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वह शांत लगती थी लेकिन कुछ गड़बड़ ज़रूर थी।

उसका कैरियर अच्छा चल रहा था लेकिन अचानक वह प्यार में पड़ गई और उसने शादी कर ली।
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(पहचान छुपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं)

वह मैथिली है। या, अगर आप चाहें तो उसे अपनी पसंद के किसी भी दूसरे नाम से बुला सकते हैं। नाम मायने नहीं रखता। महत्त्वपूर्ण यह है कि आप उसकी कहानी जान लें।

वह मेरी सहेली है। ऐसी जिसे में वर्षों से जानती हूँ। वह जो हर उतार चढ़ाव में मेरे साथ रही है। और फिर जब साथ देने की बारी मेरी आई, मैं नहीं कर सकी। उसने करने ही नहीं दिया। मैं घंटो तक उसके पास बैठकर उसे रोता हुआ देखा करती थी।

आठ साल पहले की बात है। उसे अपना प्यार मिल चुका था। उसका साथी। यह एक बड़ी घोषणा थी क्योंकि वह कभी शादी नहीं करना चाहती थी। वह काम के साथ खुश थी। और फिर थोड़ा और काम। इसलिए जब उसने घोषणा की कि वह शादी कर रही है, उसके माता-पिता सातवें आसमान पर पहुँच गए और मैं चकित रह गई।

उसका विवाह एक भव्य समारोह था। सजावट पर कोई खर्च बाकी नहीं रह गया था और इससे नर्म चिकन कबाब मैंने कभी नहीं खाए थे।
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अगले कुछ साल उसके लिए एक परिकथा जैसे थे। कम से कम मुझे तो ऐसा ही लगता था जब वह अपने पति, सास-ससुर, अपने नए घर, नई कार जो उसके पति ने उसे दी थी, विदेशी स्थान जहां वे अक्सर जाया करते थे, उसकी खुशी कि उसके ससुराल वाले उसे काम करने के लिए प्रोत्साहित करते थे, आदि के बारे में बताया करती थी। और फिर उसकी बेटी। एक सुंदर बच्ची के बारे में भी।

एक दिन उसने मुझे फोन किया और हमारे पसंदीदा अड्डे दिल्ली हाट पर मिलने को कहा।

वह शांत दिख रही थी। लेकिन मैं जानती थी कि कुछ गड़बड़ है। हम कभी भी सप्ताह के दिन नहीं मिलते थे क्योंकि वह जितनी जल्दी हो सके अपने परिवार के पास लौटना चाहती थी।

जैसे ही हम फ्रूट बीयर पीने बैठे, मैंने ऐसा कुछ देखा जिसकी मुझे कभी उम्मीद भी नहीं थी। मैथिली में धैर्य, आत्मसंयम और आत्म विश्वास कूट-कूट कर भरा है। उस शाम, हालांकि, मैंने देखा कि वह स्ट्रॉ पकड़े हुए थी, घूंट नहीं भर रही थी और उसके हाथ कांप रहे थे। जब आँसू धीरे-धीरे उसके गालों से बह रहे थे, उसने मुझे कहा, ‘‘वह जा रहा है। मैंने उसे रोका नहीं। हम इसे यथासंभव परिपक्वता से कर रहे हैं।”

उसका पति उससे कम कमाता था और फिर भी वह उसपर पैसा उड़ाने का इल्ज़ाम लगाने का कोई अवसर नहीं छोड़ता था। ऐसे आरोप जबकि वास्तविकता में वह अपना ही पैसा खर्च कर रही थी और वह भी उसपर, उसके माता-पिता और उनकी बच्ची पर! फिर वह मामले को अगले स्तर पर ले गया। उसने घोषणा कर दी कि वह ऐसी स्त्री के साथ नहीं रह सकता जो भविष्य के बारे में सोचने और बचत करने की बजाए हमेशा सिर्फ पैसे उड़ाती रहती है। वह यह तब कह रहा है जब वह पहले ही बीमा पालिसी, म्यूच्वल फंड और फिक्स्ड डिपॉज़िट्स में निवेश कर चुकी थी।

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वह एक भद्दे तलाक के खेल में शामिल हो सकती थी। लेकिन उसने ऐसा किया नहीं। वह ऐसी नहीं थी। उसने सरल और समझदारीपूर्ण मार्ग अपनाया।

यह पारस्परिक सहमति के साथ सीधा-साधा और आसानी से अलग होना था। बच्ची उसे मिली। और उसमें भी उसने पति को स्वतंत्र मुलाकात की अनुमति दी। उसे उसके पति के पैसों की परवाह नहीं थी। उसके पास स्वयं का बहुत सारा पैसा था। उसने उससे कोई रखरखाव नहीं लिया।

उसके बाद जो दिन आए वे उसके लिए आसान नहीं थे। माता-पिता के सहयोग के बिना, शहर में अकेली माँ होना, कभी भी एक आसान कार्य नहीं है। लेकिन उसने वह किया। रहने के लिए एक जगह ढूंढने से लेकर अपनी आंटी से बात करने तक, जो उसके काम पर होने के दौरान उसकी बच्ची को संभालेगी।

मैं इस सब के दौरान उसके संपर्क में रही। जब भी हम बात करते, हर बार, उसकी शादी के एलबम बाहर आ जाते थे।

जितना ज़्यादा मैं उसे कहती थी कि यह काम वह गलत कर रही है, वह मुझे कहती, ‘‘मेरे पास अतीत की बस यही यादें बची हैं” और फिर वह बिखर कर रो पड़ती थी। वह मेरी एक नहीं सुनती थी।

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उसने तस्वीरों को जकड़ लिया। ऐसा लगता था कि वे उसके साथी थे।

फिर कुछ महीनों पहले एक दिन, जब मैं उसके घर पर थी, और डिनर किए बहुत समय हो गया था, उसने वे एल्बम निकाले और मुझे सौंप दिए।

“ये ले लो। और इनके साथ जो करना है वो करो। लेकिन दुबारा मुझे ये कभी मत दिखाना। अब मुझे इन तस्वीरों की कोई ज़रूरत नहीं है,’’ उसने कहा।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

मेरे भीतर बहुत सारे प्रश्न उभर आए। उसने एक का भी उत्तर नहीं दिया। वह मैथिली है। वह अपने फैसले खुद लेती है। और जब वह ऐसा करती है, वह बस कर लेती है; वह किसी को तब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं देती जब तक वह वह खुद ना चाहे। लेकिन तब से, मैंने उसके अंदर एक बदलाव देखा है। वह उस लड़की जैसी दिखती है और प्रतीत होती है जिसे मैं बरसों पहले जानती थी। मैं अब भी नहीं जानती कि क्या सोचकर उसने वे एल्बम छोड़ दिए। लेकिन मुझे उम्मीद है कि एक दिन वह मुझे बतएगी।

मेरी ओर से- मैंने एल्बम फैंके नहीं हैं। वे एक बक्से में पैक हैं और ठीक मेरी अलमारी के पीछे रखे हैं। मैं कभी-कभार बक्से को देख लेती हूँ। यह मुझे याद दिलाता है कि चीज़ें बदलती हैं। कदम उठाने या हार मानने का निर्णय हमेशा हमारे पास होता है। मेरी सहेली ने पहला वाला चुना।
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विवाहित हूँ मगर सबको बताती हूँ की मैं सिंगल हूँ

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