वेतन मायने रखता है

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यह एक शुक्रवार की सामान्य शाम थी और मैं अपने कार्य सप्ताह को लगभग पूरा कर चुका था। उसने एक पथरीले भाव के साथ, शीशे के दरवाजे पर दस्तक दी। मैंने उसे इशारे से बुलाया। एक हाथ की दूरी पर एक आदमी, चेहरे पर झगड़े के भाव लिए, उसके पीछे था-जाहिर है उसका साथी था। मैंने उन्हें बिठाया। एक क्षण की चुप्पी के बाद, पत्नी ने कहा, “सर, हम तलाक चाहते हैं, आपसी सहमति पर। जितनी जल्दी हो सके इसे प्रोसेस करें, और हम आपके आभारी रहेंगे।” लड़की की अपेक्षा लड़के को देखते हुए, मैंने पूछा, “आपके कारण क्या हैं?” “असंगति सर! अब बहुत हो गया है!” वह जोर से बोली। एक गुस्से भरे भाव की अभिव्यक्ति के साथ पुरूष, आश्चर्यजनक रूप से नियंत्रण में लग रहा था, उसने सिर्फ सहमति में सिर हिलाया और कहा, “हाँ सर। अब बहुत हो गया है।” मैंने एक पल को गुजरने दिया, और लगभग एक मिनट के बाद, उसने फिर कहा, “क्यों वह मुझ पर इतनी कठोरता से दबाव डालती है? मैं काम करने की इच्छा, जीवन के छोटे सुखों का आनंद लेना खो चुका हूँ। और एक छोटी सी बात से ओब्सेस्ड हो गया हूँ, कि मेरा वेतन उसकी तुलना में कम है। अब बस!” कुर्सी की बाँह पर अपना मुक्का मारते हुए, उसने कहा।

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“मेरे कहने में गलत क्या है, सर? क्या मैं प्रेरित नहीं कर रही हूँ जब मैं उसे बक अप करने, उसके जीवन में आगे बढ़ने, और कम से कम मेरे जितना कमाने के लिए कहती हूँ? समाज क्या सोचता होगा?”

मैंने पूछा, “तो, आपको लगता है कि समाज के विचार महत्वपूर्ण हैं?“ उसने जवाब दिया, “हाँ! समाज की मंजूरी के बिना हम क्या हैं? मुझे पता है कि वे सभी हमारी वेतन की असमानता के बारे में बुरी बातें कहते हैं।”

“लेकिन क्या आप दोनों एक कपल के रूप में एक साथ आर्थिक रूप से कम्फरटेबल नहीं हैं? नहीं है क्या…“ “उसने मेरी बात को काटा, “नहीं, सर! मैं 45000 कमाती हूँ, और इसका वेतने अब जाकर सिर्फ 40000 हुआ है!”

“दिन के शुरु होने से लेकर खत्म होने तक, यही सब है जो मैं सुनता हूँ। ज़्यादा कमाओ! मेरे जागने के बाद जो पहली चीज मुझे सुनने को मिलती है वह मेरे वेतन के बारे में होती है। मैंने अपने कार्यस्थल पर अपनी एकाग्रता को खो दिया है। मैं बहुत बड़ी गलतियां कर रहा हूँ। शायद मैं अपनी नौकरी जल्द ही खो दूँ अगर यह नहीं रुकी और मैं ऐसा नहीं होने दे सकता। मैं बस तलाक चाहता हूँ ताकि मैं खुशी से और अपनी शर्तों पर, जितना कमाता हूँ उसमें संतुष्ट होकर जी सकूँ।”

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मैंने एक गहरी सांस ली, और पूछा, “आप दोनों कब से विवाहित हैं?” “सोमवार,” दोनों से जवाब आता है। “आपका मतलब है, चार दिन पहले?” शर्मिंदा प्रतीत होते हुए उन्होंने सिर्फ मंजूरी में सिर हिलाया। “आप एक-दूसरे को कब से जानते है?” मैंने पूछा। “तीन सालों से। एक कॉमन फ्रेंड के जरिए मुलाकात की। हम जल्द ही प्यार हो गया, और कुछ ही हफ्तों में, एक साथ रहने लगे।”

“तो, आपका साथ रहना समाज के जजमेंटे के लिए इतनी बड़ी समस्या नहीं थी?” मुझे यह पूछना पड़ा।

“नहीं,” उन दोनों ने उत्तर दिया। “लेकिन आदमी को औरत से ज्यादा कमाना होता है?” “हां”, लड़की अकेले जवाब देती है। “क्यों?” कोई जवाब नहीं। अजीब चुप्पी और आंख से संपर्क का एक पल।

“सर, कृपया सिर्फ मामले को आगे ले जाएँ और हमें परामर्श देने की या कुछ और करने की कोशिश न करें। हम अपने निर्णय के बारे में स्पष्ट हैं। हम आप के पास दृढ़ता से फैसला लेने के बाद ही आए हैं। कृपया हमें बताएं कि आपका शुल्क क्या होगा, और इसे आगे बढ़ने दीजिए”, लड़के ने कहा। लड़की ने सिर हिलाया। मैंने कहा, “ठीक है, अगर यह इतना स्पष्ट है, मैं इस आगे ले जा सकता हूँ। लेकिन चूंकि यह शुक्रवार की शाम है, और यह मेरे लिए एक विस्तारित छुट्टी का समय है, कृपया आगे की चर्चा के लिए बुधवार की दोपहर को वापस आएँ।” वे सहमत हुए, और जाने के लिए उठ गए।

लड़का पहले चला गया, और अपने पीछे से दरवाजा बंद कर दिया।

वह, प्रत्यक्ष रूप से हिल गई, उसकी आँखें मद्धिम हो गईं, मेज पर रुकी, वह अस्थिर दिख रही थी, और उसका अपने घुटनों पर नियंत्रण नहीं था, और वह कुर्सी पर गिर गई। मैंने जल्दी से उसके कंधों को संभाला, उसे वापस बिठाया, और उसे एक गिलास पानी दिया। उसने कहा, “मैं गर्भवती हूँ। तीसरा महीना अभी शुरू हुआ है।”

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मैं बाहर गया और लड़के को वापस अंदर बुलाया. “मैं भी पिछले हफ्ते तक यह नहीं जानता था, सर! इसने इसे छिपाया”, लड़के ने कहा। उसने बताया, “मैं वेतन वृद्धि के लिए उसकी वार्षिक समीक्षा का इंतज़ार कर रही थी, और इस अच्छी खबर को साझा करना चाहती थी। अब यह सब मेरी समझ से बाहर है!” और एक बच्चे की तरह सिसकने लगी। मैंने लड़की का हाथ थामा, और उसे एक आश्वस्त मुस्कान दी। अगले दो घंटे, मैंने वो किया जो मैं नहीं करना चाहता थाः सलाह। एक बिंदु पर, उनकी बर्फ पिघली। वह लड़के के कंधो पर गिरते हुए रो पड़ी।

एक सेकंड की झिझक के बाद लड़के ने उसे कसकर थामा और वह भी सिसकियाँ भर कर रोने लगा। प्रलाप, आरोप लगाने, क्षमा माँगने, समझौता करने और चुप रहने के एक घंटे बाद, वे अपनी शादी को एक अवसर देने के लिए सहमत हुए, और हाथ में हाथ डाले चले गये। बेशक, मुझे मेरे सामान्य शुल्क का भुगतान करने के बाद।

(जैसा राम कुमार रामास्वामी को बताया गया)

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