उसने कमउम्र लड़की से अफेयर की कल्पना की, मगर लड़की ने उधार माँगा

एक ‘हैप्पिली एवर आफ्टर’ विवाहेतर संबंध

मैंने अपनी बड़ी कार एक पेड के नीचे लगा थी. बैंगलोर में ये पेड़ों की कतार ही तो है जो आँखों को थोड़ा सुकून देती है. उन दिनों बहुत ही चिलचिलाती धुप और गर्मी थी और इस रोड पर लगे इस पेड़ ने जान बचा ली. दोपहर के ढाई बजे सड़क पर गाड़ियां भी थोड़ी कम ही थी. मुझे अपनी कार ऐसी जगह लगानी थी ताकि कोई भी मुझे या उस इंसान को न देख सके जो अभी कार में बैठने वाली थी. मुझे और दस मिनट उसका इंतज़ार करना था.

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और वो आ गई!

बैंगलोर की अधिकतर लड़किओं की तरह उसने भी अपना आधा चेहरा स्कार्फ़ से ढका हुआ था. वो या तो सूरज से बचने के लिए था या फिर पहचाने जाने से बचने के लिए. वो सोशल मीडिया की अपनी फोटो से हलकी लग रही थी. मुझे याद आने लगा की उसने अपने प्रोफाइल में लिखा था, “एक्ट्रेस, थिंकर और ज़िन्दगी के मज़े लेने वाली”. उसने पुरानी सी जीन्स और चूर टी शर्ट पहनी थी और मेरी उमीदों से वो बिलकुल विपरीत दिख रही थी.

उसने गाडी का दरवाज़ा खोला और एक बिल्ली की तरह तेज़ी से बैठ गई. बैठते ही उसने मुझे जल्दी से कहा, ” गाडी स्टार्ट करो. मेरे भाई के दोस्त वहां क्रासिंग के पास खड़े हैं.”

मेरी पिछली गर्लफ्रेंड के साथ भी मेरा कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ था और मैंने पिछले दस सालों से किसी भी लड़की के साथ की कोशिश या उम्मीद छोड़ दी थी. मैंने भी इस मुलाकात के लिए काफी कुछ दांव पर लगाया था. मुझे भी मेरे काम और कला की वजह से काफी लोग अब जानने लगे थे. “अरे मैंने तो तुम्हे कल राजेश्वरी मंदिर के पास देखा था.” किसी साइट का सुपरवाइजर कभी कह देता. “मेरे ख्याल से पिछले रविवार को मैंने आपको गरुडा में देखा था. मुझे लगता है की मैंने आपकी ही कार देखि थी,” कभी कोई सहकर्मी एक दुष्ट मुस्कान के साथ बोलता. शहर में मेरे कोई रिश्तेदार नहीं थे मगर मैंने जान लिया था की मेरी पत्नी के दोस्त और मेरे पडोसी उन दखलंदाज़ी करते रिश्तेदारों से किसी मायने में भी कम नहीं थे और वो मुझे सबसे अजीबोगरीब जगहों पर भी ढूंढ ही लेते थे.

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आखिर हम आमने सामने मिले!

“अगर तुम इतना ही डरती हो तो तुमने मुझे यहाँ बुलाया ही क्यों? मैं तुमसे कहीं और मिल लेता. मेरी उम्र और मेरा पद दोनों ही मुझे इज़ाज़त नहीं देते की मैं ऐसी किसी स्कैंडल में फंसूं… ” मैं बोल ही रहा था की उसने अपना स्कार्फ़ उतारा और मैंने उसकी शक्ल देखी. पास से देखा तो उसके नैननक्श किसी भी कैमरामैन के लिए जन्नत से कम नहीं थे. अब मुझे समझ आया की वो अपनी सोशल फोटो में इतनी अलग क्यों थी. इस ढीली ढाली टी शर्ट के कारण उसकी खूबसूरती साफ़ नहीं समझ आ रही थी.

“तुम अपनी फोटो से कहीं ज़्यादा यंग लगती हो!” ये सुनकर वो शर्मा गई और उसने कहा, “मैं यंग ही हूँ.”

“मेरा मतलब ये नहीं था. एक पचास साल के पुरुष के लिए तो कोई भी यंग ही होगा,” मैंने अपना ही मज़ाक बनाते हुए कहा. वो भी हंसने लगी और माहौल भी अब कम सीरियस होने लगा था.

“मुझसे मिलने के लिए खुद ही पहल करने के लिए बहुत शुक्रिया. मैंने खुद ये नहीं कहा होता।” इस ढलती उम्र में अब वो आत्मविश्वास नहीं था की मैं खुद किसी लड़की को अपने आप आगे बढ़ कर मिलने को कहूँ.

अब हम आउटर रिंग रोड पर थे. दोपहर के कारन हाईवे काफी खाली था और जल्द ही मैं गाडी सौ की स्पीड में चला रहा था.

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एक फ्री लंच

“हमें कहाँ चलना चाहिए?

तुम बताओ?”

मैं बहुत कम ही पार्टी वगैरह जाता हूँ. मुझे नहीं पता होगा.”

“तो चलो वाटसन पब चलते हैं.”

“इस समय? क्या वो अभी खुला भी होगा?”

मैं इन चीज़ों में बहुत ही कच्चा था.

असल में सोशल मीडिया पर एक बात से दूसरी बात निकलती गई थी और उसने मुझसे मिलने की इच्छा जाहिर की थी. “मैं आपके बारे में और जानना चाहती हूँ. कैसे आप इस उम्र में भी आजकल की सभी फैशन और ट्रेंड के इतने जानकार हैं?”

मैं खुद को इतनी उम्र की एक लड़की के ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार करने से रोक नहीं पाया था. और मेरे अंदर का सुपर ईगो तो ख़ुशी से झूम रहा था और तुरंत ही उसने मिलने के लिए एक छोटी सी कहानी भी बना दी.

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और फिर सच्चाई सामने आई

हम दोनों ने एक एक बियर और एक प्लेट कटलेट आर्डर किये. वो किसी नए अनजान इंसान की तरह सामने की कुर्सी पर बैठ सकती थी मगर उसने मेरे बगल वाली कुर्सी चुनी. खाते हुए बार बार उसके हाथ मुझसे टकरा रहे थे और वो चाहती तो इस स्पर्श को रोक सकती थी मगर उसने ऐसा नहीं किया. हमने उसकी पसंद नपसंद, फिल्मों आदि की बातें की और उसने बताया की उसके घरवाले उसके एक्टिंग करियर से खुश नहीं थे.

“मुझे अपने घर से अलग हो कर अकेले रहना है. क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?”

“मैं कैसे मदद कर सकता हूँ?”

“अगर आप मुझे दस हज़ार रूपये का क़र्ज़ दे दें तो मैं पेइंग गेस्ट का एडवांस दे कर वहां रह सकती हूँ.”

अचानक एक शाम जो रंगीन और रूमानी हो सकती थी, अचानक बहुत ही व्यवसाइक सी लगने लगी. बस तभी मेरा एक फ़ोन आया और मैं तुरंत एक इमरजेंसी का बहाना कर वहां से उठ गया. वो लड़की जो मुझसे असल में क़र्ज़ मांगे आई थी, वो वही बिलकुल कन्फ्यूज्ड सी बैठी रह गई.

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