जब पति का ३८ साल से छुपा राज़ खुला

आरती आंटी अपने पूरे जीवन के दौरान एक सच्ची गृहणी रही थीं। जब उन्होंने बृजेश अंकल से शादी की, वे 700 रूपये के मामूली वेतन के साथ भारतीय सेना में एक क्लर्क थे। लेकिन जिस तरह आंटी ने सभी बिलों को संभाला और सभी जिम्मेदारियों का ख्याल रखा, उसने सभी को विस्मित कर दिया। ब्रजेश अंकल 35 वर्षों तक सेना में थे, उन्होंने कई पदक हासिल किए और कुछ वर्षों पहले सेवानिवृत्त हो गए। उनकी बेटी वाणी विवाहित थी और बेटा बरून एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर था। परिवार ब्रजेश चाचा को प्राप्त होने वाली पेंशन के साथ परितृप्त था।

जब तक कि उन्हें बड़ा समाचार प्राप्त नहीं हुआ था, चीज़ें सुचारू रूप से चल रही थीं। वाणी गर्भवती थी। 26 वर्षों बाद, परिवार में एक नया सदस्य आने वाला था। आरती आंटी ने प्रतिज्ञा की थी कि वह अपनी बेटी को गोद भराई में हीरों का हार देंगी, और उनकी तलाश एक 55000 रूपये मूल्य के हार पर जाकर रूकी – उनकी परिस्थिति को देखते हुए यह थोड़ा ज़्यादा महत्वकांक्षी था। उनकी शादी के 29 वर्षों में यह पहली बार होने जा रहा था कि वह अपने पति से कुछ मांगने वाली थीं और उन्होंने सोचा था कि वह मान जाएगें, खासतौर पर इसलिए क्योंकि यह उनकी बेटी के लिए था।

ये भी पढ़े: 10 विचार जो एक स्त्री के दिमाग में आते हैं जब उसका पति अन्य लड़की को निहार रहा होता है

परिवार में एक नया सदस्य आने वाला था।
बेटी की शादी हो चुकी थी और हम परिपूर्ण थे।

लेकिन उन्हें हैरानी हुई कि उन्होंने मना कर दिया। आंटी ने कारण जानने की मांग की। आखिरकार, इतनी ही पेंशन में उनके साथी कहीं अधिक भव्य जीवन जी रहे थे।

वह जानती थी कि उनके पति उनके वेतन और अब पेंशन के चौथाई भाग का हिसाब नहीं देते थे। अब तक, किसी ने उनसे प्रश्न नहीं किया। वह संदेह करने लगी।

उन्होंने मांग की कि वे समझाएं। अंकल ने उन्हें उत्तर नहीं दिया, इसलिए आंटी ने स्वयं पता लगाने का निश्चय किया।

उन्होंने लॉकर खोला और निवेश और संपत्ति से संबंधित सभी कागज़ातों का परीक्षण करना शुरू कर दिया। लेकिन उन्हें वहां कुछ भी नहीं मिला। उन्हें कुछ पुराने खत मिले जिनमें लगभग एक ही बात लिखी थीः “आपका पैसा मिल गया, धन्यवाद। भगवान आपका और आपके परिवार का भला करे।”

उनके पति उनके वेतन और अब पेंशन के चौथाई भाग का हिसाब नहीं देते थे
उन्होंने लॉकर खोला और निवेश और संपत्ति से संबंधित सभी कागज़ातों का परीक्षण करना शुरू कर दिया

इस सबूत के साथ, वह लिफाफे पर लिखे पते पर जाने के लिए और यह पता करने के लिए कि पत्र भेजने वाला कौन था, तैयार हो गईं। उनका बेटा उनके साथ गया।

ये भी पढ़े: 6 संकेत की वह वास्तव में भरोसेमंद नहीं है

कोलकाता से बस में चार घंटे की यात्रा के बाद वे अंततः अपने गंतव्य -बोंगान पहुंच गए, लगभग भारत- बांग्लादेश बार्डर पर, जहां दोनों देशों के बीच एकमात्र सिमांकन धातु के तारों की एक श्रृंखला थी। लोगों को एक दूसरे के देश की यात्रा के लिए पासपोर्ट या वीज़ा की आवश्यकता नहीं थी।

उन्होंने लोगों से रास्ता पूछा और उन्हें अमीना और मुस्तफा मियां की झोपड़ी का रास्ता दिखाया गया।

“आप लोग कौन हैं, आप मुझसे क्या चाहते हैं?” अमीना ने पूछा, जो एक वृद्ध स्त्री थी। आरती आंटी ने एक पत्र उनकी तरफ बढ़ाते हुए कहा, “आपने ये पत्र मेरे पति को लिखे हैं। मैं आपको नहीं पहचानती। क्या आप दूर की रिश्तेदार हैं?”

ये भी पढ़े: मुझे संदेह हुआ कि मेरे पति का अफेयर चल रहा है क्योंकि उन्होंने पनीर मांगा

वह स्त्री आरती आंटी के पैरों में गिर पड़ी और उनका पति आरती आंटी को सहज महसूस करवाने के लिए घर से एक साफ कुर्सी ले आया।

“हम उनके संबंधी नहीं है। वह हमारे लिए भगवान है,” उस व्यक्ति ने कहा, जिसकी दायीं आँख में मोतियाबिंद था।

“माफ करना, लेकिन इसका क्या अर्थ है?”

“ओह! यह 1971 के युद्ध के दौरान हुआ जब हम शरणार्थियों के रूप में भारत आए।” अमीना का 17 वर्षीय पुत्र चारागाह में गाय-भैंस चरा रहा था जब उसे एक भटकी हुई गोली आ लगी। वह अपने पुत्र को आस-पास के भारतीय सेना के शिविर में ले गई जहां एक पुरूष नोटबुक में कुछ लिख रहा था। उसने न्याय की मांग की क्योंकि वह उनका एकमात्र पुत्र था।

मां और बेटा दोनों खुशी से अभिभूत हो गए थे
“वह हमें पैसे भेजते हैं क्योंकि मेरा पुत्र मर चुका है और हम शरणार्थी हैं।”

उस पुरूष के पास कोई उत्तर नहीं था। उन्होंने केवल माफी मांगी और वादा किया कि यद्यपि वह लड़के की मृत्यु की क्षतिपूर्ति नहीं कर सकते, वह उनकी क्षति के लिए हमेशा जवाबदेह रहेंगे। और पिछले 38 वर्षों से उन्होंने मेरे परिवार को अटल रूप से आर्थिक सहयोग दिया है। वह जहां कहीं भी होते, उनका मनी आर्डर हर महीने की 5वीं तारीख तक हमारे पास पहुंचने में कभी विफल नहीं हुआ। मेरी पत्नी का ट्यूमर का ऑपरेशन, मेरा मोतियाबिंद का उपचार उन्हीं के कारण हो सका है। दीदीमोनी, आपका पति एक फरिश्ता है। आज मुझे आपको देखने का अवसर मिला है, कृपया मुझे अपनी सर्वश्रेष्ठ सेवा देने का मौका दीजिए।”

मां और बेटा दोनों खुशी से अभिभूत हो गए थे। जब बरून और वह जाने लगे, आंटी ने भारी आवाज़ में कहा, “मैं यह सोच कर आई थी कि मुझे एक दोषी रहस्य जानने को मिलेगा जो तुम्हारे पिता हम सब से छुपाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन मुझे अहसास हुआ कि हमेशा से ही, मेरे पास उनके रूप में सबसे बड़ा खज़ाना रहा है।

Tags:

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website.