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उसने मेरी बजाए अपने माता-पिता को चुना और मैंने उसे दोष नहीं दिया

उसने कहा कि वह उसे अपने माता-पिता से अधिक चाहती है लेकिन फिर उसके पिता ने उसके सामने एक शर्त रखी....
a seated young man deep in thought

मैं 5 साल से अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रिलेशनशिप में था और फिर उसने फैसला किया कि वक्त आ गया है कि मैं उसके पेरेन्ट्स से मिलूं। वे दोनों मेरे बारे में जानते थे, पर हम न कभी मिले थे और न ही हमने बात की थी।

अंततः मैं  हवाई यात्रा करके मुंबई पहुंचा, उसके द्वारा इस बहु प्रत्याशित मीटिंग के लिए लाई हुई चेक वाली शर्ट पहनी, काला पैंट और जूते पहने।

“तुम्हें उनसे मिलने से पहले अच्छी तरह तैयार होना होगा, कैप्टन अमेरिका और बैटमैन के अलावा सबको तैयार होना पड़ता है!’’ उसने मुझसे कहा था।

उसके पिता कारपोरेट जगत के प्रभावशाली व्यक्ति थे, एक बहुराष्ट्रीय ब्रांड के भारतीय संचालन के प्रमुख थे। अगर मैं कहूंगा कि मैं नर्वस नहीं था तो यह झूठ होगा। बेशक मैं नर्वस था!

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हमने पहले ही एक साथ एक विस्तृत भविष्य की योजना बना ली थी- हमारे आँगन में साधारण-सी शादी, नदी किनारे रिसेप्शन, हनीमून के लिए बहामास जाना, मेरा अपनी पी-एच॰ डी॰ के लिए यूएस जाना, उसे कुछ सालों में वहाँ बुलाना, 3 सालों में बच्चे, इसी तरह की और बातें। इसलिए, सब कुछ दाँव पर लगा हुआ था और मैं बहुत घबराया हुआ था।

मैं उनके घर शाम को 8 बजे पहुंचा। वे मुंबई के भव्य उपनगरों में से एक में शानदार गगनचुंबी इमारत में रहते थे। मैंने उनके 19 वें फ्लोर के अपार्टमेंट में जाने के लिए लिफ्ट ली और डोरबेल बजाई। मेरी गर्लफ्रेंड ने दरवाजा खोला। उसने घबराई हुई मुस्कुराहट दी। मैंने सोचा यह पल उसके लिए भी मुश्किल था।

मैंने अपने जूते उतारे और अंदर गया। उसके पिताजी सोफे पर बैठकर ऑफिस की कुछ फाइलें देख रहे थे। मेरी गर्लफ्रेंड के दादाजी उसके पिता के पास काउच पर बैठकर कोलकाता नाइट राइडर्स का एक आईपीएल मैच देख रहे थे, और उसकी माँ रसोई में थीं। जब मैं अंदर गया तब उसकी माँ मेरे अभिनंदन के लिए बाहर आई।

“हैलो आंटी“, मैंने एक विस्तृत मुस्कान देते हुए कहा। उसकी माँ मेरी एकमात्र आशा थीं।

“हैलो“, उन्होंने उत्तर दिया। प्रतिक्रिया में कोई मुस्कान नहीं थी।

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उसके पिताजी ने कागजों से अपना सिर ऊपर उठाया। वह अवलोकन कर रहे थे और मुझे अपने चश्मे के ऊपर से देख रहे थे।

“आइए, बैठिए“, उन्होंने कागजों को एक तरफ करते हुए अपने पास मेरे लिए जगह बनाते हुए कहा।

मैं घबराया हुआ था।

जैसे ही मैं बैठा इंटर्व्यू शुरू हो गया। हमारे बीच कोई सामाजिक बातचीत नहीं हो रही थी। यह एक फ्रेशर के लिए डेटा एंट्री में कार्पोरेट इंटर्व्यू था।

“तुम आज से पाँच साल बाद खुद को कहाँ देखते हो? तुम फिजिस्ट क्यों बनना चाहते हो? क्या तुम निश्चित तौर पर वैज्ञानिक बनना चाहते हो? क्या तुम कभी विदेश गए हो? अभी तुम कितना कमाते हो? क्या तुम्हें विश्वास है कि इतने पैसों में तुम इतने वेतन में मेरी बेटी को अच्छी लाइफस्टाइल दे सकते हो?’’? ‘‘क्या सच में तुम यही काम करना चाहते हो?’’ क्या तुम अपना पेशा बदलना चाहोगे?“

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खैर, यह कहने की जरूरत कि यह मीटिंग अच्छी तरह समाप्त नहीं हुई। यहां तक कि उसके दादा को मक्खन लगाने की कोशिश भी काम नहीं आई। ‘‘मैं नहीं जानता कि कोलकाता नाइट राइडर्स क्यों हमेशा युसुफ पठान को लेने पर तुली रहती है! वह एक फालतू खिलाड़ी है,’’ मैंने कहा। मेरे जैसे कोलकाता नाइट राइडर्स के कट्टर प्रशंसक के लिए यह कहना ईश्वर-निंदा जैसा था! जिसपर उसके दादाजी ने मुझे सिर्फ घूर कर देखा।

आधे घंटे बाद जब मैं अपने होटल अकेले वापस पहुंचा, मेरी गर्लफ्रेंड ने फोन किया। चीजें सही नहीं थीं (यह बड़ा झटका था)। उसके पापा ने उससे पूछा था कि जब उसने मुझे क्या देख कर पसंद किया। हद तो तब हो गई जब उन्होंन यह कहा कि हो सकता है मैंने उसे धोखे से पटा लिया है।

उसके दादाजी ने मुझे मद्रासी कहा और उससे पूछा कि मुझमें ऐसा है क्या? इस बात से मुझे बुरा लगना चाहिए था लेकिन आश्चर्य की बात है ऐसा कुछ नहीं हुआ! मैं हैरान था!

मेरी एकमात्र उम्मीद, उसकी माँ भी अपने पति का पक्ष लेती ही दिख रही थी और उन्होंने कहा कि मैं एक हाई-फाई परिवार से हूँ और नास्तिक हूँ जबकि वे लोग कट्टर धार्मिक थे।

“शोना तुम फिक्र मत करो“ , कॉल समाप्त करते हुए उसने मुझसे कहा वह तुम हो जिसके साथ मैं अपनी बाकि जिंदगी गुज़ारना चाहती हूं, वे क्या सोचते हैं मुझे इसकी परवाह नहीं ! हर रात जब बेड पर जाऊँ तो तुम मेरे साथ हो और सुबह जब मैं जागूं तो भी तुम मेरे साथ हो वे नहीं! मुझे इस बात की भी परवाह नहीं की वह क्या सोचते हैं! बस वे लोग मुझे धमकाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चिंता मत करो, मैं तुम्हें छोड़ कर कहीं नहीं जाउंगी!’’

lady talking on a phone
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पर उसने ऐसा नहीं किया, उसने अपने माता पिता का सामना करते हुए मेरा बचाव किया, उसका भाई और मैं भी दोस्त थे उसने भी हमारा साथ दिया, उसके माता पिता उसके निर्णय से खुश नहीं थे! पर ऐसा लग रहा था कि अंत में वे इसे  स्वीकार कर लेंगे!

लेकिन फिर, अगले साल, वह एक फैंसी बिज़नस स्कूल में चली गई और उसके पिता ने उसकी पूरी ट्यूशन फीस भर दी (12 लाख के करीब)। यह बहुत ज़्यादा धनराशि थी और इसका उस पर बहुत असर पड़ा। अचानक, वह अपने माता-पिता के प्रति बाध्य महसूस करने लगी। अचानक, अब वह अपने संकल्प में इतनी दृढ़ नहीं थी। अचानक, वह कन्फ्यूज़्ड हो गई थी।

एक दिन जब मैंने उससे पूछा तो उसने कहा, ‘‘मैं नहीं जानती नील, मेरे पापा ने इतना ज़्यादा पैसा इन्वेस्ट किया है यह वाकई में बहुत सारा पैसा है और मैं उनकी कर्जदार महसूस कर रही हूँ। मैं अभी भी तुम्हारे साथ होना चाहती हूँ , पर अब मैं अपने सिर पर कर्ज का बोझ महसूस कर रही हूँ “।

मैंने अपनी गर्लफ्रेंड का दृष्टिकोण समझा और उसे सोचने का समय दिया। मैं जल्दी में नहीं था। मैं उसे हर तरीके से सहारा देने के लिए वहां था।

पर फिर, दुर्भाग्यवश, एक दिन अपने पिता के कर्ज के बोझ का यह अहसास भारी होता चला गया, और सब खत्म हो गया। एक के बाद एक बात आगे बढ़ती गई और हाँ, हमारा ब्रेकअप हो गया।

जादू भरे छह साल एक रात के पागलपन में  खो गए।

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और अब उसने किसी दूसरे एमबीए से शादी कर ली, और वह भी प्रेम विवाह – बी- स्कूल में अपने सीनियर के साथ। वह लड़का उनकी सभी मांगों को पूरा करता था। उत्तर भारतीय , धार्मिक, एक अच्छे वेतन वाला एमबीए, गोरा और क्या नहीं।

तो, जब वह कहती थी कि वह मुझसे प्यार करती थी, क्या वह झूठ बोल रही थी? नहीं, वह ऐसा नहीं कर रही थी।

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जब वो यह कहती थी कि वो मुझे अपने माता-पिता से अधिक प्यार करती है, क्या वो झूठ बोलती थी? मेरे अनुभव में वो झूठी नहीं थी। जिस तरह वो उनके सामने खड़ी हुई थी, मैंने महसूस किया कि वो मुझसे प्यार करती थी, अगर अपने माता-पिता से अधिक नहीं तो उनके जितना तो वो मुझे प्यार करती थी।

जो भी हुआ उसके लिए मैं उसे दोष नहीं देता। क्या वह किसी और तरह से इस स्थिति को संभाल सकती थी? मुझे नहीं लगता। सच कहूं तो, बहुत से लोग नहीं जानते कि इस तरह की स्थिति से कैसे निपटें।

शायद मैं भी नहीं जानता….

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