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पिता की मौत के बाद जब माँ को फिर जीवनसाथी मिला

वो विधवा थी, दो बच्चों की माँ थी, और उम्र में उनसे काफी बड़ी थी.पिता की मृत्यु हुए कई वर्ष बीत गए थे और इन कई वर्षों से माँ बिलकुल अकेली और तनहा थी. मगर दोनों एक दुसरे के अच्छे दोस्त बने और फिर जीवनसाथी...
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पिता की मृत्यु हुए कई वर्ष बीत गए थे और इन कई वर्षों से माँ बिलकुल अकेली और तनहा थी.

माँ एक दिन अपने दांत के डॉक्टर के पास गयी थी. परेशां सी वो प्रतीक्षा रूम में बैठी अपने नंबर का इंतज़ार कर रही थी. उसी हॉल में वो भी बैठे थे. वो खुद भी एक डॉक्टर थे और उम्र में माँ से काफी कम लग रहे थे. कुछ कुदरती आकर्षण ही रहा होगा तभी तो यूँ ही दोनों के बीच बातों का सिलसिला शुरू हो गया. “परेशां मत होइए. आप इस डॉक्टर के पास सुरक्षित हैं. मेरा दोस्त है और बहुत ही काबिल डॉक्टर भी. बिलकुल आराम आराम से आपका इलाज़ करेगा,” उसने माँ को टेंशन में देख कर आश्वासन दिया. माँ उसे नहीं जानती थी मगर उसकी बातें सुन कर उनका डर बिलकुल छुमंतर हो गया. माँ और मेरे भावी पिता दोबारा जल्दी ही लंच के लिए मिले और फिर डिनर पर. बातें बढ़ने लगी और फिर जल्दी ही विषय दोस्ती, प्यार और ज़िन्दगी जैसे गहरे होने लगे, साथ साथ दोनों का रिश्ता भी गहरा होने लगा.[restrict] रिश्ते गुदगुदाते हैं, रिश्ते रुलाते हैं. रिश्तों की तहों को खोलना है तो यहाँ क्लिक करें

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माँ को उसने नए सपने दिखाए

मेरी माँ अमन से करीब नौ साल बड़ी थी, मगर उनके प्यार में यह उनके लिए कोई मसला नहीं था. न माँ को इस उम्र के फासले से फ़र्क़ पड़ रहा था न अमन को, जो माँ के प्रेम में दीवाना ही था. मगर हाँ, जब तक प्रेम कहानी में कोई विरोध करने वाला न हो, तब तक वो प्रेम कहानी असली कहाँ लगती है. तो माँ और अमन के बीच के इस उम्र के फासले से अमन के घरवाले काफी नाखुश थे. इसके अलावा ये बात कि माँ की यह दूसरी शादी होगी और उनके दो बच्चे है, चीज़ों को और मुश्किल बना रहा था अमन के घरवालों के लिए. वो किसी भी सूरत में इस रिश्ते के लिए तैयार होते नहीं दिख रहे थे. मगर इन सब से बेफिक्र अमन माँ को एक अच्छी, प्यार और आदर से भरपूर ज़िन्दगी के वादे करता रहा. अमन ने माँ को वायदा किया कि वो उनके बच्चों को हमेशा प्यार करेगा और सबसे बड़ी बात जो उसने कही, वो थी “मैं तुम्हे ताउम्र प्यार करूंगा. कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा.”

उन दोनों ने किसी से कोई अनुमति नहीं ली, बस सबको आमंत्रण दे दिया. २२ दिसंबर २००२ को माँ और अमन शादी के बंधन में बंध गए. दोस्तों और परिवार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए. मैं इस प्रेम कहानी के बारे में कशीदे पढ़ सकती हूँ, कवितायेँ लिख सकती हूँ. इस शादी में बंधे दो लोग सिर्फ शादी से नहीं जुड़े, वो तो जुड़े हैं एक दुसरे के परस्पर प्यार और दोस्ती में. मेरे ये पिता आज भी मेरी माँ को जब किसी से मिलवाते है तो कहते है, “इनसे मिलें, यह है मेरी सबसे अच्छी और गहरी दोस्त”.

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दो दोस्त

शादी के १५ साल और एक बच्चे के बाद, वो आज भी वैसे ही साथ घुमते हैं, नाचते हैं, और घंटों फ़ोन पर एक दुसरे से गप करते हैं. सिर्फ मैं और मेरी बहन ही नहीं, उनके आस पास के कई लोगों ने उनकी ज़िन्दगी से प्रेरणा ली हैं. हम सब ने प्रेम की असली परिभाषा उन दोनों की ज़िन्दगी से सीखी है. प्यार से मेरे पिता माँ को जेजे कहते हैं. हममें से कोई नहीं जानता कि आखिर जेजे का मतलब क्या है. अगर कभी उनसे पूछो तो साफ़ मन कर देते हैं और कहते हैं, “यह राज़ तो मेरे साथ मेरी कब्र तक जाएगा.” कई बार एक अच्छे डिनर के बाद दोनों चुपचाप अपनी अपनी किताबों में खोये बैठे होते हैं, या हाथ में हाथ डाल चांदनी रात में लम्बी सैर को निकल जाते हैं.

सच कहूँ तो उन्हें देखकर अक्सर सोचती हूँ कि काश मुझे भी ऐसा ही प्यार ज़िन्दगी भर के लिए मिल जाए. आज की इस दुनिया में जब डेटिंग, वन नाईट स्टैंड जैसी बातें आम है, इनका रिश्ता बहुत ख़ास लगता है.
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