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पिता की मौत के बाद जब माँ को फिर जीवनसाथी मिला

वो विधवा थी, दो बच्चों की माँ थी, और उम्र में उनसे काफी बड़ी थी.पिता की मृत्यु हुए कई वर्ष बीत गए थे और इन कई वर्षों से माँ बिलकुल अकेली और तनहा थी. मगर दोनों एक दुसरे के अच्छे दोस्त बने और फिर जीवनसाथी...
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पिता की मृत्यु हुए कई वर्ष बीत गए थे और इन कई वर्षों से माँ बिलकुल अकेली और तनहा थी.

माँ एक दिन अपने दांत के डॉक्टर के पास गयी थी. परेशां सी वो प्रतीक्षा रूम में बैठी अपने नंबर का इंतज़ार कर रही थी. उसी हॉल में वो भी बैठे थे. वो खुद भी एक डॉक्टर थे और उम्र में माँ से काफी कम लग रहे थे. कुछ कुदरती आकर्षण ही रहा होगा तभी तो यूँ ही दोनों के बीच बातों का सिलसिला शुरू हो गया. “परेशां मत होइए. आप इस डॉक्टर के पास सुरक्षित हैं. मेरा दोस्त है और बहुत ही काबिल डॉक्टर भी. बिलकुल आराम आराम से आपका इलाज़ करेगा,” उसने माँ को टेंशन में देख कर आश्वासन दिया. माँ उसे नहीं जानती थी मगर उसकी बातें सुन कर उनका डर बिलकुल छुमंतर हो गया. माँ और मेरे भावी पिता दोबारा जल्दी ही लंच के लिए मिले और फिर डिनर पर. बातें बढ़ने लगी और फिर जल्दी ही विषय दोस्ती, प्यार और ज़िन्दगी जैसे गहरे होने लगे, साथ साथ दोनों का रिश्ता भी गहरा होने लगा.

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