उसने कहा कि वह और किसी के साथ भी संबंध रखना चाहता है

यह उन शामों में से एक थी जब मैं युनिवर्सिटी से लौटता था और उसका कमरा अंदर से बंद पाता था। मैं जानता था कि उसके साथ अंदर एक दूसरा आदमी होगा। दीवार के उस पार बिस्तर की चरचराहट और सांसों की आवाज़ अब मुझे परेशान नहीं करती थी। मैं कुछ समय पहले उनसे अभ्यस्त हो चुका था। मैं चुपचाप हॉल में बैठा सिगरेट फूंकता रहता था और कुछ देर बाद चुंबनों के साथ दबी आवाज़ में गुडबाय सुनता था। फिर मेरा बॉयफ्रैंड पिछला दरवाज़ा बंद करता था, शर्ट पहनता था और हॉल में आ जाता था। फिर वह मुझसे मिलता था, अपनी बांहे फैला कर मुझे गले लगा लेता था और पूछता था कि मेरा दिन कैसा था। मैं इस तरह उसकी बाहों में मुस्कुरा दिया करता था जैसे कुछ हुआ ही ना हो और उसे बताता था कि चार्ल्स नदी के इस शहर में उसके साथ जीवन कितना अच्छा है।

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आसक्ति और अनभिज्ञता दोनों मज़बूत आदतें हैं। बचपन से ही, मैं बचने के लिए मैं अनभिज्ञता का उपयोग किया करता था।

जैसे कि केवल सच्चाई के अस्तित्व को खारिज करके मैं इससे बच सकता था। मैंने हमेशा ऐसा ही माना था। इसलिए, जब मुझे अपने एक्स बॉयफ्रैंड से प्यार हुआ, इसलिए मैंने हर उस शर्त को नज़रंदाज़ कर दिया जो उसने हमारे एक साथ होने के लिए रखी थी।

हम अपने देश से दूर एक अलग शहर में थे। उसने कहा था कि अगर वह हमारे संबंध के बाहर किसी के साथ संबंध बनाए तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसने कहा था कि ये बस उसके लिए कहानियों की तरह थे; और मैं भी अपनी कहानियां बना सकता हूँ। और प्यार को इन छोटी छोटी चीज़ों से अलग होना चाहिए जैसे पौटी करना, खाना, पानी पीना। सेक्स स्वाद और विचारहीन जिज्ञासा के बारे में है। प्यार केंद्रित रूचि और चिंताशील निवेश के बारे में था। मुझे परेशान नहीं होना चाहिए; बल्कि बियुवॉयर, फौकॉल्ट और फ्रॉइड पढ़ने के नाते मुझे उदार होना चाहिए। मैं सहमत हो गया। प्यार के इंजन को अलगाव और बेदखली की आवश्यकता थी। जो व्यवस्था मैंने और मेरे साथी ने की थी मैं उसे छोड़ने का इच्छुक नहीं था। हम संबंध को मुक्त भी नहीं करना चाहते थे। उसने किसी और के साथ सोने का चयन किया और मैंने नहीं किया -भले ही हम दोनों चुपचाप सहमत थे।

उसने कहा था कि अगर वह हमारे संबंध के बाहर किसी के साथ संबंध बनाए तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मैंने हर उस शर्त को नज़रंदाज़ कर दिया जो उसने हमारे एक साथ होने के लिए रखी थी

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इन सभी वर्षों में, मैंने इस तथ्य से बचने की कोशिश की कि हमारे साझे भविष्य की कोई संभावना नहीं है। मुझे लगा कि इसे अनदेखा कर के, मैं खुद को यह समझा सकूंगा कि शायद मैं उसे एक दिन बदल सकूंगा। मुझे यह लगता रहा कि एक दिन वह मोनोगोमस हो जाएगा और वह सिर्फ मेरा हो जाएगा, लेकिन वह दिन कभी आया नहीं। सबसे बुरी बात यह है कि जब आपको लगता है जिससे आप प्यार करते हैं आपको उसे बचाने की ज़रूरत है। आपको लगता है कि उन्हें बचाया जाना चाहिए। जो पूरी तरह से बकवास है! हम किसी को बचाने के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। उन्हें बचाने का हमारा संस्करण वास्तव में ‘उन्हें बदलने का हमारा विचार है’। मुझे कुछ वर्षों बाद इसका अहसास हुआ, जब मैंने अंततः संबंध समाप्त करने का फैसला किया।

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हालांकि, लोगों को जाने देना मेरे लिए हमेशा मुश्किल होता है, लेकिन मैंने लोगों को पकड़े रखने की अत्यधिक इच्छा को भी त्याग दिया है। मुझे लगता है कि बचाने का कार्य मुख्य रूप से स्वार्थी है। आप हमेशा इसे बचाएंगे, इस एकमात्र इच्छा के साथ कि एक दिन चीज़ें ठीक हो जाएंगी। या फिर चीज़ें वैसी हो जाएंगी जैसा आप चाहते हैं। लेकिन हर बचत के साथ व्यक्ति की इतनी ज़्यादा खपत हो जाती है जितना फिर से भरा नहीं जा सकता।

हम प्यार में बहुत सारे समझौते करते हैं, हम सबसे अस्थिर लोगों से प्यार कर बैठते हैं, उन्हें जाने के लिए असंख्य अवसर देते हैं, और फिर से उनके पास लौटते हैं यह सोचकर कि हमारे मन की कल्पनाएं अंततः इस बार हकीकत में बदल जाएंगी।

और यह कि पागल, उतारू प्यार को अंततः उसकी मंज़िल मिल ही जाएगी। जबकि सच में हम चाहने की चिंता को छोड़ना नहीं चाहते हैं।

मैं अपने मरीज़ों, विशेष रूप से शारीरिक दर्द वाले रोगियों से सबसे आम प्रश्नों में से एक यह पूछता हूँ – इस समस्या से वे क्या लाभ प्राप्त कर रहे हैं? उनमें से कुछ आमतौर पर चकरा जाते हैं, कुछ परेशान हो जाते हैं और कुछ क्रोधित हो जाते हैं। आप ऐसे प्रश्न कैसे पूछ सकते हैं? एक दर्द जो बरसों से कायम है और इतना दुर्बल है वह मुझे किस तरह लाभ पहुंचा रहा है? यह चीज़ वास्तव में मुझे मार रही है? वास्तव में, हममें से कई लोग इस दर्द को छोड़ना नहीं चाहते। यह हममें से कईयां की पहचान का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए हम उन संस्करणों पर टिके रहते हैं कि यह दर्द हमें किस तरह प्रभावित करते हैं ताकि हम हमेशा वैसे ही ठुकराए हुए प्रेमी बने रहें और दुनिया को बताएं कि हमने कितनी गहराई से प्यार किया था। हम नहीं जानते कि ऐसे दर्द, हमारे पवित्रिकरण से कहीं ज़्यादा गहरे रूप में परिवर्तित हो जाते हैं।

यह सब मुझे तब पता चला जब पिछले साल एक दूसरे युवा प्रेमी ने मुझे किस करते समय कहा कि मैं दयालु हूँ और मैं बहुत सहानुभूतिशील हूँ। मैंने सोचा कि उसे जाने देते हुए मैं कैसा महसूस करूंगा। मैने सोचा कि मुझे जीवन में कितनी बार अपने प्रेमियों को जाने देना होगा और कितनी बार मैं उन्हें विपत्ती के समय मेरे पास वापस आते हुए देखूंगा। यह मुझे बहुत पहले ही पता चल गया था कि यह एक पैटर्न है। लेकिन इस तरह के दर्द शायद एक तरह से सशक्त करने वाले हैं। मुझे यकीन है कि इसने हममें से कई लोगों को गर्व के साथ चलने में मदद की है और दुनिया को ठुकराए जाने की सुंदरता दिखाई है। कैसे हम पारस्परिकता से निर्भीक होते हैं, समय से निर्भीक होते हैं। सब कुछ अस्थायी रहा है और सब कुछ अस्थायी होगा। यह कि हमें बस बेहतर कथावाचक बनना पसंद है। या शायद जाने देना पसंद है।

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