व्यवस्थित किया
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यह मेरे लिए एक आम प्रश्न था. तो इसलिए मैं चुपचाप मुस्कुरा कर उसके जवाब का इंतज़ार करने लगी. उसकी बातें हमेशा इसी तरह शुरू होती हैं. और हाँ, हो सकता है की आज की बात एक  घंटे तक खींच जाये.

“उसका शुक्रवार का टिकट है मुंबई के लिए. मगर उसे टिकट मंडे तक के लिए अपना प्रोग्राम टालना था क्योंकि बिश्वा की शादी है न. मगर वो भूल गया टिकट पोस्टपोन करना. और जब मैंने उसके लिए ये कर दिया, तो मुझ पर ही भड़क गया. कहने लगा की मैं हर चीज़ में टांग अड़ाती हूँ. सोच सकती हो की उसने मुझे ऐसा कुछ कहा? मुझे?.”

मैंने आश्चर्यचकित होने का नाटक किया और चुपचाप सब सुनती रही. मुझे पता था बात अभी खत्म नहीं हुई थी.

“मैं उससे चार साल छोटी हूँ और ये बात याददिलाने का वो कोई मौका नहीं छोड़ता है. मैं कुछ भी पहल करूँ, पता नहीं उसे इतनी परेशानी क्यों होती है? हमारे साथ रहने से पहले जो हुआ था, वो उसे भूलना ही नहीं चाहता.”

जब मैंने उसके परिवार को सब कुछ बताया था

ये तब की बात है जब मिमी और सोमनाथ एक साथ रहने का फैसला ले रहे थे. सोमनाथ अपने माता पिता से मिमी को मिलवाने में बहुत झिझक रहा था. मगर मिमी कहाँ शान्ति से चीज़ें होने का इंतज़ार करने वाली है. तो उसने सब कुछ प्लान किया और बिना सोमनाथ की मर्ज़ी या जानकारी के वो जाकर सोमनाथ के मम्मी पापा से मिलने पहुंच गई. सोमनाथ को ये सब तब पता चला जब एक दिन उसी के मम्मी पापा ने सोमनाथ को घर पर खाने के लिए बुलाया जो मिमी ने ही बनाया था. आप क्या सोमनाथ की मनोदशा की कल्पना कर सकते हैं

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जब वो अपने घर में घुसा और अपनी गर्लफ्रेंड और माँ को किचन में खाना बनाते और गप्पे लगते देखा.

यूँ तो सोमनाथ हमेशा ही मिमी के इस कदम के लिए उसकी प्रशंसा करता है मगर ये प्रशंसा वो कभी मिमी के सामने नहीं करता है.

“वो मुझे उसके घर अकेले जाने के लिए कभी माफ़ नहीं करेगा. मगर अंकल आंटी तो बहुत खुश हुए थे मेरे इस कदम से. और मैंने ही तो उस मकान को घर बनाया था. क्या वो मेरी मदद और सलाह के बिना कुछ भी कर पाता। उस पिंक मार्बल के लिए मैंने ही तो उस आदमी को ढूंढा था. और मुझे याद है की कैसे मैंने प्रोफेशनल पेंटर को बुलाया था इस पेंटिंग के लिए. और मैंने तो घर भी खुद ही ढूंढा था.”

एक साथ रहने का फैसला उनके रिश्ते का अहम् पन्ना था

मिमी की फरमाइशों की लिस्ट ख़त्म नहीं हो रही थी और दूसरी तरफ बेचारा सोमनाथ पूरी कोशिश कर रहा था वो सब कुछ अपनी थोड़ी सी तनखाह से कर सके. मगर इस बात का श्रेय तो आपको मिमी को देना ही होगा की उसने जो जो चाहा,वो सब आखिर करवा ही लिया. वैसे हमें भी लगा था की पिंक मार्बल कुछ ज़्यादा ही शानोशौकत वाला हो गया था और शायद सोमनाथ ये सब बिना मिमी की मदद के आराम से और बेहतर ही कर पाता.

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two girl talking
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इधर मिमी अब भी खिड़की पर बैठे मुझे अपनी दुखती गाथा सुना रही थी. “मुझे आज भी याद है की सोमनाथ ने मुझे उस समय क्या कहा था. उसने कहा था क्या ये घर तुम्हारे लिए हमारे रिश्ते से ज़यादास अहमियत रखता है? उसे तो लगता है की मैं सिर्फ चीज़ें ख़राब करती हूँ. क्या कभी उसने सोचा है की मेरे बिना उसका गुज़ारा कैसे होता? कैसे वो कुछ भी मैनेज कर पता? यहाँ तक की अगर मैंने उसे वो सूट ला कर नहीं दिया होता तो वो उस क्लब मीटिंग में क्या पहनता? मुझे पता है की वो तो कहेगा की वो बाद में जा कर खुद ही ले आता. मगर कब? किस रंग का सीट? मुझे पता है की मुझे ही तो ये सब करना था आखिर?”

मैंने जल्दी से हामी भरी.

और मैंने ही तो उसे नौकरी दिलवाई

मिमी थोड़ा सा आगे झुकी और बोली, “वो ये कभी कबूल नहीं करेगा मगर आज जो उसकी ये नौकरी है, ये मेरी ही बदौलत है. अगर मैंने उसका बायोडाटा इस कंपनी में नहीं भेजा होता, तो क्या उसकी ये नौकरी होती? देखो आज वो कहाँ पहुंच गया है? मगर फिर भी सोमनाथ को जैसे हमेशा शिकायत करने की आदत ही हो गई है. हमेशा यही कहता है की काश वो अपनी पिछली सौंपने में ही रहता. असल में सोमनाथ बिलकुल महत्वकांक्षी नहीं है. और जहाँ तक मेरा सवाल है, मैं तो बस उसकी मदद करना चाहती हूँ..”

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ये नौकरी सोमनाथ को इसलिए पसंद नहीं थी क्योंकि इसमें तनखाह तो ज़्यादा थी मगर साथ ही साथ उसका पूरा समय ऑफिस और टूर में ही निकल जाता था. उसे अब परिवार शुरू करने की जल्दी थी अगर मिमी अभी ये सब नहीं चाहती थी. तो उसने सीधा मना ना करके उसे इस नौकरी में धकेल दिया था.

“उसे हर कदम पर मेरी ज़रुरत होती है. मैं उसके होटल्स बुक करती हूँ, फ्लाइट के लिए उसका मेनू तय करती हूँ और उसके ऑनलाइन चेक इन भी करती हूँ. मैं उसकी टैक्सी तक खुद बुक करती हूँ. उसे तो मुझे अपने सेक्रेटरी की तनखाह देनी चाहिए और उलटे वो मुझसे कहता है की उसे मेरे कारण घुटन महसूस होती है.”

क्या वो सचमुच अपने बॉयफ्रेंड की मदद कर रही थी?

एक परसनल असिस्टेंट और एक गर्लफ्रेंड में काफी अंतर होता है. एक असिस्टेंट सिर्फ आपके दिए गए निर्देशों का पालन करते हैं, मगर मिमी ऐसा कुछ नहीं करती. वो इतनी कुशल है और उसके पास इतने साधन हैं, की किसी भी मुश्किल में वो झट से समाधान ले कर पहुंच जाती है. और जब बात सोमनाथ की आती है, तो उसे तो कुछ बोलने या करने का मौका ही नहीं देती है. बस अपनी राय और तरीका उस पर थोप देती है. उसके साथ “या तो मेरा रास्ता वरना अपना रास्ता नापो” वाली कथनी सही बैठती ही. उसने कई बार मेरी भी बहुत मदद की है मगर सोमनाथ अब घुटन महसूस करने लगा है. और मिमी की आदत से अब वो चिड़चिड़ाने लगा है. वो बिलकुल सक्षम है अपनी मुश्किलों को कुछ सँभालने में मगर उसे अक्सर ये मौका मिल ही नहीं पता है.

सोचती हूँ की सोमनाथ की ज़िन्दगी कही आसान हो जाएगी अगर कभी कभी मिमी उससे भी मदद और राय ले ले.
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