विवाहेतर संबंधों के अब और अधिक ओपन होने के 5 कारण

एक साल से ज़्यादा की मेरी वेब ब्लॉगर यात्रा के दौरान, मुझे 10 से ज़्यादा ब्लॉग संपादित करने का मौका मिला है जो विवाहेतर संबंधों के बारे में उदारतापूर्वक कहते हैं। मैंने पाया कि लोग अक्सर अपने साथी के अलावा किसी और के साथ प्यार में पड़ने की बात करते हैं, लेकिन फिर भी, भारतीय समाज के पारंपरिक और रूढ़िवादी मानदंड उन्हें वापस उनके विवाह में खींच लेते हैं, भले ही उनकी व्यक्तिगत भावनाएं उन्हें एक नए व्यक्ति के साथ आनंद लेने को कहती हैं।

क्या हम ज़्यादा एक्सेप्टिंग होने लगे हैं?

देखिए, विवाहेतर संबंधों के बारे में प्रश्न और स्वीकरण नई अवधारणा नहीं है और समाज में दशकों से प्रचलित है। बेवफाई पर सेगमेंट जो विवाहेतर संबंधों से संबंधित व्यक्तिगत समस्याओं को दर्ज करते हैं वे पत्रिकाओं और समाचार पत्र में मौजूद हैं। हालांकि, प्रश्न, स्वीकरण या परामर्श के पोस्ट मुख्य रूप से अज्ञात या बदले हुए नाम से प्रकाशित किए गए थे। क्या इसका मतलब यह हो सकता है कि हम इस तरह के रिश्तों के प्रति अधिक स्वीकार्य हो रहे हैं, या यह बस इतना है कि लोग इन दिनों ज़्यादा इमानदार हो रहे हैं?

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भारतीय समाज में विवाहेतर संबंधों की बढ़ती स्वीकृति के 5 मुख्य कारण हैं।

1. हम अपनी इच्छाओं के बारे में निश्चित हैं

लोग आजकल अपनी इच्छाओं को स्वीकार कर रहे हैं और इसलिए उन सामाजिक दायित्वों को अस्वीकार करने के लिए तैयार हैं जो उन्हें मानसिक और शारीरिक इच्छा को रोकने के लिए मजबूर करते हैं। चूंकि हम जो चाहते हैं उसके बारे में हम निश्चित हैं, इसलिए उसे प्राप्त करने के लिए सक्रिय प्रयास करते हैं। इन दिनों कोई भी बलिदान और अपूर्ण इच्छाओं से भरा जीवन स्वीकार नहीं करता है क्योंकि वह बुढ़ापे में पश्च्याताप नहीं करना चाहते हैं और जीवन को भरपूर जीना चाहते हैं। इस प्रकार, एक इनफेचुएशन या आकर्षण आसानी से एक संबंध में परिवर्तित हो जाता है और इस बारे में कोई परवाह नहीं रहती की समाज इस बारे में क्या सोचेगा।

हम अपनी इच्छाओं के बारे में निश्चित हैं
लोग आजकल अपनी इच्छाओं को स्वीकार कर रहे हैं

2. बातचीत के लिए ज़्यादा स्पेस

पुरूष और महिलाओं की बातचीत के लिए समाज में और अधिक स्पेस हैं। उदाहरण के लिए, लड़कियां ढूंढने के लिए किसी को लॉन्जरी की दुकान या सैलून में जाने की ज़रूरत नहीं है; वे बार या क्लब जैसे स्थानों पर आसानी से मिल सकते हैं। समाज अब वैसा नहीं रहा है जैसा यह 30 साल पहले था, जहां विवाहित महिलाएं नौकरी पर या किसी दूसरी जगह अन्य पुरूषों के साथ बातचीत करने में संकोच करती थीं। कपल अब ज़्यादा खुल गए हैं कि उनका साथी अनौपचारिक सेटिंग में विपरीत लिंग के व्यक्ति से मिले और अब ऐसे स्थानों पर आकर्षण उत्पन्न होने लगता है।

कपल अब ज़्यादा खुल गए हैं कि उनका साथी अनौपचारिक सेटिंग में विपरीत लिंग के व्यक्ति से मिले और अब ऐसे स्थानों पर आकर्षण उत्पन्न होने लगता है।

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3. महिलाएं ज़्यादा स्वीकारात्मक हैं

महिलाएं वास्तव में दब्बू और कमज़ोर स्टीरीयोटाइप से विकसित हो गई हैं जो कभी बताया करती थी कि ‘स्वीकार्य व्यवहार’ क्या था। अब महिलाएं ज़्यादा स्वतंत्र और आत्मविश्वासी हैं और सार्वजनिक तौर पर अपना वास्तविक रूप दिखाने से डरती नहीं हैं। वे स्मार्ट हैं, प्रतिभाशाली हैं और जानती हैं कि उन्हें क्या चाहिए। महिलाएं अब अपनी राय बताने से और उन लोगों की खिल्ली उड़ाने से डरती नहीं हैं जो सोचते हैं कि विवाहेतर संबंध सिर्फ पुरूषों के लिए ही हैं।

4. अधिक सामाजिक अवसर

महिलाएं ज़्यादा स्वीकारात्मक हैं
अब महिलाएं ज़्यादा आत्मविश्वासी हैं अपना वास्तविक रूप दिखाने से डरती नहीं हैं।

सामाजिक रूप से जुड़ने की सुविधा बढ़ी है। हमारे पास किसी के संपर्क में आने के लिए सभी विकल्प मौजूद हैं। अपने हाईस्कूल के क्रश को ढूंढना और आपके जैसे विचारों वाले अजनबियों से मिलना आसान है। लगभग सभी दूरसंचार कंपनियां ऐसे नंबरों का विज्ञापन करती हैं जिसमें मीठी-मीठी बातें करने वाली महिलाएं या पुरूष सेवा करने के लिए आपकी प्रतीक्षा कर रहे होते हैं।

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5. जीवनशैली में परिवर्तन

अंत में, जीवनशैली। हाँ, हमारी जीवनशैली ऐसी है कि काम के कारण लंबे समय तक आपके साथी से दूर रहना अब पहले से कहीं अधिक आम है। शराब का उपयोग बढ़ गया है और आप पार्टियों में नशे का उच्च स्तर देखते हैं। इसी तरह, काम अक्सर रात तक बढ़ सकता है और हम जिम, ऑफिस, क्लब या यहां तक कि कैब साझा करने वालों के साथ भी घनिष्ठ बातचीत करते हैं। महत्वाकांक्षा, तनाव, अकेलापन, सच्चे प्यार की तलाश या अतृप्त ज़रूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है।

विवाहेतर मामलों के उदय में योगदान देने वाले कई अन्य कारण हैं; हालांकि, कारण चाहे जो भी हो, समाज में निश्चित रूप से स्वीकृति बढ़ी है।

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