विवाह के बाद एक स्त्री के जीवन में होने वाले 15 परिवर्तन

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जब एक स्त्री पैदा होती है, तबसे ही उसे समाज में कुछ भूमिकाएँ निभाना सिखाया जाता है। शादी से पहले, वह अपने परिवार में बेटी और बहन होती है। हालांकि, शादी के बाद उसकी भूमिकाएँ जबरदस्त रूप से बदल जाती हैं। उसे एक बेटी और बहन होने के साथ ही एक पत्नी, एक बहू और भविष्य में एक माँ भी बनना होता है। उसे अपनी दिनचर्या और अपने माता-पिता के घर को उस व्यक्ति के साथ रहने के लिए छोड़ना पड़ता है, जिससे वह शादी के बाद प्यार करती है। इसलिए शादी के बाद एक स्त्री को कई बदलावों से गुज़रना होता है जो चुनौतीपूर्ण भी हो सकते हैं और कुछ सिखा भी सकते हैं।

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शादी के बाद स्त्री को 15 बदलावों का अनुभव होता है

Table of Contents

यहाँ उन बदलावों की लिस्ट है जिनसे एक स्त्री शादी के बाद गुज़रती है जिनका उसके जीवन और दूसरों के साथ उसके संबंध पर गहरा प्रभाव होता है।

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1. वह अधिक ज़िम्मेदार और विश्वसनीय बन जाती है

वे दिन जा चुके हैं जब वह लापरवाह रहती है और अपनी इच्छा अनुसार जीती है। शादी के बाद वह ना केवल अपने पति की बल्कि उसके परिवार की भी देखभाल करने लगती है और इस प्रक्रिया में वह ज़्यादा से ज़्यादा ज़िम्मेदार और विश्वसनीय बन जाती है। ना अब यहाँ घर का खर्चा उठाने के लिए उसके पिता है ना ही काम संभालने के लिए उसकी माँ। शादी के बाद ये सारी ज़िम्मेदारियाँ उसकी पहली प्राथमिकता बन जाती हैं। हैरानी की बात है, कि शादी के बाद एक स्त्री इस बारे में शिकायत किए बगैर अधिक ज़िम्मेदार बन जाती है।

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2. कैरियर उसके जीवन में लगभग दूसरा स्थान ले लेता है

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शायद शादी के बाद हर स्त्री के मामले में ऐसा ना हो। लेकिन आमतौर पर यह देखा गया है कि शादी के बाद और सभी तरह के कर्तव्य निभाते हुए वह इतनी अधिक व्यस्त हो जाती है कि अपने कैरियर पर ध्यान देने के लिए उसके पास समय नहीं होता है। हालांकि, यदि वह वास्तव में कैरियर में आगे बढ़ना चाहती है तो वह शादी के दो या तीन साल बाद उसे फिर से शुरू करेगी बशर्ते की उसका पति और परिवार सहयोग करें और इस बारे में खुश हो।

3. उसका फैसला लेने का तरीका बदल जाता है

शादी से पहले, एक स्त्री केवल अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचती है और अपनी मर्ज़ी और इच्छा से फैसले लेती है। लेकिन शादी के बाद ये बदल जाता है क्योंकि अब उसे अपनी ज़िंदगी किसी के साथ गुज़ारनी है और कोई भी फैसला लेते समय उसे ध्यान में रखना है। इसलिए अब एक स्त्री जहाँ उसे अपने पति की मूल्यवान सलाह की ज़रूरत हो, वह उसकी सलाह लेती है और फिर उस अनुसार अंतिम निर्णय लेती है।

4. धैर्य और परिपक्वता उसके नंबर वन गुण बन जाते हैं

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यदि एक स्त्री स्वस्थ और सफल वैवाहिक जीवन चाहती है तो धैर्य और परिपक्वता आवश्यक हैं। ये गुण एक विवाहित स्त्री में अपने आप आ जाते हैं और वह यह समझने के लिए पर्याप्त रूप से परिपक्व हो जाती है कि किसी स्थिति से कैसे निपटना है। वह शांत रहना और अपनी नाराज़गी को अधिक नरमी से ज़ाहिर करना भी सीख जाती है।

5. उसे अपना निजी स्थान और समय कभी कभर ही मिल पाता है

यह ऐसी चीज़ है जिसकी शिकायत शादी के बाद अधिकांश स्त्रीयाँ करती हैं। एक व्यक्ति के व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास के लिए निजी स्थान और समय अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। लेकिन एक विवाहित स्त्री को स्वयं के और अपनी पसंद के कार्य के लिए मुश्किल से समय मिल पाता है। शादी के बाद उसकी दिनचर्या होती है- पति और उसके परिवार के सदस्यों, घर के कामकाज़ों, व्यावसायिक प्रतिबद्धता की देखभाल करना आदि। खुद पर बिताने के लिए निजी स्थान और समय के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकती।

6. विवाहित स्त्री अपने मन की बात बोलने से पहले सोचती है

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एक स्त्री अपने माँ बाप और भाई बहन को सोचे समझे बगैर कुछ भी बोल सकती है क्योंकि वे उसे अच्छी तरह से जानते हैं। लेकिन जब वह शादी करके नए परिवार में जाती है, उसे बोलते समय सावधानी बरतनी पड़ती है ताकि उसकी किसी बात से उनको ठेस ना पहुँच जाए। समय के साथ वह सोच समझकर और किसी को दुखी किए बगैर अपने मन की बात कहना सीख जाती है। ‘बोलने से पहले सोचने’ के नीयम का पालन करना पड़ता है।

7. उसके कपड़े पहनने की शैली बदल जाती है

एक विवाहित स्त्री को शादी के पहले की ड्रेसिंग स्टाइल को भूल कर उस परिवार की शैली को अपनाना पड़ता है जहाँ उसकी शादी हुई है। इसके साथ ही, उसको अपने पति की पसंद का भी ध्यान रखना पड़ता है। हालांकि कुछ परिवार अपनी बहुओं को उनकी मर्ज़ी के कपड़े पहनने की अनुमति देते हैं, लेकिन उसे शादी के बाद क्या पहनना चाहिए इस विषय में अधिकांश परिवारों में कुछ रोक-टोक होती हैं।

8. वह अपने परिवार पर विशेष ध्यान देती है

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शादी से पहले, एक स्त्री अपने दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद करती है। उसे अपने मित्रों के साथ घूमने या ट्रिप पर जाने में कोई हर्ज नहीं होता। लेकिन शादी के बाद स्त्री पहले अपने परिवार के बारे में सोचती है और उनको विशेष महत्त्व देने लगती है। अगर उसे बाहर जाना होगा तो वह अपने परिवार के साथ जाने का प्लान बनाएगी। दोस्त उसके जीवन का हिस्सा होंगे लेकिन उसके लिए परिवार ज़्यादा महत्त्वपूर्ण होगा।

9. एक वैवाहित स्त्री सुरक्षित महसूस करती है

ज़ाहिर सी बात है कि शादी के बाद एक स्त्री शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तौर पर सुरक्षित महसूस करेगी क्योंकि उसका पति हमेशा उसके साथ होगा। उसका पति उसका सपोर्ट सिस्टम होगा, उसकी सहायता करेगा और सलाह देगा। इसलिए वह अपना जीवन सुरक्षा और संतुष्टि के उच्च स्तर के साथ आराम से जी सकेगी।

10. पैसे खर्च करते समय वह अधिक सावधानी बरतेगी

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शादी के बाद स्त्री बहुत अधिक बचत करने लगती है क्योंकि वह पैसों का महत्त्व जानती है और जानती है कि भविष्य के प्रयासों के लिए पैसे बचाना कितना ज़रूरी है। इसलिए वह केवल अत्यंत आवश्यक चीज़ों पर ही पैसे खर्च करेगी वह भी ज़रूरत के हिसाब से।

11. उसका पसेसिव व्यवहार दूर हो जाएगा

आमतौर पर शादी से पहले, एक स्त्री आमतौर पर उसके बॉयफ्रेंड के प्रति अधिक पसेसिव होती है। जब कोई दूसरी महिला उसके बॉयफ्रेंड के साथ फ्लर्ट करने की कोशिश करती है तो वह चिंतित होती है और उसे जलन होती है। हालांकि, शादी के बाद यह पसेसिव व्यवहार गायब हो जाता है क्योंकि वह जानती है कि वह हमेशा के लिए उसका है। साथ ही वह इतनी परिपक्व हो जाती है कि समझ सके कि यह सब जीवन का एक हिस्सा है।

12. वह अपने परिवार के सदस्यों को बहुत अच्छे से समझने लगती है

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अगर परिवार में कोई मुश्किल दौर से गुज़र रहा है या फिर पति को प्रोफेशनली कोई परेशानी हो रही है, तो सबसे पहले विवाहित स्त्री को यह बात पता चलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका पूरा ध्यान उसके परिवार पर होता है और वह जानती है कि हर एक के जीवन में क्या हो रहा है।

13. उसके माता-पिता उसे और अधिक महत्त्व देते हैं

यह हर उस लड़की की कहानी है जिसकी शादी होती है क्योंकि वह अपने माँ-बाप की राजकुमारी होती है। इसलिए वह जब भी अपने माता-पिता के घर जाती है वह उन सबका प्यार और स्नेह पाती है। उसके माता-पिता उसे पहले से भी अधिक महत्त्व देते हैं और हमेशा उसका साथ देते हैं क्योंकि वे वास्तव में उसे मिस करते हैं।

14. एक विवाहित स्त्री का वज़न बढ़ना आम बात है

शादी के बाद जीवनशैली और खानपान की आदतों में बदलाव के कारण एक स्त्री का वज़न बढ़ सकता है। हार्मोनल बदलाव, व्यायाम के लिए समय ना होना, आकर्षक लगने की ज़रूरत ना होना, प्राथमिकताओं में बदलाव आदि वज़न बढ़ने के मुख्य कारण हो सकते हैं।

15. रोमांस में उसकी रूचि कम हो जाती है

अधिकांश विवाहित पुरूष शिकायत करते हैं कि शादी के बाद रोमांस में उनकी पत्नी की रूची खत्म हो गई है। शादी के बाद एक स्त्री अतिरिक्त जवाबदारियों में इतनी ज़्यादा फँस जाती है कि उसके प्रतिदिन के कार्य में सेक्स और रोमांस का शायद ही कोई महत्त्व रह जाता है।

निश्चित ही स्त्री एक सम्मान किए जाने योग्य शक्ति है क्योंकि शादी के बाद उसके जीवन में इतने ज़्यादा बदलाव आने के बावजूद वह एक समृद्ध वैवाहिक जीवन में बने रहने, उसका अनुकूलन करने और जीने में सक्षम है।

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